हरियाणा सरकार का वित्तीय अनुशासन पर विशेष जोर

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कुशल वित्तीय प्रबंधन से नियंत्रित हुआ राजकोषीय घाटा, GDP के 3% से नीचे रखने का लक्ष्य

प्रदेश में पूंजीगत व्यय में ऐतिहासिक बढ़ोतरी, विकास परियोजनाओं को मिलेगा नया बल

हरियाणा के चहुंमुखी विकास में 98% बजट खर्च होने का अनुमान, ऐतिहासिक उपलब्धि: मुख्यमंत्री

चंडीगढ़, 2 मार्च- हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने सोमवार को हरियाणा विधानसभा में वर्ष 2026-27 का राज्य बजट पेश करते हुए प्रदेश सरकार के कुशल वित्तीय प्रबंधन का परिचय देते हुए बजट में 7 प्रमुख बिदुंओं पर विशेष महत्व दिया।

श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि कोई सरकार अपने राजकोष का कितना अच्छा प्रबंधन कर रही है, इसका सबसे उत्तम मानक राजकोषीय घाटा होता है। वर्ष 2005 से लेकर वर्ष 2014 तक के 10 वित्त वर्षों की अवधि में राजकोषीय घाटा ₹286 करोड़ से बढ़कर ₹12 हजार 586 करोड़ हो गया था। अर्थात् इसमें लगभग 44 गुणा वृद्धि हुई थी। परंतु वित्त वर्ष 2014 से वर्ष 2024 की 10 वर्षों की अवधि में राजकोषीय घाटा केवल 2.75 गुणा ही बढ़ा था। राजकोषीय उत्तरदायित्व तथा बजट प्रबंधन अधिनियम, 2003 के अनुसार राज्य सरकार का राजकोषीय घाटा उस राज्य की उस वर्ष की GDP के 3% से कम होना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्ववर्ती सरकारों के समय जहां राजकोषीय घाटे में अनियंत्रित वृद्धि देखने को मिली, वहीं प्रदेश में सत्ता संभालने के बाद वर्ष 2014 से लेकर अब तक सरकार की नीतियों में वित्तीय अनुशासन को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई। वर्ष 2014-15 में राज्य का राजकोषीय घाटा GDP का 2.88% था, जिसे निरंतर नियंत्रित करते हुए वर्ष 2025-26 में 2.66% तक लाया गया है तथा वर्ष 2026-27 में इसे और घटाकर 2.65% तक सीमित रखने का प्रस्ताव है।

उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार ने पूंजीगत व्यय (Capital Expenditure) को बढ़ाने पर निरंतर बल दिया है। वर्ष 2004-05 में पूंजीगत व्यय ₹1,105 करोड़ था, जो कुल बजट का 7.1% था। वर्ष 2014-15 में यह बढ़कर ₹4,558 करोड़ हो गया, जो कुल बजट का 7.4% था। वर्ष 2024-25 के दौरान पूंजीगत व्यय ₹15 हजार 642 करोड़ रहा, जो कुल बजट का 8.9% था। वर्ष 2025-26 के संशोधित अनुमानों के अनुसार यह ₹21 हजार 207 करोड़ अनुमानित है जो कि कुल बजट का 10.5% होगा। वर्ष 2026-27 के प्रस्तावों में ₹28 हजार 205 करोड़ का पूंजीगत व्यय प्रस्तावित है, जो कि कुल बजट का 12.6% होगा।

उन्होंने कहा कि प्रभावी पूंजीगत व्यय (Effective Capital Expenditure) वर्ष 2014-15 में ₹4 हजार 636 करोड़ था, जो कुल बजट का 7.5% था। वर्ष 2025-26 में यह बढ़कर ₹27 हजार 650 करोड़ हो गया है, जो कुल बजट का 13.6% है। इन आंकड़ों से स्पष्ट होता है कि पिछले 11 वर्षों में इसमें 6.1 प्रतिशत बिंदुओं की वृद्धि हुई है। अब वर्ष 2026-27 में यह ₹35 हजार 216 करोड़ अनुमानित है, जो कुल बजट का 15.7% है।

प्रदेश के इतिहास में पहली बार होगा कि कुल बजट का 98% हिस्सा खर्च हुआ

श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि वर्ष 2014-15 में कुल बजट ₹73 हजार 301 करोड़ था, जबकि वास्तविक व्यय ₹61 हजार 903 करोड़ अर्थात् 84.45% हुआ था। वर्ष 2025-26 के लिए कुल बजट ₹2 लाख 5 हजार 17 करोड़ का रखा था। 31 मार्च, 2026 तक लगभग ₹2 लाख 2 हजार करोड़ का व्यय अनुमानित है, जो कुल बजट का लगभग 98% है। प्रदेश के इतिहास में यह पहली बार होगा कि कुल बजट का 98% हिस्सा खर्च हुआ है।

उन्होंने कहा कि वर्ष 2004-05 में राजस्व घाटा उस समय के कुल बजट व्यय का 1.66% था जो वर्ष 2014-15 में 8 गुणा बढकर 13.4% हो गया। वर्ष 2024-25 में राजस्व घाटा बजट व्यय का घटकर 11% रहा है। वर्ष 2025-26 में राजस्व घाटा वर्ष 2014-15 के मुकाबले घटकर 8.98% अनुमानित है। वर्ष 2026-27 के लिए इसे और कम करते हुए बजट व्यय के 5.90% तक सीमित रखने का लक्ष्य है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रभावी राजस्व घाटा वर्ष 2014-15 में प्रभावी राजस्व घाटा राज्य जीडीपी का 1.9% था, जो कि वर्ष 2024-25 में घटकर 1.16% रह गया है। सरकार के कुशल वित्तीय प्रबंधन से यह वर्ष 2025-26 के संशोधित अनुमानों में और कम होकर 0.86% रहने का अनुमान है। वर्ष 2026-27 के बजट अनुमानों में इसमें और कमी लाते हुए मात्र 0.41% तक लाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

श्री नायब सिंह सैनी ने बताया कि वर्ष 2014-15 में घाटे में चल रहे सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों की संख्या 22 थी, जो वर्ष 2024-25 में घटकर 18 हो गई है। वर्ष 2014-15 में घाटे में चल रहे उपक्रमों की घाटे की राशि ₹2 हजार 889 करोड़ थी, जो वर्ष 2024-25 में घटकर ₹1 हजार 12 करोड़ रह गई है। अर्थात सरकारी उपक्रमों के घाटे में लगभग तीन गुणा कमी आई है। वर्ष 2014-15 में 20 उपक्रमों को कुल ₹450 करोड़ 16 लाख का लाभ हुआ था। वर्ष 2024-25 में लाभ में चल रहे उपक्रमों की संख्या वर्ष 2014-15 के मुकाबले बढ़कर 24 हो गई है, जिनका कुल लाभ ₹1,205 करोड़ 14 लाख हो गया है अर्थात इनका कुल लाभ भी लगभग तीन गुणा हो गया है। इसके अलावा, वर्ष 2004-05 में बजट अनुमान की तुलना में संशोधित अनुमानों में 10.37% की कमी दर्ज की गई जबकि वर्ष 2024-25 में यह कमी केवल 5.04% रही। वर्ष 2025-26 में यह अब और कम होकर केवल 1.07% रह गई है।

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Author: Bharat Sarathi

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