अहीरवाल में रसोई गैस के लिए लंबी कतारें, सरकार सच बताए : वेदप्रकाश विद्रोही

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रेवाड़ी, 13 मार्च 2026। स्वयंसेवी संस्था ग्रामीण भारत के अध्यक्ष वेदप्रकाश विद्रोही ने भाजपा सरकार और प्रशासन पर तीखा सवाल उठाते हुए कहा कि यदि देश और प्रदेश में कहीं भी रसोई गैस की कमी नहीं है, तो अहीरवाल क्षेत्र के रेवाड़ी, महेंद्रगढ़ और गुरुग्राम जिलों में उपभोक्ताओं को इस भीषण गर्मी में गैस एजेंसियों के बाहर लंबी-लंबी कतारों में क्यों खड़ा होना पड़ रहा है। उन्होंने व्यंग्यात्मक अंदाज़ में कहा कि क्या ये कतारें अहीरवाल में नहीं बल्कि चाँद पर लगी हैं, जिन्हें सरकार और अधिकारी देख नहीं पा रहे?

विद्रोही ने कहा कि हजारों परिवारों की रोज़मर्रा की रसोई इस समय संकट में है। महिलाएँ और बुजुर्ग घंटों तक गैस एजेंसियों के बाहर खड़े होकर अपनी बारी का इंतज़ार कर रहे हैं, फिर भी उन्हें सिलेंडर मिलने की कोई गारंटी नहीं है। कई घरों में चूल्हे ठंडे पड़े हैं और लोगों को मजबूरी में महंगे दामों पर गैस खरीदनी पड़ रही है। यह स्थिति आम परिवारों के लिए बेहद पीड़ादायक और चिंताजनक है।

उन्होंने सवाल उठाया कि यदि गैस की कोई कमी नहीं है तो फोन पर गैस बुकिंग क्यों नहीं हो पा रही? एजेंसियों की ओर से यह कहकर उपभोक्ताओं को टाल दिया जाता है कि बुकिंग सर्वर डाउन है। उन्होंने पूछा कि जब हाल ही में रसोई गैस सिलेंडर के दाम लगभग 60 रुपये बढ़ाए गए हैं, तो उसके बाद भी बुकिंग व्यवस्था क्यों चरमरा गई?

विद्रोही ने यह भी पूछा कि यदि गैस पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है तो बुकिंग की अवधि 21 से 25 दिन क्यों कर दी गई है? कमर्शियल गैस सिलेंडरों की आपूर्ति क्यों प्रभावित हो रही है, जिसके कारण ढाबे और छोटे होटल तक बंद होने की नौबत आ रही है? इससे स्पष्ट होता है कि जमीनी स्तर पर स्थिति सामान्य नहीं है।

उन्होंने आरोप लगाया कि कटु सत्य यह है कि गैस की कमी है, लेकिन भाजपा सरकार लोगों को सच बताने की बजाय सूत्रों के माध्यम से मीडिया में भ्रामक खबरें प्लांट करवा रही है। उनके अनुसार सरकार संसद से लेकर सड़क तक गैस उपलब्धता को लेकर लगातार दावे कर रही है, जबकि आम लोगों का अनुभव इससे बिल्कुल उलट है।

विद्रोही ने कहा कि अहीरवाल क्षेत्र में कई जगह रसोई गैस सिलेंडर 2 हजार रुपये तक ब्लैक में बिक रहा है। जब आधिकारिक कीमत करीब 919 रुपये है, तो जरूरतमंद लोगों को 1500 से 2000 रुपये तक खर्च करके गैस खरीदने के लिए क्यों मजबूर होना पड़ रहा है? यह स्थिति आम उपभोक्ताओं की मजबूरी और प्रशासनिक विफलता को दर्शाती है।

उन्होंने भावुक लहजे में कहा कि देश के लोकतांत्रिक इतिहास में शायद पहली बार ऐसा दौर आया है जब सरकार सच्चाई स्वीकार करने की बजाय लगातार इनकार और भ्रम की राजनीति कर रही है। दुर्भाग्य यह भी है कि “सूत्रों” के नाम पर मीडिया में खबरें प्लांट करवाकर सरकार ने मीडिया की विश्वसनीयता को भी नुकसान पहुँचाया है।

विद्रोही ने अंत में मांग की कि सरकार तुरंत अहीरवाल क्षेत्र में गैस आपूर्ति की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करे, बुकिंग व्यवस्था को सुचारू बनाए और कालाबाज़ारी पर सख्त कार्रवाई करे, ताकि आम लोगों की रसोई दोबारा सामान्य हो सके और उन्हें रोज़मर्रा की इस मूलभूत जरूरत के लिए अपमानजनक परिस्थितियों का सामना न करना पड़े।

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Author: Bharat Sarathi

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