पीक मानसून से पहले जीएमडीए ने 105 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित लेग-4 स्टॉर्म वाटर ड्रेन को किया चालू

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1400 क्यूसेक क्षमता की इस ड्रेन से बादशाहपुर ड्रेन पर जल निकासी का दबाव कम होगा

सीईओ जीएमडीए की सतत मॉनिटरिंग की वजह से मानसून से पहले पूर्ण हो सका निर्माण

गुरुग्राम, 3 जुलाई: गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण (जीएमडीए) ने पीक मानसून से पहले 4.3 किलोमीटर लंबी लेग-4 स्टॉर्म वाटर ड्रेन का संचालन शुरू कर दिया है। लगभग 105 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित इस परियोजना से शहर की जल निकासी व्यवस्था में सुधार होगा और इस नई ड्रेन के माध्यम से गुरुग्राम के दक्षिणी सेक्टरों से वर्षा जल की तेज़ी से निकासी हो सकेगी तथा बादशाहपुर (लेग-3) ड्रेन पर दबाव भी कम होगा।

इस संबंध में जानकारी देते हुए जीएमडीए के मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री पी.सी. मीणा ने बताया कि पिछले छह महीनों के दौरान इस परियोजना की साप्ताहिक समीक्षा और नियमित निरीक्षणों के माध्यम से लगातार निगरानी की गई, ताकि मानसून शुरू होने से पहले इसे पूरी तरह संचालित किया जा सके।

उन्होंने कहा कि लेग-4 ड्रेन हाल के वर्षों में जीएमडीए द्वारा विकसित सबसे महत्वपूर्ण स्टॉर्म वाटर अवसंरचना परियोजनाओं में से एक है। इसका संचालन केवल एक बड़े इंजीनियरिंग कार्य का समापन नहीं है बल्कि गुरुग्राम के लिए बाढ़ राहत कार्यों की दिशा में यह ड्रेन लंबी अवधि के दौरान स्थायी समाधान देगी । इसके बनने से गुरुग्राम शहर के मुख्य रूप से सुभाष चौक, बख्तावर चौक, मेफील्ड गार्डन रोड, गुरुग्राम यूनिवर्सिटी रोड, आर्टेमिस हॉस्पिटल रोड, कन्हई चौक, सेक्टर 44, सेक्टर 68 से 80 तक के क्षेत्रों को लाभ होगा । यह ड्रेन बादशाहपुर ड्रेन पर बरसाती पानी के दबाव को कम करेगी ।

उन्होंने बताया कि लेग-4 रीइन्फोर्स्ड सीमेंट कंक्रीट (आरसीसी) बॉक्स ड्रेन का निर्माण वाटिका चौक से सेक्टर 37 डी तक किया गया है, जहाँ ये रामप्रस्था सोसायटी के निकट बादशाहपुर ड्रेन से जुड़ेगी । इस ड्रेन की जल वहन क्षमता 1,400 क्यूसेक है। यह परियोजना सदर्न पेरिफेरल रोड (एसपीआर) क्षेत्र के तेजी से विकसित हो रहे इलाकों के लिए एक समर्पित जल निकासी चैनल के रूप में कार्य करेगी। इस परियोजना की एक प्रमुख विशेषता यह है कि वाटिका चौक पर बादशाहपुर ड्रेन के साथ जहाँ लेग-4 ड्रेन का मिलान होता है, वहाँ पर रेगुलेटरी गेट लगाया है जिसको आवश्यकता अनुसार संचालित किया जा सकता है । भारी बरसात के दौरान बादशाहपुर ड्रेन के फालतू पानी को इस गेट के माध्यम से लेग-4 में डाला जा सकता है , जिससे बादशाहपुर ड्रेन ओवरफ्लो होने की संभावनाएं कम होगी और संवेदनशील क्षेत्रों से वर्षा जल की निकासी अधिक प्रभावी ढंग से हो सकेगी।

उन्होंने कहा कि यह परियोजना अस्थायी उपायों कि बजाय दीर्घकालिक बाढ़ नियंत्रण इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। जीएमडीए द्वारा गुरुग्राम के शहरी आबादी क्षेत्र में जलभराव की चुनौती से निपटने के लिए स्थायी समाधान किए जा रहे हैं ।

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Author: Bharat Sarathi

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