— सीएक्यूएम लक्ष्यों, मॉनसून तैयारी और गुणवत्ता सुधार पर विशेष जोर

गुरुग्राम, 20 मार्च। नगर निगम गुरुग्राम के आयुक्त प्रदीप दहिया की अध्यक्षता में निगम कार्यालय में रोड डेवलपमेंट सेल (आरडीसी) की दूसरी समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में शहर में चल रहे सड़क विकास कार्यों की विस्तृत समीक्षा करते हुए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) के लक्ष्यों, धूल नियंत्रण, जलभराव वाले क्षेत्रों में सुधार और मॉनसून तैयारी पर विशेष फोकस किया गया।
245 किमी सड़कों पर कार्य, 108 परियोजनाएं प्रगति पर
बैठक में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार शहर में कुल 108 सड़क परियोजनाएं प्रगति पर हैं, जिनके तहत लगभग 245.4 किलोमीटर लंबाई पर कार्य जारी है। इनमें 60.87 किलोमीटर लंबाई की 33 मॉडल रोड, 171.22 किलोमीटर की 75 अन्य सड़कें तथा 61.71 किलोमीटर लंबाई की 33 सीएक्यूएम आधारित सड़कें शामिल हैं। ये सभी परियोजनाएं शहर के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
धूल नियंत्रण के लिए ग्रीनिंग और पक्कीकरण पर फोकस

सीएक्यूएम के निर्देशों के तहत नगर निगम द्वारा 68.75 किलोमीटर कच्चे रास्तों को पक्का करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। साथ ही 2.50 किलोमीटर सेंट्रल वर्ज को हरित बनाने और 1 किलोमीटर मार्गों पर ग्रीनिंग कार्य किया जाएगा। जीआईएस तकनीक की सहायता से लगभग 11.1 किलोमीटर सेंट्रल वर्ज की पहचान की गई है, जहां हरियाली विकसित कर धूल प्रदूषण को कम किया जाएगा।
मॉनसून से पहले जलभराव वाले क्षेत्रों पर विशेष तैयारी
बैठक में 37 जलभराव प्रभावित परियोजनाओं की समीक्षा की गई। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि मॉनसून से पहले सभी संवेदनशील क्षेत्रों में ड्रेनेज सिस्टम को दुरुस्त किया जाए। साथ ही सड़कों की ऊंचाई और ढलान को वैज्ञानिक तरीके से सुधारकर स्थायी जल निकासी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि बारिश के दौरान जलभराव की समस्या न हो।
124 किमी मॉडल रोड परियोजनाओं का लक्ष्य
मुख्यमंत्री घोषणाओं के तहत 124.429 किलोमीटर मॉडल रोड विकसित किए जाएंगे। वर्तमान में लगभग 70 प्रतिशत परियोजनाएं प्रारंभिक चरण में हैं, जबकि 20.6 किलोमीटर पर कार्य शुरू हो चुका है। इन सड़कों पर एलईडी लाइटिंग, अंडरग्राउंड यूटिलिटी, फुटपाथ, रैम्प, सुरक्षित क्रॉसिंग, स्टॉर्म वाटर ड्रेनेज और हरियाली जैसी आधुनिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी।
शिकायत निवारण में सुधार
‘म्हारी सड़क’ पोर्टल के आंकड़ों के अनुसार कुल शिकायतों में कमी आई है और लंबित शिकायतें 68 प्रतिशत से घटकर 57 प्रतिशत रह गई हैं। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि शिकायतों का प्राथमिकता के आधार पर त्वरित समाधान सुनिश्चित किया जाए।
गुणवत्ता और समयबद्धता पर फोकस
बैठक में निगमायुक्त प्रदीप दहिया ने स्पष्ट निर्देश दिए कि सभी परियोजनाओं की नियमित मॉनिटरिंग की जाए और गुणवत्ता नियंत्रण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। साइट निरीक्षण अनिवार्य किए जाएं तथा जीआईएस आधारित योजना और मानक संचालन प्रक्रिया तैयार की जाए। उन्होंने कहा कि ठेकेदारों के प्रदर्शन की सख्ती से समीक्षा की जाएगी और लापरवाही पर कड़ी कार्रवाई करें। उन्होंने यह भी कहा कि बेहतर सड़क अवसंरचना, प्रदूषण नियंत्रण और नागरिक सुविधाओं को सुदृढ़ बनाने के लिए सभी परियोजनाओं को तय समय सीमा में पूरा करना निगम की सर्वोच्च प्राथमिकता है।








