• लोकसभा में दीपेन्द्र हुड्डा के सवाल के जवाब से स्पष्ट हुआ कि हर साल डिग्री लेकर निकलने वाले लाखों युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा करने में सरकार नाकाम – दीपेन्द्र हुड्डा
• केवल बातों की जलेबी तलती है केंद्र सरकार, सत्ता में आने से पहले प्रतिवर्ष 2 करोड़ रोजगार देने के वायदे का क्या हुआ – दीपेन्द्र हुड्डा
• केंद्र से लेकर राज्यों तक विभिन्न सरकारी विभागों में खाली पड़े लाखों पदों पर तुरंत पक्की भर्ती की जाए – दीपेन्द्र हुड्डा
• सरकार तुरंत पेशेवर स्नातकों के रोजगार के वास्तविक आंकड़े सार्वजनिक करे – दीपेन्द्र हुड्डा
चंडीगढ़, 9 मार्च। सांसद दीपेन्द्र हुड्डा ने लोकसभा में चालू वर्ष सहित पिछले दस वर्षों के दौरान देशभर के सभी सरकारी और निजी विश्वविद्यालयों से व्यावसायिक पाठ्यक्रम पूरा करने वाले छात्रों की संख्या और रोजगार प्राप्त करने वाले छात्रों की संख्या से जुड़े आंकड़े मांगे तो जवाब में केंद्र सरकार के शिक्षा राज्य मंत्री डॉ. सुकान्त मजूमदार ने बताया कि वर्ष 2014-15 में 8.92 लाख छात्रों ने पेशेवर पाठ्यक्रम पूरे किए थे, जो बढ़कर 2022-23 में 13.72 लाख हो गए हैं। दीपेन्द्र हुड्डा ने कहा कि हर साल लाखों युवा डिग्री लेकर निकल रहे हैं, लेकिन उनके लिए रोजगार के अवसर पैदा करने में सरकार पूरी तरह नाकाम रही है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि सरकार ने संसद में स्वीकार कर रही है कि पेशेवर स्नातकों को मिलने वाले रोजगार का अलग से कोई ठोस आंकड़ा उसके पास उपलब्ध नहीं है। बीजेपी सरकार को यह भी नहीं पता कि कितने पढ़े-लिखे युवाओं को नौकरी मिली है। जबकि, अकेले केंद्र सरकार के विभिन्न विभागों में ही लगभग 10 लाख सरकारी पद खाली पड़े हैं। भारतीय सेना में पक्की भर्ती को ‘अग्निपथ योजना’ की भेंट चढ़ाकर पहले ही खत्म किया जा चुका है। दीपेन्द्र हुड्डा ने मांग करी कि सरकार तुरंत पेशेवर स्नातकों के रोजगार के वास्तविक आंकड़े सार्वजनिक करे। केंद्र से लेकर राज्यों तक विभिन्न सरकारी विभागों में खाली पड़े पदों पर तुरंत पक्की भर्ती की जाए। रोजगार सृजन के ठोस कदम उठाए, उद्योगों में निवेश बढ़ाए और शिक्षा को रोजगार से सीधे जोड़ने की स्पष्ट नीति बनाए। अन्यथा हर साल लाखों डिग्रीधारी युवाओं की बेरोजगार फौज तैयार होती रहेगी, जिसकी पूरी जिम्मेदारी बीजेपी सरकार की होगी।
दीपेन्द्र हुड्डा ने कहा कि केंद्र सरकार केवल बातों की जलेबी तलती है, सत्ता में आने से पहले प्रतिवर्ष 2 करोड़ रोजगार देने के वायदे का क्या हुआ। रोजगार पर बीजेपी के वायदे के मुताबिक पिछले 12 साल में 24 करोड़ रोजगार मिलने चाहिए। देश में लगभग इतने ही घर हैं यानी हर घर में एक रोजगार मिलना चाहिए था। दीपेन्द्र हुड्डा ने कहा कि बीजेपी सरकार देश के नौजवानों से माफी मांगे कि उसने वोट लेने के लिए युवाओं से झूठ बोला था।
उन्होंने कहा कि सरकार ने खुद स्वीकार किया है कि पिछले कुछ वर्षों में देशभर में व्यावसायिक पाठ्यक्रमों से निकलने वाले स्नातकों की संख्या तेजी से बढ़ी है, लेकिन उनके रोजगार से जुड़े ठोस आंकड़े सरकार के पास नहीं हैं। इससे स्पष्ट है कि सरकार के पास पढे-लिखे युवाओं के भविष्य को लेकर कोई स्पष्ट कार्ययोजना नहीं है। चुनाव के समय हर साल दो करोड़ नये रोजगार देने का झूठा वादा करने वाली केंद्र की बीजेपी सरकार राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP-2020), इंटर्नशिप और कौशल विकास जैसे कार्यक्रमों का हवाला दे रही है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि इंटर्नशिप और प्रशिक्षण के नाम पर युवाओं से सस्ती मजदूरी करवाई जा रही है। सरकार पक्के पदों को लगातार खत्म कर रही है या उन्हें खाली छोड़ रही है। उन्होंने कहा कि देश भर में युवा भारी भरकम फीस देकर इंजीनियरिंग, मेडिकल और अन्य पेशेवर डिग्रियां हासिल करते हैं, लेकिन डिग्री मिलने के बाद रोजगार की गारंटी नहीं मिलती। यह स्थिति न केवल युवाओं में हताशा और निराशा पैदा कर रही है बल्कि उन्हें विदेशों की ओर पलायन के लिए मजबूर कर रही है।







