हाईकोर्ट की टिप्पणी के बाद एचपीएससी पर फिर उठे सवाल, हरियाणा के युवाओं के साथ भेदभाव का आरोप

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भाजपा शासन में एचपीएससी को “रिजेक्शन आयोग” बनाने का आरोप : वेदप्रकाश विद्रोही

बाहरी अभ्यर्थियों को प्राथमिकता देने और भर्ती नियमों के उल्लंघन का दावा

रेवाडी, 13 मई। स्वयंसेवी संस्था ग्रामीण भारत के अध्यक्ष वेदप्रकाश विद्रोही ने आरोप लगाया कि पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट द्वारा हरियाणा पब्लिक सर्विस कमिशन की सहायक प्रोफेसर अंग्रेजी भर्ती रद्द किए जाने और की गई टिप्पणियों के बाद यह फिर साबित हो गया है कि भाजपा शासन में हरियाणा पब्लिक सर्विस कमिशन प्रदेश के युवाओं को नौकरी देने के बजाय उन्हें अपमानित और रिजेक्ट करने वाला आयोग बन गया है।

विद्रोही ने कहा कि अंग्रेजी विषय में सहायक प्रोफेसर के 613 पदों की भर्ती प्रक्रिया में अधिकांश युवाओं को अयोग्य घोषित करते हुए केवल 151 अभ्यर्थियों का चयन किया गया, जिनमें अधिकतर हरियाणा से बाहर के बताए जा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि आयोग की लगभग सभी भर्तियों में हरियाणा के युवाओं को बड़े पैमाने पर रिजेक्ट किया जा रहा है और बाहरी अभ्यर्थियों को प्राथमिकता दी जा रही है।

उन्होंने कहा कि आयोग के चेयरमैन आलोक वर्मा द्वारा सार्वजनिक रूप से हरियाणा के युवाओं की प्रतिभा और प्रदेश के शिक्षण संस्थानों पर सवाल उठाए जा चुके हैं। विद्रोही के अनुसार, यही कारण है कि आयोग विज्ञापित पदों की तुलना में बहुत कम नियुक्तियां कर रहा है और उनमें भी हरियाणा के युवाओं की हिस्सेदारी 10 से 15 प्रतिशत तक सीमित रखी जा रही है।

विद्रोही ने कहा कि यह स्थिति तब है जब हरियाणा के युवा देश की सर्वोच्च प्रतियोगी परीक्षाओं में अपनी प्रतिभा साबित कर रहे हैं और  यूपीएससी की परीक्षाओं में अन्य राज्यों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं। इसके बावजूद एचपीएससी उन्हें अयोग्य बताकर बाहर कर रहा है।

उन्होंने दावा किया कि पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने अपने आदेश में भी यह रेखांकित किया है कि आयोग भर्ती प्रक्रिया में यूजीसी के दिशा-निर्देशों और भर्ती नियमों का उल्लंघन करते हुए बाहरी अभ्यर्थियों को प्राथमिकता दे रहा है।

विद्रोही ने विभिन्न भर्तियों का उदाहरण देते हुए कहा कि सहायक प्रोफेसर हिन्दी के 132 पदों में केवल 56 नियुक्तियां की गईं, जिनमें हरियाणा के 15 जबकि 41 बाहरी अभ्यर्थी थे। मनोविज्ञान विषय में 85 पदों के मुकाबले केवल 31 चयन हुए, जिनमें हरियाणा के मात्र 4 अभ्यर्थी शामिल थे। इसी प्रकार सहायक अभियंता भर्ती में 214 में से 165, सिविल जज भर्ती में 110 में से 60 तथा एसडीओ बिजली भर्ती में 80 पदों में हरियाणा के केवल 2 अभ्यर्थियों के चयन का आरोप लगाया गया।

उन्होंने आरोप लगाया कि एचपीएससी में “पर्ची-खर्ची” और भ्रष्टाचार के माध्यम से बाहरी लोगों को सरकारी नौकरियां दी जा रही हैं। विद्रोही ने मांग की कि भ्रष्ट और हरियाणा विरोधी कार्यशैली के आरोपों को देखते हुए एचपीएससी को तत्काल भंग किया जाए।

उन्होंने यह भी मांग की कि पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के किसी सिटिंग जज की अध्यक्षता में जांच आयोग गठित कर भाजपा शासनकाल में हुई सभी एचपीएससी भर्तियों की जांच कराई जाए और श्वेत पत्र जारी कर यह बताया जाए कि प्रदेश और बाहरी राज्यों के कितने युवाओं को नौकरियां दी गईं। साथ ही भर्ती प्रक्रियाओं में कथित भ्रष्टाचार और साजिश में शामिल लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए।

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Author: Bharat Sarathi

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