· विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने माना कि रूस में नौकरी दिलाने के नाम पर भारतीय नागरिकों को गुमराह किया गया
· सांसद दीपेन्द्र हुड्डा ने विगत 5 फरवरी को लोकसभा में नियम 377 के तहत रूस के युद्ध क्षेत्र में फंसे भारतीय युवाओं, खासकर छात्रों की सुरक्षित वतन वापसी का मुद्दा उठाया था
· दीपेन्द्र हुड्डा ने संसद, विदेश मंत्रालय से लेकर विदेश मामलों की संसदीय समिति तक लगातार इस मामले को उठाया और लापता लोगों की वतन वापसी के प्रयास किए
· भयंकर रूप से बढ़ रही बेरोजगारी ने युवाओं को विदेश जाने पर मजबूर कर दिया – दीपेन्द्र हुड्डा
· ज्यादातर युवा बिचौलियों को लाखों रुपए देकर डंकी रूट से विदेश गए, उन्होंने घर-बार सबकुछ बेच दिया। जब वापस लौटे तो सब कुछ बर्बाद हो चुका था – दीपेन्द्र हुड्डा

चंडीगढ़, 2 मार्च। सांसद दीपेन्द्र हुड्डा ने विगत 5 फरवरी को लोकसभा में नियम 377 के तहत रूस के युद्ध क्षेत्र में फंसे भारतीय युवाओं, खासकर छात्रों की सुरक्षित वतन वापसी की मांग की थी। इस पर विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने पत्र लिखकर सांसद दीपेन्द्र हुड्डा की चिंताओं को सही बताते हुए कहा कि अभी तक उपलब्ध जानकारी के अनुसार, 214 भारतीय नागरिकों के रूसी सेना में शामिल होने की खबर है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने माना कि नौकरी दिलाने के नाम पर भारतीय नागरिकों को गुमराह किया गया है। सरकार ने 135 भारतीय नागरिकों को रूसी सेना के साथ साइन किए गए कॉन्ट्रैक्ट से छुटकारा दिलाकर इनकी सुरक्षित वतन वापसी में मदद की है। विदेश मंत्री ने यह भी माना कि लड़ाई के दौरान 29 भारतीय नागरिकों की जान जाने की खबर है। मॉस्को में भारतीय दूतावास मृतकों और घायलों के लिए मुआवज़े के दावे जमा करने में परिवारों को ज़रूरी मदद दे रहा है। भारत सरकार का विदेश मंत्रालय रूस में लापता बताए गए 14 लोगों का पता लगाने और बाकी 36 लोगों के स्टेटस अपडेट के लिए रूसी अधिकारियों के साथ लगातार बातचीत कर रहा है। विदेश मंत्रालय रूसी अधिकारियों के साथ मिलकर सभी लापता लोगों की DNA रिपोर्ट शेयर करके उनका पता लगाने में परिवारों की मदद के साथ परिवारों को जरूरी सूचनाएं भी अपडेट करा रहा है।

विदेश मंत्री ने पत्र के जरिए कुछ ऐसे मामलों की जानकारी होने की बात भी कही जहाँ जेल में सज़ा काट रहे भारतीय नागरिक अपनी मर्ज़ी से रूसी सेना में शामिल हो गए, ताकि उन्हें एक तय समय तक रूसी सेना में सेवा करने के बदले, जेल में बंद लोगों की सज़ा माफ़ करने के सरकारी आदेश का फ़ायदा मिल सके। कुछ लोग पहले से ज़्यादा साइनिंग अमाउंट, सैलरी और नागरिकता मिलने के लालच में आ गए हैं। भारत सरकार ने भारतीय नागरिकों को रूसी सेना में शामिल होने के किसी भी ऑफ़र पर ध्यान न देने की एडवाइज़री जारी की है और सभी भारतीय नागरिकों से रूस में नौकरी के मौके ढूंढते समय सावधानी बरतने की भी अपील की है।
दीपेन्द्र हुड्डा ने कहा कि यह मामला भारतीय नागरिकों की सुरक्षा, सरकार की विदेश नीति, कूटनीतिक प्रभाव से सीधे जुड़ा है। दीपेन्द्र हुड्डा ने कहा कि अनेक युवा तो ऐसे भी हैं जिन्हें या तो विदेशों में बंधक बना लिया गया है या एजेंटों ने धोखे से उन्हें विदेशी सेना में भर्ती करवाकर रूस-यूक्रेन में झोंक दिया है। अनेक युवा ऐसे भी हैं जिनका परिवार को कुछ अता-पता ही नहीं लग रहा है। कई महीनों से इन युवकों का परिवार से संपर्क नहीं हो पाया रहा है। उनकी चिंता में परेशान और गहरी पीड़ा झेल रहे परिवार के लोग राज्य सरकार से लेकर केंद्र सरकार तक गुहार लगा चुके हैं। सांसद दीपेन्द्र हुड्डा ने कहा कि देश के अनेक युवा छात्र-वीज़ा पर पढ़ाई के लिए रूस गए थे, लेकिन वहाँ पहुँचने के बाद उन्हें बहला-फुसलाकर, धोखे से रूसी सेना में जबरन भर्ती कर रूस-यूक्रेन सीमा के युद्धक्षेत्र में झोंक दिया गया। दीपेन्द्र हुड्डा ने कहा कि भयंकर रूप से बढ़ रही बेरोजगारी ने युवाओं को विदेश जाने पर मजबूर कर दिया है। ज्यादातर युवा बिचौलियों को लाखों रुपए देकर अवैध डंकी रूट से विदेश गए, इसके लिए उन्होंने अपना घर-बार सबकुछ बेच दिया। जब वापस लौटे तो सब कुछ बर्बाद हो चुका था। उन्होंने कहा कि काम की तलाश में विदेश गए हरियाणा के युवाओं की दुर्दशा के लिए पूरी तरह बीजेपी सरकार जिम्मेदार है। यदि सरकार नौजवानों को यहीं अपने देश में रोजगार उपलब्ध कराती तो वे अपना घर-बार छोड़कर विदेश क्यों जाते। वे लगातार इस मामले को संसद, विदेश मंत्रालय से लेकर विदेश मामलों की संसदीय समिति में उठा चुके हैं और विभिन्न स्तरों पर भारतीय नागरिकों की सुरक्षित वतन वापसी के लिए प्रयास करते रहे हैं।








