– अहीरवाल समेत हरियाणा में पकी फसलों पर प्रकृति का कहर, सरसों-गेहूं को भारी नुकसान
– विद्रोही बोले: समय पर गिरदावरी नहीं हुई तो किसानों को नहीं मिलेगा न्याय
रेवाड़ी, 1 अप्रैल 2026 – स्वयंसेवी संस्था ‘ग्रामीण भारत’ के अध्यक्ष वेदप्रकाश विद्रोही ने अहीरवाल क्षेत्र सहित हरियाणा के अधिकांश हिस्सों में मंगलवार को हुई ओलावृष्टि व बेमौसम बारिश से सरसों और गेहूं की फसलों को हुए भारी नुकसान पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने इसे पकी फसल पर प्रकृति का ऐसा भीषण प्रहार बताया, जिसने किसानों की आर्थिक स्थिति को बुरी तरह झकझोर दिया है।
विद्रोही ने कहा कि मार्च के अंतिम दिनों और अप्रैल के शुरुआती सप्ताह में होने वाली बारिश व ओलावृष्टि किसानों के लिए सबसे खतरनाक साबित होती है, क्योंकि इस समय फसल पूरी तरह पककर कटाई के लिए तैयार होती है। अहीरवाल क्षेत्र के रेवाड़ी, महेंद्रगढ़ और गुरुग्राम जिलों में इन दिनों सरसों और गेहूं की कटाई चरम पर थी, ऐसे में खेतों में खड़ी और कटी हुई—दोनों तरह की फसलें भारी नुकसान की चपेट में आ गई हैं।
उन्होंने बताया कि जहां सरसों की बची हुई फसल को भारी नुकसान पहुंचा है, वहीं गेहूं की फसल ओलावृष्टि से सबसे अधिक प्रभावित हुई है। खड़ी गेहूं की बालियां टूटकर जमीन पर गिर गईं और दाना मिट्टी में मिल गया, जबकि कटी हुई फसल भीगकर खराब हो गई। बारिश के कारण गेहूं और सरसों का दाना काला पड़ने से उसका वजन कम होगा और बाजार में कीमत भी घटेगी।
विद्रोही ने यह भी कहा कि अनाज मंडियों में बिक्री के लिए रखी सरसों भी भीग गई है, जिससे किसानों को प्रति क्विंटल 500 से 700 रुपये तक का नुकसान उठाना पड़ेगा। पिछले पंद्रह दिनों में दूसरी बार हुई इस प्राकृतिक मार ने किसानों की आर्थिक कमर पूरी तरह तोड़ दी है।
उन्होंने सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि पहले हुई बारिश से हुए नुकसान की अब तक गिरदावरी नहीं करवाई गई है। यदि इस बार भी समय पर विशेष गिरदावरी नहीं हुई, तो फसल बीमा कंपनियां या तो मुआवजा नहीं देंगी या फिर नाममात्र का भुगतान करेंगी।
विद्रोही ने हरियाणा सरकार से मांग की कि केवल दावे करने के बजाय तत्काल विशेष गिरदावरी करवाई जाए और प्रभावित किसानों को प्रति एकड़ 50 हजार रुपये का मुआवजा दिया जाए, ताकि उन्हें इस संकट से उबरने में राहत मिल सके।







