मौसम के बदलाव से अहीरवाल में समय से पहले कट गई फसल, 28 मार्च तक इंतजार से किसानों को होगा नुकसान
रेवाडी, 12 मार्च। स्वयंसेवी संस्था ग्रामीण भारत के अध्यक्ष वेदप्रकाश विद्रोही ने भाजपा सरकार से मांग की है कि मौसम में अचानक बदलाव और बढ़ते तापमान को देखते हुए सरसों की न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर सरकारी खरीद तुरंत शुरू की जाए। उन्होंने कहा कि मार्च के पहले पखवाड़े में ही तापमान 35 से 38 डिग्री के बीच पहुंच गया, जिसके कारण अहीरवाल क्षेत्र में सरसों की फसल समय से पहले कट गई है और गेहूं की कटाई भी शुरू हो चुकी है। ऐसे में मंडियों में सरसों की आवक शुरू हो गई है।
विद्रोही ने कहा कि सरकार द्वारा सरसों की खरीद 28 मार्च से शुरू करने का निर्णय किसानों के हित में नहीं है। यदि खरीद में देरी हुई तो किसानों को मजबूरी में अपनी उपज औने-पौने दामों पर बेचनी पड़ेगी। इसलिए सरकार को तत्काल प्रभाव से सरसों की एमएसपी पर खरीद शुरू करनी चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि हरियाणा सरकार पिछले दो वर्षों से यह दावा कर रही है कि रबी और खरीफ की सभी 24 फसलों की खरीद एमएसपी पर की जा रही है, जबकि यह दावा वास्तविकता से कोसों दूर है। विद्रोही के अनुसार 24 फसलों की एमएसपी पर खरीद का दावा केवल एक “जुमला” बनकर रह गया है।
विद्रोही ने कहा कि वास्तविकता यह है कि राज्य में केवल 3-4 फसलों की ही सीमित मात्रा में एमएसपी पर खरीद होती है। इनमें भी गेहूं और धान की खरीद ही पर्याप्त मात्रा में की जाती है, क्योंकि सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) को चलाने के लिए सरकारी भंडारों में गेहूं और चावल भरना सरकार की मजबूरी है।
उन्होंने कहा कि गेहूं और धान के अलावा अन्य फसलों की खरीद अक्सर नाममात्र की भावांतर योजना के तहत की जाती है, जबकि सरकार इसे एमएसपी पर खरीद का नाम देकर किसानों और जनता को गुमराह करती है। इसके चलते किसानों की अधिकांश फसल औने-पौने दामों में बिक जाती है।
विद्रोही ने सवाल उठाया कि यदि सरकार वास्तव में किसानों की फसलों को एमएसपी पर खरीदने के लिए प्रतिबद्ध है तो फिर एमएसपी की गारंटी का कानून बनाने में उसे क्या आपत्ति है? साथ ही जो फसलें सरकार खरीदती है, उनकी खरीद समय पर क्यों नहीं की जाती?
उन्होंने मांग की कि यदि सरकार 24 फसलों की एमएसपी पर खरीद के अपने दावे को लेकर गंभीर है तो सरसों की फसल को भावांतर योजना के बजाय सीधे एमएसपी पर खरीदा जाए और यह प्रक्रिया तत्काल शुरू की जाए, ताकि किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिल सके।









