कांग्रेस कार्यकर्ताओं को हाऊस अरेस्ट करना लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला: वेदप्रकाश विद्रोही

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हाऊस अरेस्ट पर सरकार-पुलिस की भूमिका पर उठे सवाल, जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग

चंडीगढ़, 26 फरवरी 2026। स्वयंसेवी संस्था ‘ग्रामीण भारत’ के अध्यक्ष वेदप्रकाश विद्रोही ने बुधवार को चंडीगढ़ में हरियाणा कांग्रेस द्वारा मनरेगा कानून को खत्म करने के विरोध में किए गए प्रदर्शन के दौरान प्रदेश के विभिन्न जिलों में कांग्रेस कार्यकर्ताओं को हाऊस अरेस्ट किए जाने की कड़ी निंदा की है। उन्होंने इसे नागरिकों के संवैधानिक विरोध-प्रदर्शन के अधिकार पर सीधा हमला बताया।

विद्रोही ने कहा कि जब एक राजनीतिक दल के कार्यकर्ताओं को शांतिपूर्ण प्रदर्शन के उनके संवैधानिक अधिकार से पुलिस बल के जरिए रोका जाता है, तो यह लोकतंत्र और संविधान पर गंभीर खतरे का संकेत है। उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी-भाजपा-संघ सरकार पिछले दस वर्षों से सुनियोजित तरीके से देश के लोकतांत्रिक ढांचे को कमजोर कर संघीय फासीवाद थोपने का प्रयास कर रही है। यदि आमजन ने समय रहते इस खतरे को गंभीरता से नहीं लिया तो आने वाले दिनों में भारत का लोकतंत्र महज नाम का रह जाएगा और संविधान केवल अलमारियों की शोभा बनकर रह जाएगा।

उन्होंने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि केंद्र की सरकार दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश को उत्तर कोरिया जैसे नियंत्रित राज्य की दिशा में ले जाने का प्रयास कर रही है।

विद्रोही ने हरियाणा विधानसभा में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी द्वारा दिए गए उस बयान पर भी सवाल उठाया, जिसमें उन्होंने कहा था कि प्रदेश में कहीं भी कांग्रेस कार्यकर्ताओं को हाऊस अरेस्ट नहीं किया गया और न ही सरकार ने ऐसा कोई आदेश दिया। विद्रोही ने पूछा कि यदि सरकार ने कोई आदेश नहीं दिया, तो फिर प्रदेश के विभिन्न जिलों में पुलिस ने किसके निर्देश पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं को हाऊस अरेस्ट किया?

उन्होंने कहा कि यदि मुख्यमंत्री का बयान सत्य है तो हरियाणा पुलिस ने बिना आदेश के यह कार्रवाई कर गैरसंवैधानिक कृत्य किया है। वहीं यदि कार्रवाई सरकार के निर्देश पर हुई है तो विधानसभा में दिया गया बयान भ्रामक है। उन्होंने कहा कि विभिन्न समाचार पत्रों में फोटो सहित प्रकाशित खबरें इस बात का प्रमाण हैं कि कांग्रेस कार्यकर्ताओं को रोका गया और हाऊस अरेस्ट किया गया।

वेदप्रकाश विद्रोही ने कहा कि प्रत्येक नागरिक को किसी भी सरकार की जनविरोधी नीतियों और कार्यक्रमों के खिलाफ शांतिपूर्वक विरोध-प्रदर्शन करने का संवैधानिक अधिकार है। इस अधिकार को अप्रत्यक्ष रूप से छीनना लोकतंत्र और संविधान का उपहास है, जिसे किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जा सकता।

उन्होंने मांग की कि चंडीगढ़ प्रदर्शन में जाने वाले कांग्रेस कार्यकर्ताओं को अवैध रूप से हाऊस अरेस्ट करने का आदेश देने वाले संबंधित पुलिस अधिकारियों के खिलाफ तत्काल कानूनी कार्रवाई की जाए और एफआईआर दर्ज की जाए, ताकि भविष्य में किसी भी नागरिक के लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन करने का दुस्साहस दोबारा न हो।

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Author: Bharat Sarathi

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