स्वच्छता, कचरा प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण पर अधिकारियों के साथ विस्तृत समीक्षा बैठक

गुरुग्राम, 25 फरवरी। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) के स्पेशल मॉनिटर विद्या भूषण कुमार बुधवार को गुरुग्राम पहुंचे। नगर निगम गुरुग्राम कार्यालय में आयोजित बैठक में शहर की स्वच्छता, शहरी प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े कार्यों की विस्तृत समीक्षा की गई। बैठक में जीएमडीए, एमसीजी, एचएसवीपी, एचएसपीसीबी सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
अधिकारियों ने शहर में चल रहे स्वच्छता अभियानों, कचरा प्रबंधन, सड़क सफाई, हरित विकास और प्रदूषण नियंत्रण से संबंधित कार्यों की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की। चारों जोनों में संचालित योजनाओं, नई परियोजनाओं और भविष्य की रणनीतियों की जानकारी भी साझा की गई।
डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण और लैंडफिल प्रबंधन पर विशेष ध्यान
नगर निगम क्षेत्र में ठोस कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण के लिए बहुस्तरीय व्यवस्था लागू की गई है। डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण, सड़क सफाई, सेकेंडरी कलेक्शन प्वाइंट का रखरखाव, लिगेसी वेस्ट प्रबंधन तथा हॉर्टिकल्चर व सीएंडडी वेस्ट मैनेजमेंट जैसे कार्य नियमित रूप से किए जा रहे हैं। शहर में लगभग 1,29,903 संपत्तियों को बल्क वेस्ट जनरेटर के रूप में चिन्हित किया गया है, जो प्रतिदिन 100 किलोग्राम से अधिक कचरा उत्पन्न करते हैं। 9 जनवरी 2026 से 8 जुलाई 2026 तक की अल्पकालिक व्यवस्था के तहत चार एजेंसियां करीब 400 वाहनों से घर-घर कचरा एकत्र कर रही हैं, जबकि दीर्घकालिक योजना भी तैयार की जा रही है।
धूल प्रदूषण नियंत्रण और सड़क सफाई अभियान
मशीनीकृत सड़क सफाई के साथ 25 अक्टूबर 2025 से विशेष रोड डस्ट लिफ्टिंग अभियान चलाया जा रहा है। धूल और वायु प्रदूषण को कम करने के लिए ट्रक-माउंटेड स्प्रिंकलर, एंटी-स्मॉग गन और एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग स्टेशन लगाए गए हैं। साथ ही इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग और बैटरी स्वैपिंग स्टेशन स्थापित किए जा रहे हैं।
बंधवाड़ी लैंडफिल साइट पर सुधार कार्य
बंधवाड़ी कचरा प्रबंधन स्थल पर बाउंड्री वॉल, आंतरिक सड़क, ड्रेनेज, लीचेट परिवहन और वज़न पुल जैसी सुविधाएं विकसित की गई हैं। 31 जनवरी 2026 तक लगभग 36.28 लाख मीट्रिक टन लिगेसी वेस्ट का निस्तारण किया जा चुका है, जबकि करीब 16.60 लाख मीट्रिक टन कचरा शेष है, जिसे फरवरी 2027 तक खत्म करने का लक्ष्य रखा गया है। बसई स्थित सीएंडडी वेस्ट प्लांट की क्षमता 300 टन प्रतिदिन से बढ़ाकर 1200 टन प्रतिदिन कर दी गई है। पिछले छह महीनों में कई पुराने कचरा हॉटस्पॉट भी पूरी तरह साफ किए गए हैं।
मॉडल रोड, तालाब विकास और हरित पहल
विभिन्न एजेंसियों के सहयोग से 101 किलोमीटर सड़कों को मॉडल रोड के रूप में विकसित करने की योजना लागू की जा रही है। हॉर्टिकल्चर प्रबंधन के तहत 32 मशीनों से बागवानी कचरे को श्रेड कर ग्रीन बेल्ट और कच्ची सड़कों पर उपयोग किया जा रहा है। नगर निगम क्षेत्र के 74 तालाबों में से 55 का विकास पूरा हो चुका है, जबकि शेष पर कार्य जारी है। पार्कों और तालाबों की सिंचाई के लिए माइक्रो एसटीपी के माध्यम से उपचारित पानी का उपयोग किया जा रहा है, जिससे ताजे पानी की बचत हो रही है।
अवैध कचरा फेंकने पर निगरानी तेज
अवैध रूप से कचरा फेंकने की घटनाओं पर रोक लगाने के लिए पूर्व सैनिकों से बनी सैनिटेशन सिक्योरिटी फोर्स की 12 टीमें तैनात की गई हैं। इसके अलावा 81 सहायक स्वच्छता निरीक्षकों की भर्ती कर निगरानी और प्रवर्तन को मजबूत किया गया है।
समयबद्ध और परिणामोन्मुख क्रियान्वयन के निर्देश
एनएचआरसी स्पेशल मॉनिटर विद्या भूषण कुमार ने कहा कि योजनाओं का प्रभाव जमीन पर स्पष्ट दिखाई देना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी परियोजनाओं को समयबद्ध, पारदर्शी और परिणामोन्मुख तरीके से लागू किया जाए ताकि नागरिकों को वास्तविक लाभ मिल सके। उन्होंने डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण, लैंडफिल प्रबंधन, प्रदूषण नियंत्रण और सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों पर सतत निगरानी रखने पर जोर दिया। साथ ही नागरिक सहभागिता बढ़ाने, शिकायतों के त्वरित समाधान, जागरूकता अभियानों को मजबूत करने और पौधारोपण बढ़ाने की आवश्यकता बताई।
बैठक के बाद स्पेशल मॉनिटर ने हीरो कंपनी, सीएक्यूएम स्टेशन विकास सदन, सीएंडडी वेस्ट प्लांट व वाटर ट्रीटमेंट प्लांट बसई तथा बंधवाड़ी कचरा प्रबंधन स्थल सहित शहर के विभिन्न क्षेत्रों का दौरा कर जमीनी स्थिति का निरीक्षण भी किया।







