गुरुग्राम–जींद हादसे: सरकार की लापरवाही से उजागर हुई श्रमिक सुरक्षा की सच्चाई: राव नरेंद्र सिंह

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निर्माण स्थल और अवैध फैक्ट्री हादसों में कई मजदूरों की मौत, प्रशासनिक जवाबदेही पर उठे गंभीर सवाल

चंडीगढ़, 03 अप्रैल। गुरुग्राम और जींद में हाल ही में हुए दर्दनाक हादसों ने हरियाणा में श्रमिक सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था की गंभीर खामियों को उजागर कर दिया है। राव नरेंद्र सिंह ने इन घटनाओं पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर तीखे सवाल खड़े किए हैं।

उन्होंने बताया कि गुरुग्राम में एक निर्माण स्थल पर हुए हादसे में 7 मजदूरों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य घायल हो गए। वहीं जींद में एक अवैध फैक्ट्री में लगी आग से 12 मजदूरों की जान चली गई और कई गंभीर रूप से झुलस गए। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि दोनों ही मामलों में सुरक्षा मानकों और निगरानी व्यवस्था में भारी लापरवाही बरती गई।

राव नरेंद्र सिंह ने कहा कि ये घटनाएं महज हादसे नहीं, बल्कि प्रशासनिक विफलता का परिणाम हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में नियमों का पालन केवल कागजों तक सीमित है और कार्रवाई हमेशा हादसे के बाद ही की जाती है।

उन्होंने सरकार से सवाल किया कि यदि निर्माण स्थल असुरक्षित था तो उसे अनुमति किसने दी, और यदि फैक्ट्री अवैध थी तो वह अब तक संचालित कैसे होती रही। साथ ही उन्होंने यह भी पूछा कि सुरक्षा मानकों के उल्लंघन के बावजूद संबंधित अधिकारी क्या कर रहे थे।

जींद की घटना पर विशेष चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि यह हादसा गरीब और वंचित वर्ग के शोषण को भी दर्शाता है। मृतकों में अधिकांश मजदूर SC/OBC समुदाय से थे, जो बेहद कम वेतन पर जोखिम भरी परिस्थितियों में काम करने को मजबूर थे।

उन्होंने कहा कि यह मामला केवल श्रम कानूनों के उल्लंघन का नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय और मानव गरिमा के हनन का गंभीर उदाहरण है।

राव नरेंद्र सिंह ने बताया कि इस संबंध में मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर कई मांगें रखी गई हैं, जिनमें दोनों मामलों की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच, संबंधित विभागों की जवाबदेही तय करना, दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई, पीड़ित परिवारों को मुआवजा और रोजगार उपलब्ध कराना, तथा राज्यभर में सुरक्षा मानकों को सख्ती से लागू करना शामिल है।

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार इन घटनाओं को केवल औपचारिक जांच और मुआवजे तक सीमित रखती है, तो यह पीड़ितों के साथ अन्याय होगा और भविष्य में ऐसे हादसों को बढ़ावा देगा।

अंत में उन्होंने कहा कि हरियाणा को केवल विकास के दावों की नहीं, बल्कि जवाबदेह और संवेदनशील शासन की जरूरत है, जहां मजदूरों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता हो।

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Author: Bharat Sarathi

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