24 फरवरी से 3 मार्च तक होलाष्टक, सावधान रहना जरूरी: पं. अमरचंद भारद्वाज

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रंगों की जगह फूलों से होली खेलें, स्वास्थ्य सुरक्षा का रखें ध्यान

गुरुग्राम। श्री माता शीतला श्राइन बोर्ड के पूर्व सदस्य एवं आचार्य पुरोहित संघ के अध्यक्ष, कथावाचक पंडित अमरचंद भारद्वाज ने वर्ष 2026 में होलाष्टक के संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि इस वर्ष 24 फरवरी से 3 मार्च तक होलाष्टक रहेगा। उन्होंने कहा कि होली से आठ दिन पूर्व होलाष्टक प्रारंभ हो जाता है, जिसकी शुरुआत फाल्गुन शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि अर्थात 24 फरवरी 2026 से होगी तथा इसका समापन 3 मार्च 2026 को होलिका दहन के साथ होगा।

पंडित भारद्वाज ने कहा कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इन दिनों में ग्रहों का प्रभाव उग्र रहता है, इसलिए इस अवधि में विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, नामकरण जैसे मांगलिक कार्यों को टालने की सलाह दी जाती है। हालांकि होलाष्टक को अशुभ काल माना जाता है, लेकिन इन दिनों में किए गए जप, तप, दान और भक्ति जैसे आध्यात्मिक कार्यों का विशेष पुण्य फल प्राप्त होता है।

उन्होंने पौराणिक प्रसंग का उल्लेख करते हुए बताया कि भक्त प्रह्लाद को उनके पिता हिरण्यकश्यप ने आठ दिनों तक भगवान की भक्ति छोड़ने के लिए कठोर यातनाएं दीं, किंतु उन्होंने अपनी आस्था नहीं छोड़ी। अंततः हिरण्यकश्यप ने अपनी बहन होलिका को प्रह्लाद को अग्नि में बैठाकर मारने का आदेश दिया। किंतु भगवान विष्णु की कृपा से होलिका, जिसे अग्नि में न जलने का वरदान प्राप्त था, स्वयं भस्म हो गई और प्रह्लाद सुरक्षित रहे। तभी से होलिका दहन का पर्व मनाया जाने लगा और उसके पूर्व के आठ दिन होलाष्टक कहलाए।

पंडित अमरचंद भारद्वाज के अनुसार, फाल्गुन शुक्ल अष्टमी से पूर्णिमा तक आठ दिनों में आठ प्रमुख ग्रह क्रमशः उग्र अवस्था में माने जाते हैं—
अष्टमी को चंद्रमा, नवमी को सूर्य, दशमी को शनि, एकादशी को शुक्र, द्वादशी को गुरु, त्रयोदशी को बुध, चतुर्दशी को मंगल तथा पूर्णिमा को राहु-केतु। इन ग्रहों की उग्रता के कारण मानसिक असमंजस, तनाव और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की संभावना बढ़ जाती है।

उन्होंने नागरिकों से अपील करते हुए कहा कि होली का पर्व आनंद और उल्लास का प्रतीक है, किंतु रासायनिक व हानिकारक रंगों के प्रयोग से त्वचा, आंखों और स्वास्थ्य को नुकसान पहुंच सकता है। इसलिए रंगों की बजाय फूलों से होली खेलना अधिक सुरक्षित और पर्यावरण अनुकूल विकल्प है।

पंडित भारद्वाज ने सभी से निवेदन किया कि होली का उत्सव पारंपरिक श्रद्धा, सावधानी और स्वास्थ्य सुरक्षा के साथ मनाएं तथा समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करें।

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Author: Bharat Sarathi

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