“400 करोड़ में से 80% से अधिक धन पड़ा रहा, जनता को विकास से वंचित क्यों?” — सतवंती नेहरा, कांग्रेस पार्टी कार्यकर्ता
गुरुग्राम। हरियाणा में वर्ष 2025-26 के जिला-योजना (D-Plan) बजट खर्च को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। हाल ही में प्रकाशित रिपोर्ट (The Tribune) के अनुसार, मार्च 2026 तक राज्य में लगभग ₹400 करोड़ के आवंटन में से केवल ₹76.33 करोड़ ही खर्च हो सके हैं — यानी महज़ लगभग 19% उपयोग, जबकि 80% से अधिक राशि खर्च नहीं हो पाई।
कांग्रेस पार्टी कार्यकर्ता सतवंती नेहरा ने इस स्थिति पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि “जब प्रदेश के गाँव-कस्बों में बुनियादी सुविधाओं की कमी है, तब विकास के लिए स्वीकृत धन का उपयोग न होना प्रशासनिक विफलता और जवाबदेही की कमी को दर्शाता है।”
जिला-वार स्थिति चिंताजनक
रिपोर्ट के अनुसार:
- गुरुग्राम और झज्जर जिलों में मार्च तक लगभग शून्य खर्च दर्ज हुआ।
- यमुनानगर में नाममात्र (लगभग 0.03%) खर्च हुआ।
- वहीं फरीदाबाद, सोनीपत और हिसार जैसे कुछ जिलों में लगभग 40-45% तक राशि खर्च की गई।
सतवंती नेहरा ने कहा कि “यह असमानता बताती है कि कहीं न कहीं योजना क्रियान्वयन में गंभीर कमी है। जिन जिलों में एक भी रुपया खर्च नहीं हुआ, वहां विकास कार्य क्यों रुके रहे? क्या प्रशासनिक अनुमति, तकनीकी स्वीकृति या राजनीतिक उदासीनता इसके पीछे कारण है?”
जनता से जुड़ा सीधा प्रश्न
उन्होंने पूछा कि:
- क्या जिला प्रशासन समय पर परियोजनाएं शुरू नहीं कर पाया?
- क्या योजनाओं की स्वीकृति में देरी हुई?
- क्या बजट केवल कागजों तक सीमित रह गया?
नेहरा ने सरकार से मांग की कि D-Plan के अंतर्गत स्वीकृत प्रत्येक परियोजना की जिला-वार सार्वजनिक प्रगति रिपोर्ट जारी की जाए और यह स्पष्ट किया जाए कि शेष राशि कब और कैसे खर्च की जाएगी।
जवाबदेही तय हो
उन्होंने कहा, “प्रदेश में बेरोज़गारी, ग्रामीण सड़कें, पेयजल, स्वास्थ्य और सामुदायिक भवन जैसी आवश्यकताएँ अभी भी अधूरी हैं। यदि विकास निधि समय पर खर्च नहीं होगी तो इसका सीधा असर जनता पर पड़ेगा। सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि 80% से अधिक धन क्यों पड़ा रहा।”
अंत में सतवंती नेहरा ने कहा कि यदि सरकार पारदर्शिता से जवाब नहीं देती तो कांग्रेस पार्टी इस मुद्दे को व्यापक स्तर पर उठाएगी।
सरकार की आधिकारिक अंतिम व्यय रिपोर्ट जारी होने पर स्थिति और स्पष्ट हो सकती है।







