नए श्रम कानूनों को अधिकारों पर हमला बताते हुए यूनियनों ने गुरुग्राम में विरोध प्रदर्शन की तैयारी तेज की
गुरुग्राम, 31 मार्च 2026 – केंद्र में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा 1 अप्रैल से लागू किए जा रहे चार नए लेबर कोड्स के विरोध में श्रमिक संगठनों में गहरा रोष व्याप्त है। मजदूर संगठनों का आरोप है कि ये नए कानून श्रमिकों और कर्मचारियों के अधिकारों को कमजोर करते हैं तथा यूनियन बनाने, हड़ताल करने और अपने हक की लड़ाई लड़ने की प्रक्रियाओं को अत्यंत जटिल बना देते हैं।
ट्रेड यूनियनों का कहना है कि इन लेबर कोड्स के लागू होने से न्यूनतम वेतन, सामाजिक सुरक्षा और स्थायी रोजगार (पक्की नौकरी) जैसी मूलभूत अवधारणाएं प्रभावित होंगी। साथ ही, काम के घंटों को लेकर भी श्रमिक हितों की अनदेखी किए जाने का आरोप है, जिससे नियोक्ताओं को अपनी सुविधा के अनुसार 10 से 14 घंटे तक काम कराने की छूट मिल सकती है।
मजदूर नेताओं ने आरोप लगाया कि यह सब “व्यापार की सुगमता” (Ease of Doing Business) के नाम पर किया जा रहा है, जिससे पूंजीपतियों को लाभ पहुंचे और श्रमिकों के शोषण का रास्ता आसान हो सके। उनका यह भी कहना है कि सरकार कानूनों के माध्यम से विरोध की आवाज़ों को दबाने का प्रयास कर रही है।
इन नीतियों के विरोध में केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के संयुक्त मंच द्वारा 1 अप्रैल को “काला दिवस” मनाने का आह्वान किया गया है। इसी क्रम में ऑल इंडिया यूनाइटेड ट्रेड यूनियन सेंटर भी ट्रेड यूनियन सेंटर (TUC) गुरुग्राम के बैनर तले विभिन्न ट्रेड यूनियनों और कारखाना यूनियनों के साथ 1 अप्रैल को दोपहर 12 बजे लघु सचिवालय, गुरुग्राम पर एकत्र होकर विरोध प्रदर्शन करेगी।
ट्रेड यूनियन नेताओं ने सभी मजदूरों, कर्मचारियों और लोकतांत्रिक विचारधारा से जुड़े नागरिकों से अपील की है कि वे बड़ी संख्या में इस विरोध कार्यक्रम में शामिल होकर अपने अधिकारों की रक्षा के लिए आवाज़ बुलंद करें।







