फूलों की वर्षा और खुशियों की फुहार के बीच वानप्रस्थ में हर्षोल्लास से मना होली मिलन समारोह

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भजन, फाग, नृत्य और ‘होली धमाल’ ने बांधा समां, 80 वर्ष बाद एक साथ मना जन्मदिन और होली का विशेष संयोग

हिसार। वानप्रस्थ सीनियर सिटीजन क्लब में होली मिलन समारोह हर्षोल्लास, उमंग और आत्मीयता के साथ मनाया गया। कार्यक्रम की शुरुआत क्लब की उपसचिव श्रीमती सुनीता बहल द्वारा द्वार पर सभी सदस्यों को तिलक लगाकर एवं पुष्पों से स्वागत करने के साथ हुई, जिससे वातावरण प्रारंभ से ही उत्सवमय हो उठा।

मंच संचालन करते हुए श्रीमती इंदू माहेश्वरी ने ब्रज की होली का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने कहा कि ब्रज की होली केवल रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि प्रेम, भक्ति और आनंद का अद्भुत संगम है। वृंदावन, बरसाना और नंदगाँव की होली विश्वभर में प्रसिद्ध है। लठमार होली, फूलों की होली और रंगोत्सव की परंपराओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भक्तजन राधा-कृष्ण की भक्ति में डूबकर फाग गाते हैं, मानो स्वयं राधा और कृष्ण ब्रज की गलियों में रंग बरसा रहे हों। कविता और दोहों के माध्यम से उन्होंने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।

क्लब के महासचिव डॉ. डांग, जो तीन माह के विदेश प्रवास के बाद अपने प्रिय शहर हिसार लौटे हैं, ने कहा कि वानप्रस्थ परिवार के बीच लौटकर उन्हें अत्यंत प्रसन्नता हो रही है। उन्होंने कहा कि होली प्रेम, सौहार्द और एकता का प्रतीक है और इसे हँसी, गीत-संगीत तथा सद्भाव के रंगों से और भी सुंदर बनाया जाना चाहिए।

कार्यक्रम का शुभारंभ श्रीमती विजय लक्ष्मी ने भजन “रंग मत डाल रे साँवरिया…” की मधुर प्रस्तुति से किया। इसके बाद डॉ. आर. के. सैनी ने “पिया संग खेलो होरी फागुन आयो रे” और “झूमती बहार लिए…” जैसे गीतों से फागुन की उमंग को सजीव किया।

डॉ. आर. एस. हूडा ने “आज होलिका के अवसर पर…” प्रस्तुत कर पारंपरिक रंगों की छटा बिखेरी, जबकि डॉ. दवीना अमर ठकराल ने होली गीत सुनाकर सभी का मन मोह लिया।

श्री एस. पी. चौधरी ने “होली रंगों का त्योहार…” के माध्यम से देशभक्ति का संदेश दिया।

डॉ. एस. एस. धवन ने लोकप्रिय गीत रंग बरसे भीगे चुनरवाली प्रस्तुत कर सभी को झूमने पर मजबूर कर दिया। डॉ. दीप पुनिया ने हरियाणवी अंदाज़ में “किस तरियाँ का रंग चाहिये तन्नै…” गाकर कार्यक्रम में स्थानीय रंग घोल दिया।

कार्यक्रम का विशेष आकर्षण “होली धमाल” रहा, जिसका निर्देशन श्रीमती राज रानी मल्हान ने किया। डॉ. सुदेश गांधी, डॉ. इंदु गहलावत, डॉ. सैनी, डॉ. आर. एस. हूडा कृष्णा हूडा एवं श्रीमती वीना अग्रवाल ने सहभागिता निभाई। “अरे जा रे हट नटखट”, आज न छोड़ेंगे हमजोली, “रंग लेके खेलते गुलाल”, होरी खेले रघुवीरा, “होलिया में उड़े रे गुलाल” और होली के दिन दिल खिल जाते हैं जैसे गीतों पर युगल जोड़ों ने मंच पर नृत्य कर समां बांध दिया।

इस अवसर पर डॉ. सुशील माहेश्वरी का जन्मदिन भी मनाया गया। विशेष बात यह रही कि 80 वर्षों बाद उनका जन्मदिन और होली एक साथ आए। क्लब की ओर से उन्हें शुभकामनाओं सहित एक पौधा भेंट किया गया।

सदस्यों ने एक-दूसरे पर पुष्प वर्षा कर फूलों की होली खेली, जिससे वातावरण स्नेह और अपनत्व से सराबोर हो गया। अंत में श्रीमती इंदू माहेश्वरी द्वारा आयोजित जलपान का सभी ने आनंद लिया।

संगीत, नृत्य और आपसी प्रेम के रंगों से सजा वानप्रस्थ का यह होली मिलन समारोह सभी के हृदय में मधुर स्मृतियाँ संजो गया।

Bharat Sarathi
Author: Bharat Sarathi

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