विधान सभा व मुख्यमंत्री की छवि ख़राब करने का लगाया आरोप
स्पीकर कल्याण ने भी इस विषय पर सदन में दी अपनी आब्जर्वेशन
चंडीगढ़, 23 फरवरी – हरियाणा विधान सभा के बजट सत्र के दौरान सोमवार को एक यूट्यूब चैनल ‘एक्शन इंडिया हरियाणा’ के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव सदन में पेश किया गया। विधान सभा अध्यक्ष हरविन्द्र कल्याण ने इस प्रस्ताव को सदन की सहमति से विशेषाधिकार समिति को भेज दिया। यह प्रस्ताव विधायक प्रमोद विज की ओर से हरियाणा विधान सभा के कार्य प्रक्रिया एवं कार्य संचालन नियमों के तहत पेश किया गया था। इसमें उन्होंने चैनल पर विशेषाधिकार हनन एवं सदन की अवमानना का प्रश्न उठाया।
विधायक प्रमोद विज ने कहा था कि एक्शन इंडिया हरियाणा (एआई) सोशल मीडिया चैनल के प्रबंध निदेशक, प्रकाशक, संपादक, निर्माता और संवाददाता का उद्देश्य विधायिका एवं विधान सभा के नेता मुख्यमंत्री की प्रतिष्ठा और गरिमा को धूमिल करना था। इस मामले में विधान सभा के हस्तक्षेप की आवश्यकता है। सार्वजनिक रूप से प्रसारित वीडियो के अनुसार, इन व्यक्तियों ने गंभीर दुर्व्यवहार किया है। वीडियो से स्पष्ट है कि इसे दुर्भावनापूर्ण इरादे से छेड़छाड़ किया गया है। वीडियो की सामग्री से पता चलता है कि कुछ तस्वीरें कुछ महीने पहले की हैं और वे भी हरियाणा विधान सभा या उसके परिसर से संबंधित घटनाओं से नहीं जुड़ी हैं। वीडियो से इन व्यक्तियों का इरादा स्पष्ट है कि उनका मकसद केवल सदन के नेता और विधानमंडल की प्रतिष्ठा और गरिमा को ठेस पहुंचाना था। ये इन व्यक्तियों के घोर, अन्यायपूर्ण और अनुचित आचरण के स्पष्ट और पुख्ता सबूत हैं, जिनका उद्देश्य मुख्यमंत्री और विधान सभा की प्रतिष्ठा और गरिमा को अपमानित करना, बदनाम करना और नुकसान पहुंचाना है। उनका यह अशोभनीय आचरण सदन की गरिमा और प्रतिष्ठा पर प्रहार है।
उक्त वीडियो में विधान सभा में तथाकथित पुलिस अधिकारियों की तैनाती पर सवाल उठाए गए हैं। इस विषय पर अपनी ऑब्जर्वेशन देते हुए विधान सभा अध्यक्ष हरविन्द्र कल्याण ने कहा कि समय-समय पर सदस्यों व प्रेस से हरियाणा विधान सभा परिसर की सुरक्षा-व्यवस्था का विषय संज्ञान में आता है। लोक सभा सचिवालय के संयुक्त निदेशक, सुरक्षा से भी इस भवन की सुरक्षा-व्यवस्था पर सुझाव मिले हैं। इन सबके मद्देनजर इस विशेष भवन की देख-रेख के बारे में उन्होंने विचार किया और माननीय सदस्यों, पूर्व-सदस्यों व अन्य आगंतुकों की सदन व बाहरी सुविधा-सुरक्षा के कदम उठाए हैं। इनमें सर्जेंट-एट-आर्म्स की 2020 से बंद की गई नियुक्ति भी शामिल है। पंजाब लेजिस्लेटिव असेंबली (ऑफिसेज) एक्ट, 1939 के अंतर्गत सर्जेंट-अट-आर्म्स की नियुक्ति का प्रावधान है। यह एक्ट हरियाणा ने भी स्वीकृत किया हुआ है।
ऐसी प्रथा शुरू से लेकर 2019 तक सफलतापूर्वक चली आ रही थी। वर्तमान में विशेषकर उपरोक्त तथ्यों के मद्देनज़र विधान भवन की सुरक्षा और व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए, परिसर के अंदर, बाहर व सदन के प्रबंधन को सुव्यवस्थित करने के लिए यह निर्णय आवश्यक हो गया है। विधान भवन के आंतरिक अनुशासन के साथ-साथ बाहरी सुरक्षा व्यवस्था भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।
2019 तक प्रचलित व स्थापित परंपरा, लोक सभा अधिकारी के सुझाव और अधिनियम, 1939 के प्रावधानों के अनुरूप सर्जेंट-अट-आर्म्स को सदन के अंदर की व्यवस्था संभालने का दायित्व यथानुसार सौंपा गया है, ताकि मार्शल्स बाहरी सुरक्षा व्यवस्था को अधिक प्रभावी और सुव्यवस्थित बनाये रख सकें। वाच एंड वार्ड ऑफिसर, सर्जेंट-एट-आर्म्स की हाउस में तथा मार्शल्स का बाहर सहयोग करेंगे। इससे सभी अपने-अपने निर्धारित कर्तव्य को और अधिक सुचारू रूप से निभा कर सदन, सदस्य व परिसर की सुरक्षा व्यवस्था व्यवस्थित रख पायेंगे।






