हरियाणा को ‘अनपढ़’ बनाने का षड्यंत्र: रणदीप सिंह सुरजेवाला का भाजपा सरकार पर तीखा हमला

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सरकारी स्कूलों में गिरता नामांकन, हजारों पद खाली, शिक्षा बजट में कटौती—युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ का आरोप

चंडीगढ़, 26 अप्रैल 2026 – भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के सांसद व महासचिव रणदीप सिंह सुरजेवाला ने हरियाणा की नायब सिंह सैनी सरकार पर शिक्षा व्यवस्था को कमजोर करने का गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार सुनियोजित तरीके से हरियाणा को “अनपढ़” बनाने की दिशा में काम कर रही है, जिससे युवाओं का भविष्य अंधकारमय हो रहा है।

रणदीप सिंह सुरजेवाला  के आरोप

1.   सरकारी स्कूलों से 3.90 लाख छात्रों का ‘महा-पलायन’: दाखिलों में 18% गिरावट 

शिक्षा विभाग के ताजा आंकड़ों के अनुसार, मात्र एक साल में सरकारी स्कूलों का नामांकन 21.53 लाख से गिरकर 17.60 लाख रह गया है। स्थिति इतनी भयावह है कि 1,300 विद्यालयों की ‘बालवाटिका’ में एक भी बच्चे का दाखिला नहीं हुआ। शिक्षकों को पढ़ाने के बजाय ‘पोर्टल’ और गैर-शैक्षणिक कार्यों में उलझाना,सरकारी शिक्षा तंत्र को बर्बाद कर छात्रों को मजबूरी में प्राइवेट स्कूलों की तरफ धकेलने की ही सुनियोजित साजिश है।

2.   निजीकरण का एजेंडाः हरियाणा में स्कूलों पर ताला और शिक्षा माफिया का उदय सरकार निजी संस्थानों को फायदा पहुंचाने के लिए हरियाणा के सरकारी स्कूलों का सामूहिक सफाया कर रही है।

·        सामूहिक तालाबंदीः राज्यसभा के रिकॉर्ड के अनुसार, हरियाणा सरकार ने केवल 2022 में ही 292 सरकारी स्कूलों को बंद / मर्ज कर दिया।

·        नेट घाटाः लोकसभा में प्रस्तुत 10-वर्षीय यू-डायस (UDISE) डेटा हरियाणा में 256 सरकारी स्कूलों के ‘शुद्ध घाटे’ की पुष्टि करता है (2014-15 में 14,630 स्कूलों से गिरकर 2023-24 में 14,374 रह गए)।

·        प्राइवेट स्कूलों की बाढ़ः जब हरियाणा के सरकारी स्कूलों पर ताले जड़े जा रहे थे, तब इसी दशक में राज्य में ठीक 2,000 नए प्राइवेट स्कूल खुल गए।

·        ‘रैशनलाइजेशन’ की आड़ में स्कूलों को जबरन मर्ज करना शिक्षा के अधिकार (RTE) का खुला उल्लंघन है। 1 किलोमीटर के दायरे में प्राथमिक स्कूल के अनिवार्य नियम को कुचलकर, बच्चों और विशेषकर बेटियों को मीलों दूर सफर करने पर मजबूर किया जा रहा है।

3.   लकवाग्रस्त स्कूली ढांचाः हरियाणा में 20,000 से अधिक पद खाली

हरियाणा विधानसभा में रखे गए आधिकारिक रिकॉर्ड बताते हैं कि सरकार जानबूझकर शिक्षकों की भर्ती नहीं कर रही है:

·        विषय विशेषज्ञों का अकालः हरियाणा के स्कूलों में 8,519 PGT, 4,583 TGT, और 2,557 PRT के पद खाली पड़े हैं।

·        नेतृत्वविहीन स्कूलः हरियाणा के 574 प्राचार्यों (Principals) और 759 मुख्यध्यापकों (Headmasters) के पद खाली हैं।

·        प्रशासनिक पतनः हरियाणा के स्कूलों में क्लर्क के 686 और चतुर्थ श्रेणी के 4,134 पद रिक्त हैं।

4.   वित्तीय नाकेबंदीः हरियाणा के ‘समग्र शिक्षा’ के ₹1,690 करोड़ रोके गए

शिक्षा मंत्रालय के आधिकारिक आंकड़े बताते हैं कि केंद्र ने ‘समग्र शिक्षा अभियान’ के तहत हरियाणा के स्कूलों की भयंकर वित्तीय नाकेबंदी की है। पिछले पांच वर्षों में हरियाणा के प्रस्तावित (Proposed) और वास्तविक (Actual) फंड में भारी कटौती की गई है:

