मनरेगा का नाम बदलना गांधी का अपमान, गोडसेवादी सोच को बढ़ावा: वेदप्रकाश विद्रोही

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मोदी-भाजपा-संघ सरकार पर महापुरुषों के अपमान और मनरेगा को कमजोर करने का गंभीर आरोप

रेवाडी/चंडीगढ़, 18 दिसंबर 2025: स्वयंसेवी संस्था ग्रामीण भारत के अध्यक्ष वेदप्रकाश विद्रोही ने मोदी-भाजपा-संघ सरकार द्वारा महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) का नाम बदलकर “विकसित भारत” किए जाने को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का खुला अपमान बताया है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह कदम अप्रत्यक्ष रूप से गोडसेवादी विचारधारा को बढ़ावा देने की सुनियोजित कोशिश है।

वेदप्रकाश विद्रोही ने कहा कि मोदी-भाजपा-संघ सरकार पहले से ही देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के खिलाफ दुष्प्रचार कर उनके चरित्र हनन का पाप करती रही है और अब पर्दे के पीछे राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, सरदार वल्लभभाई पटेल, बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर सहित अन्य महापुरुषों और स्वतंत्रता सेनानियों का भी अपमान करने से नहीं चूक रही।

उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा अहमदाबाद के सरदार पटेल क्रिकेट स्टेडियम का नाम बदलकर नरेंद्र मोदी स्टेडियम कर देना यह साबित करता है कि सरकार की सरदार पटेल के प्रति दिखाई जा रही भक्ति केवल दिखावा है। अब मनरेगा से गांधी जी का नाम हटाकर सरकार ने राष्ट्रपिता के अपमान का महापाप किया है।

विद्रोही ने कहा कि मोदी-भाजपा-संघ सरकार ने एक सुनियोजित रणनीति के तहत महात्मा गांधी की हत्या करने वाली संघी ताकतों को वैचारिक रूप से मजबूत करने के लिए गांधी जी के नाम और विचारों को मिटाने का षड्यंत्र शुरू किया है, जिसे किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार ने केवल नाम परिवर्तन ही नहीं किया, बल्कि ऐसे नियम बनाए हैं जिनसे ग्रामीण रोजगार देने वाली विश्व की सबसे बड़ी योजना मनरेगा को धीरे-धीरे निष्प्रभावी बनाया जा रहा है। पहले मनरेगा का 100 प्रतिशत बजट केंद्र सरकार वहन करती थी, लेकिन अब इसे बदलकर केंद्र का 60 प्रतिशत और राज्यों का 40 प्रतिशत हिस्सा अनिवार्य कर दिया गया है। आर्थिक संकट से जूझ रहे राज्यों के लिए 40 प्रतिशत हिस्सा देना संभव नहीं होगा, जिससे यह योजना स्वतः ही कमजोर हो जाएगी।

वेदप्रकाश विद्रोही ने कहा कि नए नियमों के जरिए कांग्रेस सरकार द्वारा दिए गए रोजगार गारंटी के अधिकार को भी कमजोर कर दिया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि अब यह पूरी तरह स्पष्ट हो गया है कि मोदी-भाजपा-संघ सरकार केवल आमजन, किसान, मजदूर और गरीब विरोधी ही नहीं है, बल्कि वह महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू, सरदार पटेल और बाबा साहब अंबेडकर जैसे महापुरुषों की विरासत को भी सत्ता के बल पर छोटा करने का प्रयास कर रही है।

उन्होंने कहा कि संघी मनुवादी व्यवस्था में विश्वास रखने वाली शक्तियों को देश के महापुरुषों के समकक्ष खड़ा करने की यह कोशिश लोकतंत्र और संविधान दोनों के लिए घातक है।

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Author: Bharat Sarathi

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