गुरुग्राम | 20 दिसंबर 2025 – सूरत नगर फेज-2 स्थित शहीद भगत सिंह लाइब्रेरी में ‘ऑल इंडिया डेमोक्रेटिक यूथ ऑर्गेनाइजेशन’ (AIDYO) के तत्वावधान में काकोरी एक्शन के अमर शहीदों—रामप्रसाद बिस्मिल, अशफ़ाकउल्ला खां, रोशन सिंह एवं राजेंद्र नाथ लाहिड़ी—के शहादत दिवस पर एक भावपूर्ण स्मृति सभा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिकों, युवाओं और प्रबुद्ध जनों ने भाग लेकर क्रांतिकारियों को श्रद्धांजलि अर्पित की।
कार्यक्रम की शुरुआत पुष्पांजलि और क्रांतिकारी नारों के साथ हुई। उपस्थित लोगों ने अमर शहीदों के चित्रों पर पुष्प अर्पित किए और “अमर शहीदों को लाल सलाम” तथा “इंकलाब ज़िंदाबाद” के नारों के साथ अपनी भावनाएं व्यक्त कीं। पूरे कार्यक्रम का कुशल संचालन पिंटू कुमार ने किया।
सभा को संबोधित करते हुए सूरत नगर फेज-2 RWA की ओर से निरंजन लाल ने कहा कि काकोरी के शहीदों ने देश की आज़ादी के लिए जिस एकता, साहस और बलिदान का परिचय दिया, वह आज भी समाज के लिए प्रेरणास्रोत है।
AIDYO के जिला उपाध्यक्ष वजीर सिंह ने क्रांतिकारियों की वैचारिक विरासत पर प्रकाश डालते हुए कहा कि बिस्मिल और अशफ़ाक की अटूट दोस्ती भारत की साझा संस्कृति और सांप्रदायिक सौहार्द का जीवंत उदाहरण है। उन्होंने युवाओं से उनके विचारों को आत्मसात कर शोषण-मुक्त और न्यायपूर्ण समाज के निर्माण का संकल्प लेने का आह्वान किया।
AIUTUC के जिला सचिव सरवन कुमार गुप्ता ने कहा कि इन शहीदों का सपना केवल सत्ता परिवर्तन तक सीमित नहीं था, बल्कि वे सामाजिक-आर्थिक न्याय पर आधारित व्यवस्था चाहते थे। शिक्षक कमलकांत, वरिष्ठ नागरिक आर.के. शर्मा एवं पृथ्वीराज ने भी क्रांतिकारियों के संघर्षपूर्ण जीवन पर प्रकाश डाला और पुस्तकालयों के माध्यम से युवाओं में क्रांतिकारी साहित्य के प्रचार-प्रसार की आवश्यकता पर बल दिया।
वक्ताओं ने याद दिलाया कि 19 दिसंबर 1927 का दिन भारतीय इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में अंकित है, जब एक ही दिन तीन अलग-अलग जेलों में रामप्रसाद बिस्मिल, अशफ़ाकउल्ला खां और रोशन सिंह को फांसी दी गई थी, जबकि राजेंद्र नाथ लाहिड़ी को दो दिन पूर्व ही शहादत मिली थी।
सभा के अंत में उपस्थित सभी लोगों ने शहीदों के सपनों का भारत बनाने की सामूहिक शपथ ली।









