पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट की निगरानी में जांच की मांग, एसीबी की निष्पक्षता पर उठाए सवाल
चंडीगढ़/रेवाडी, 24 फरवरी 2026। स्वयंसेवी संस्था ग्रामीण भारत के अध्यक्ष वेदप्रकाश विद्रोही ने आरोप लगाया कि IDFC First Bank से हरियाणा सरकार के खाते से 590 करोड़ रुपये निकाले जाने का मामला प्रदेश के इतिहास के बड़े घोटालों में से एक है। उन्होंने कहा कि जब सरकारी बैंक खाते से इतनी बड़ी राशि निकाली जा सकती है तो सहज अनुमान लगाया जा सकता है कि पिछले दस वर्षों में भाजपा शासन के दौरान सरकारी खजाने में किस स्तर पर लूट हुई होगी और भ्रष्टाचार किस हद तक पहुंचा होगा।
विद्रोही ने कहा कि हरियाणा सरकार के खाते से 590 करोड़ रुपये बिना सत्तारूढ़ दल के नेताओं की मिलीभगत के निकालना संभव नहीं है। उनके अनुसार, यह कोई साधारण वित्तीय अनियमितता नहीं, बल्कि सुनिश्चित लूट का मामला है, जो सत्ता के शीर्ष पर बैठे लोगों की जानकारी या सहयोग के बिना संभव नहीं हो सकता।
उन्होंने विधानसभा में मुख्यमंत्री द्वारा दिए गए उस बयान पर भी सवाल उठाए, जिसमें कहा गया है कि लूट की गई राशि की ब्याज सहित वसूली की जाएगी। विद्रोही ने पूछा कि जब सरकार का धन बैंक खाते में भी सुरक्षित नहीं है, तो फिर वह कहां सुरक्षित माना जाए? उन्होंने कहा कि सवाल वसूली का नहीं, बल्कि इस बात का है कि इतनी बड़ी निकासी आखिर हुई कैसे और जिम्मेदार कौन है?
मुख्यमंत्री द्वारा मामले की जांच एसीबी से कराने की घोषणा पर भी विद्रोही ने शंका जताई। उन्होंने कहा कि क्या एसीबी सत्तारूढ़ नेताओं के खिलाफ निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच कर पाएगी? उनका आरोप है कि इतनी बड़ी राशि की निकासी की भनक तक सत्तारूढ़ दल को न लगे, यह मानना कठिन है।
वेदप्रकाश विद्रोही ने मांग की कि इस पूरे प्रकरण की जांच पंजाब-हरियाणा हाईकोर्टt की निगरानी में करवाई जाए, ताकि जांच निष्पक्ष और पारदर्शी हो सके तथा दोषियों को कड़ी सजा मिल सके। उन्होंने कहा कि सरकारी बैंक खातों से धन निकासी के इस घोटाले में शामिल छोटे-बड़े सभी दोषियों को कानून के तहत दंडित किया जाना चाहिए।