·        2020-21: 111.85 करोड़ की कमी

·        2021-22: ₹308.30 करोड़ की कमी

·        2022-23: ₹293.29 करोड़ की कमी

·        2023-24: ₹436.23 करोड़ की कमी

·        2024-25: ₹539.89 करोड़ की कमी (हरियाणा के लिए प्रस्तावित ₹1,076.32 करोड़ का मुश्किल से आधा ही जारी किया गया)।

·        कुल घाटाः हरियाणा के स्कूलों का ₹1,689.56 करोड़ का फंड रोक लिया गया है, जिससे पूरा ढांचा चरमरा गया है।

5.  आरोही और कस्तूरबा (KGBV) स्कूलों का जानबूझकर किया गया विनाश

·        36 आरोही मॉडल स्कूलः बेहतरीन शिक्षा के लिए बने इन स्कूलों के आज तक ‘स्थायी सर्विस रूल’ नहीं बने। नियामित भर्ती के बजाय इन्हें पूरी तरह ठेका प्रथा और तदर्थ (Ad-hoc) कर्मचारियों के हवाले कर दिया गया है।

·        KGBV: राज्यसभा के आंकड़ों (10.12.2025) के अनुसार, 72 स्वीकृत स्कूलों में से केवल 65 ही चल रहे हैं। SC/ST/OBC बेटियों के इन स्कूलों में स्थायी पदों की जगह ‘पार्ट-टाइम’ शिक्षकों और HKRN का शोषणकारी जाल बिछा दिया गया है। अस्थायी शिक्षकों के सहारे हाशिए की बेटियों को स्थायी भविष्य कैसे मिलेगा?

6.  चिराग योजना‘ का धोखाः हरियाणा के मध्यम वर्ग की पीठ में छुरा

हरियाणा सरकार की ताजा अधिसूचना राज्य के मध्यम और निम्न मध्यम वर्ग के साथ एक क्रूर धोखा है।

·        शिक्षा विभाग ने अचानक ‘चिराग योजना’ के तहत 8 लाख रुपये तक की वार्षिक आय वाले परिवारों के बच्चों को मुफ्त शिक्षा देने का अपना फैसला वापस ले लिया है।

·        अब हरियाणा में इस योजना का लाभ केवल ₹1.80 लाख तक की आय वाले परिवारों को ही मिलेगा।

7.  हरियाणा के विश्वविद्यालयों का दिवालियापन: ₹6,625 करोड़ का कर्ज

·        कर्ज का जाल: ‘ग्रांट-इन-एड’ नीति को ‘लोन’ प्रणाली में बदलकर, सरकार ने हरियाणा के 22 सरकारी विश्वविद्यालयों को ₹6,625.82 करोड़ के भारी-भरकम कर्ज के नीचे धकेल दिया है।

·        विश्वविद्यालयों को ‘सेल्फ-फाइनेंसिंग’ में धकेलने से सीधे तौर पर हरियाणा के छात्रों की फीस बढ़ेगी। इस वित्तीय बदहाली के कारण ही NIRF की ‘टॉप 150’ सूची में हरियाणा का एक भी राज्य विश्वविद्यालय शामिल नहीं है।

8.  हाशिए पर खड़े युवाओं का पलायनः हरियाणा में ST ड्रॉपआउट दर 17.6%

·        नवीनतम लोकसभा अनुलग्नक के स्पष्ट आंकड़ों के अनुसार, हरियाणा में समग्र माध्यमिक ड्रॉपआउट दर 6.6% है। लेकिन अनुसूचित जाति (SC) के छात्रों की ड्रॉपआउट दर 7.4% और अनुसूचित जनजाति (ST) के छात्रों के लिए यह खतरनाक रूप से 17.6% दर्ज की गई है।

9.  उच्च शिक्षा बर्बादः हरियाणा के 46% कॉलेज बिना प्रिंसिपल, 56% प्रोफेसर नदारद

RTI से मिले आंकड़े हरियाणा की उच्च शिक्षा की डरावनी सच्चाई बयां करते हैं:

·        हरियाणा के 185 सरकारी कॉलेजों में से 85 कॉलेज (लगभग 46%) बिना नियमित प्रिंसिपल के चल रहे हैं।

·        नियमित प्रोफेसरों के, 7,986 स्वीकृत पदों में से 4,618 पद (56%) खाली पड़े हैं।

मुख्यमंत्री नायब सैनी हरियाणा को अशिक्षित और अनपढ़ बनाने के भाजपाई षड्यंत्र का जवाब दें!

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Author: Bharat Sarathi

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