आईटीआई में बढ़ती महिला भागीदारी से ऑटो सेक्टर को मिलेगा नया टैलेंट पूल

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मारुति सुजुकी में महिलाओं की बढ़ती उपस्थिति, समान अवसर की दिशा में बड़ा कदम: राहुल भारती

गुरुग्राम, 31 मार्च 2026. (रोशन भारद्वाज) – मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड ने ऑटोमोबाइल सेक्टर में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल करते हुए एक समावेशी कार्य संस्कृति को बढ़ावा दिया है। आईटीआई और तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी से अब ऑटो सेक्टर को एक बड़ा और विविध टैलेंट पूल मिलने की संभावना है।

गौरतलब है कि कंपनी ने वर्ष 1982 में सुजुकी मोटर कॉर्पोरेशन के साथ साझेदारी कर गुरुग्राम में अपना पहला मैन्युफैक्चरिंग प्लांट स्थापित किया था, जहां दिसंबर 1983 में मारुति 800 का उत्पादन शुरू हुआ। आज कंपनी आधुनिक मॉडलों के साथ वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना चुकी है।

समय के साथ कंपनी ने ऑटोमोबाइल क्षेत्र में महिलाओं के लिए नए अवसर खोले हैं। अब महिलाएं ऑटोमोबाइल टेक्नीशियन, क्वालिटी इंस्पेक्टर और प्रोडक्शन सुपरवाइजर जैसे तकनीकी पदों पर कार्य कर रही हैं। पहले जहां महिलाएं पारंपरिक कोर्स जैसे सिलाई-कढ़ाई, ब्यूटी पार्लर या बेसिक ट्रेड तक सीमित थीं, वहीं अब वे बीटेक और एमटेक जैसी उच्च तकनीकी शिक्षा लेकर मैकेनिकल और कंप्यूटर साइंस क्षेत्रों में अपना करियर बना रही हैं।

गुरुग्राम और मानेसर स्थित कंपनी के विनिर्माण संयंत्रों में 190 से अधिक महिलाएं शॉप फ्लोर पर कार्यरत हैं। ये महिलाएं उत्पादन, गुणवत्ता नियंत्रण, इंस्ट्रूमेंट पैनल सब-असेंबली, रियर डोर सब-असेंबली, ट्रांसमिशन और के एवं जेड सीरीज़ इंजन असेंबली जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।

कंपनी के वरिष्ठ कार्यकारी अधिकारी राहुल भारती ने कहा कि कंपनी का उद्देश्य केवल महिला कर्मचारियों की संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि एक ऐसा कार्य वातावरण तैयार करना है जहां लिंग की परवाह किए बिना सभी को समान अवसर मिलें।

उन्होंने बताया कि महिला कर्मचारी भी पुरुषों की तरह प्रशिक्षण और कौशल विकास कार्यक्रमों से गुजरती हैं और उन्हें करियर उन्नति के समान अवसर मिलते हैं। हालांकि, यांत्रिक और विद्युत जैसे आईटीआई पाठ्यक्रमों में महिलाओं की भागीदारी ऐतिहासिक रूप से कम रही है, जिससे प्रतिभा का दायरा सीमित हो जाता है। इस भागीदारी को बढ़ाना उद्योग और अभ्यर्थियों दोनों के लिए लाभकारी होगा।

इस अवसर पर कंपनी के कार्यकारी अधिकारी (मानव संसाधन) सलिल लाल ने कहा कि ऑटोमोबाइल विनिर्माण क्षेत्र में उत्पादन स्तर पर लैंगिक विविधता एक चुनौती रही है, लेकिन सही भर्ती नीति, बेहतर अवसंरचना, प्रशिक्षण और सकारात्मक कार्य संस्कृति के माध्यम से इसे दूर किया जा सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीकी शिक्षा और आईटीआई स्तर पर महिलाओं की बढ़ती भागीदारी न केवल उद्योग की जरूरतों को पूरा करेगी, बल्कि देश के औद्योगिक विकास में भी एक नया आयाम जोड़ेगी। आने वाले समय में ऑटोमोबाइल क्षेत्र में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो सकती है।

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Author: Bharat Sarathi

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