हरियाणा में  स्वास्थ्य संस्थानों में पानी के टैंकों की तत्काल सफाई के दिए आदेश – डॉ. सुमिता मिश्रा

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सख्ती से पालन कर निर्धारित सुरक्षा व स्वच्छता मानकों के अनुसार टैंकों को कीटाणु-मुक्त करना अनिवार्य

चंडीगढ़, 2 अप्रैल – स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण आयुष चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा ने राज्य भर के सरकारी मेडिकल संस्थानों, विश्वविद्यालयों और स्वास्थ्य केंद्रों में पानी के सभी टैंकों की तत्काल जाँच और सफ़ाई के लिए सख़्त निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने सुरक्षित पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करने में किसी भी तरह की लापरवाही के प्रति ज़ीरो टॉलरेंस (बिल्कुल भी बर्दाश्त न करने) की नीति पर बल दिया है।

डॉ. मिश्रा ने कहा कि समय-समय पर संज्ञान में आया है कि कई संस्थानों में पानी के टैंकों की नियमित रूप से सफ़ाई नहीं की जा रही है, जिससे स्वास्थ्य का गंभीर ख़तरा पैदा हो रहा है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि मरीज़ों, कर्मचारियों और आगंतुकों के लिए सुरक्षित और स्वच्छ पानी उपलब्ध करवाना बेहद ज़रूरी है और इस मामले में कोई समझौता नहीं किया जा सकता।

उन्होंने सभी संस्थानों को निर्देश दिए गये है कि वे ज़मीन के ऊपर और ज़मीन के नीचे बने, दोनों तरह के पानी के टैंकों की तत्काल और पूरी तरह से जाँच करें। इस जाँच में टैंकों की मौजूदा स्थिति का आकलन किया जाना चाहिए, जिसमें किसी भी तरह के प्रदूषण, रिसाव या ढाँचे को हुए नुक़सान के संकेतो की पहचान करना भी शामिल है, ताकि संभावित ख़तरों को रोका जा सके।

जारी निर्देशों के तहत सभी टैंकों की पूरी तरह से सफ़ाई करना अनिवार्य है। इसमें टैंकों में जमा गाद को हटाना, अंदर की सतहों को ठीक से धोना और निर्धारित सुरक्षा व स्वच्छता मानकों के अनुसार कीटाणु-मुक्त करना शामिल है। संस्थानों को निर्देश दिये गये है कि वे यह सुनिश्चित करें कि यह पूरी प्रक्रिया केवल अनुमोदित (मंज़ूर) तरीकों का उपयोग करके ही की जाए।

डॉ. मिश्रा ने संस्थानों को निर्देश दिया है कि वे पानी के टैंकों की समय-समय पर जाँच और सफ़ाई के लिए एक व्यवस्थित कार्यक्रम तय करें, जिसे प्राथमिकता के आधार पर हर तीन महीने (त्रैमासिक) में लागू किया जाए और किसी प्रकार की लापरवाही की पुनरावृत्ति को रोका जाए। इसका उद्देश्य पानी की गुणवत्ता और स्वच्छता मानकों को लगातार बनाए रखना है।

सभी संबंधित अधिकारियों को इन निर्देशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने और 5 अप्रैल, 2026 तक इसकी अनुपालन रिपोर्ट (पालन की रिपोर्ट) जमा करने के लिए कहा गया है। इसके अलावा उपायुक्तों को निर्देश दिये गये है कि वे जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के माध्यम से इन निर्देशों के कार्यान्वयन की निगरानी करें और सात दिनों के भीतर अपनी निगरानी रिपोर्ट जमा करें।

डॉ. मिश्रा ने पुनः दोहराया कि स्वच्छ और सुरक्षित पानी पहुँचाना स्वास्थ्य सेवा वितरण का एक बुनियादी और अनिवार्य हिस्सा है। उन्होंने सभी अधिकारियों को निर्देश दिये कि वे इस मामले को सर्वोच्च प्राथमिकता दें और यह सुनिश्चित करें कि हरियाणा भर के स्वास्थ्य संस्थानों में स्वच्छता मानकों को बनाए रखने में किसी भी तरह की कोई चूक न हो।

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Author: Bharat Sarathi

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