गुरुग्राम। सेक्टर-31 स्थित रायन इंटरनेशनल स्कूल में विद्यार्थियों के भीतर प्रकृति, पौधों और पक्षियों के प्रति प्रेम एवं जिम्मेदारी की भावना विकसित करने के उद्देश्य से नवकल्प फाउंडेशन द्वारा एक विशेष प्रकृति जागरुकता सत्र का भव्य आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम के माध्यम से फाउंडेशन के दाना-पानी व नेस्ट अभियान की शुरुआत की गई, जिसमें बच्चों को बेजुबान पक्षियों के लिए सुरक्षित वातावरण तैयार करने का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया।
सत्र का मुख्य आकर्षण नवकल्प फाउंडेशन की ओर से आईं पर्यावरण कार्यकर्ता मीनाक्षी सक्सेना का संबोधन रहा। उन्होंने विद्यार्थियों को बताया कि बढ़ते शहरीकरण के कारण पक्षियों के प्राकृतिक आवास नष्ट हो रहे हैं। ऐसे में हमारी छोटी सी पहल, जैसे बालकनी या छत पर पक्षियों के लिए दाना और पानी रखना, उनके जीवन को बचाने में संजीवनी का काम करती है। उन्होंने बदलते मौसम के दौरान पक्षियों को होने वाली पानी की किल्लत और उचित आश्रय की आवश्यकता पर भी प्रकाश डाला।
विद्यार्थियों ने उत्साह से तैयार किए नेस्ट
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों में अद्भुत उत्साह देखने को मिला। छात्र स्वर्णा, समर्थ, अंगया, अधिवक और हिमांशी ने इस अभियान में बढ़-चढक़र हिस्सा लिया। इन विद्यार्थियों ने न केवल पक्षियों के लिए सुरक्षित घोंसले (नेस्ट) तैयार करने की तकनीक सीखी, बल्कि उन्हें स्कूल परिसर के विभिन्न उपयुक्त स्थानों पर लगाया भी। साथ ही, बच्चों ने पक्षियों के लिए दाना-पानी के पात्र रखे और नियमित रूप से उनकी देखभाल करने का संकल्प लिया।
रायन स्कूल की समृद्ध परंपरा का निर्वहन करते हुए विद्यालय की प्रधानाचार्या डॉ. मोनिका मेहता ने मुख्य अतिथि मीनाक्षी सक्सेना को पौधा भेंट कर सम्मानित किया। डॉ. मेहता ने इस अवसर पर कहा कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य बच्चों को केवल साक्षर बनाना नहीं, बल्कि उन्हें संवेदनशील नागरिक बनाना भी है। उन्होंने बच्चों के इस उत्साह की सराहना करते हुए कहा कि प्रकृति के प्रति यह सम्मान और प्रतिबद्धता ही भविष्य में पर्यावरण संतुलन का आधार बनेगी। नवकल्प के फाउंडर अनिल आर्य ने इस अभियान में सहयोग के लिए पिरामिड के चेयरमैन व समाजसेवी दिनेश शर्मा का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके माध्यम से नवकल्प ने पर्यावरण के लिए अपनी एक्टिविटीज को और विस्तार दिया है।
कार्यक्रम के समापन पर नवकल्प फाउंडेशन की ओर से संदेश दिया गया कि पर्यावरण संरक्षण केवल भाषणों तक सीमित न रहकर धरातल पर दिखना चाहिए। यदि हर विद्यार्थी अपने घर और आसपास कम से कम एक घोंसला लगाए और दाना-पानी का प्रबंध करे, तो हम फिर से चहचहाते आंगन वापस पा सकते हैं। यह ज्ञानवर्धक सत्र विद्यार्थियों के लिए बेहद प्रेरणादायक रहा, जिसने उन्हें प्रकृति का सच्चा प्रहरी बनने की राह दिखाई।







