— जनता पर सेवाओं का बोझ बढ़ने के संकेत : माईकल सैनी

गुरुग्राम, 20 मार्च एमसीजी के वर्ष 2026-27 के बजट दस्तावेजों से साफ संकेत मिल रहे हैं कि नगर निगम की वित्तीय स्थिति संतुलित नहीं है तथा आय और व्यय के आंकड़ों का विश्लेषण बताता है कि जहां एक ओर निगम की आमदनी सीमित व असंतुलित है, वहीं दूसरी ओर खर्च लगातार बढ़ता जा रहा है। इसका सीधा असर शहर की बुनियादी सेवाओं और आम जनता पर पड़ सकता है।
आय से अधिक खर्च, बढ़ता वित्तीय दबाव
बजट के अनुसार नगर निगम की कुल अनुमानित आय लगभग 1,24,010 करोड़ है, जबकि कुल व्यय 1,50,110 करोड़ रुपए तक पहुंच गया है।
यानी निगम का खर्च आय से काफी अधिक है, जो भविष्य में वित्तीय दबाव और संसाधनों की कमी का संकेत देता है।
टैक्स और संपत्ति बिक्री पर निर्भरता
आय के आंकड़ों से स्पष्ट है कि निगम की सबसे बड़ी ताकत अभी भी प्रॉपर्टी टैक्स है, जिससे 33 हजार करोड़ रुपए से अधिक की वसूली हुई। इसके अलावा स्टाम्प ड्यूटी, विज्ञापन शुल्क और सरकारी अनुदान भी आय के प्रमुख स्रोत हैं।
लेकिन चिंताजनक बात यह है कि कई नियमित आय स्रोत जैसे पार्किंग फीस, ट्रेड लाइसेंस, फायर टैक्स और एंटरटेनमेंट ड्यूटी—या तो पूरी तरह निष्क्रिय हैं या बेहद कम वसूली दे रहे हैं।
इससे साफ होता है कि राजस्व संग्रहण की व्यवस्था अभी मजबूत नहीं है।
सफाई और मेंटेनेंस पर भारी खर्च
नगर निगम के खर्च में सबसे बड़ा हिस्सा सफाई और ठोस कचरा प्रबंधन पर जा रहा है, जिस पर लगभग 29 हजार करोड़ रुपए खर्च किए गए हैं।
इसके अलावा ऑपरेशन और मेंटेनेंस पर 34 हजार करोड़ रुपए से अधिक खर्च हुआ, जो बजट से काफी ज्यादा है।
प्रशासनिक खर्च भी बढ़ा
वेतन, भत्ते और प्रशासनिक खर्च पर भी लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई है। स्थापना और प्रशासनिक खर्च मिलाकर बड़ी राशि खर्च की जा रही है, जो बजट पर अतिरिक्त दबाव बना रही है।
विकास कार्यों की गति सीमित
सड़क निर्माण, सीवरेज और जल व्यवस्था जैसे विकास कार्यों पर खर्च तो हुआ है, लेकिन कई परियोजनाओं में अपेक्षित गति नहीं दिखती। कुछ मदों में खर्च शून्य या बेहद कम रहा है, जिससे विकास कार्यों की प्रभावशीलता पर सवाल उठते हैं।
सबसे ज्यादा बढ़ोतरी ‘अन्य खर्च’ में
‘अन्य खर्च’ की श्रेणी में 200 प्रतिशत से अधिक वृद्धि दर्ज की गई है, जो वित्तीय अनुशासन के लिहाज से चिंता का विषय है।
जो यह बताता है कि अनियोजित या अप्रत्याशित खर्च तेजी से बढ़ रहे हैं।
जनता के लिए क्या संकेत?
यह बजट सीधे तौर पर संकेत देता है कि नगर निगम को अपनी आय को बढ़ाने के लिए अन्य नए स्रोत तलाशने ही होंगे अर्थात मौजूदा सिस्टम को मजबूत करना बेहद जरूरी है यदि खर्च पर शीघ्र नियंत्रण नहीं किया गया तो भविष्य में सेवाओं की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है यानि अंततः इसका बोझ आम नागरिकों पर ही पड़ेगी,
निष्कर्ष
सामाजिक कार्यकर्ता माईकल सैनी मानते हैं कि एमसीजी का यह बजट स्पष्ट करता है कि निगम के सामने सबसे बड़ी चुनौती आय बढ़ाने और खर्च नियंत्रित करने की है।








