बाढ़ मुआवजे में ‘महाठगी’: सरकार ने 5.29 लाख में से सिर्फ 53 हजार किसानों को दिया राहत : विद्रोही

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24 फसलों के एमएसपी और भावांतर योजना के दावे झूठे साबित—‘किसान ठग योजना’ बना दी सरकार ने

31 लाख एकड़ में नुकसान, लेकिन मुआवजा सिर्फ 1.20 लाख एकड़ को—4% रकबा और 9% किसानों को ही राहत

गिरदावरी में देरी से लेकर मुआवजे की घोषणा तक—किसानों को ठगने की सुनियोजित रणनीति

चंडीगढ़/रेवाडी, 12 दिसंबर 2025। स्वयंसेवी संस्था ग्रामीण भारत के अध्यक्ष वेदप्रकाश विद्रोही ने हरियाणा की भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार जुमलेबाज़ी और झूठे दावों के सहारे किसानों को लगातार ठग रही है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी किसानों के कल्याण को लेकर बड़े-बड़े दावे जरूर करते हैं, लेकिन जमीन पर इनमें से एक भी दावा ईमानदारी से लागू नहीं होता।

एमएसपी और भावांतर योजना की पोल खुली

विद्रोही ने कहा कि प्रदेश में 24 फसलों का एमएसपी देने का मुख्यमंत्री का दावा पूरी तरह झूठा साबित हुआ है। भावांतर योजना किसान हितैषी न होकर ‘किसान ठग योजना’ बन चुकी है। किसानों को राहत देने के नाम पर सरकार सिर्फ कागजी काम और पोर्टल की नौटंकियों में उलझाए रहती है।

बाढ़ से तबाह फसलों के मुआवजे में बड़ा खेल

उन्होंने बताया कि इस मानसून में हरियाणा के आधे से ज्यादा जिलों में बाढ़ ने भीषण तबाही मचाई। फसलें एक पखवाड़े तक पानी में डूबी रहीं, और मुख्यमंत्री लगातार आश्वासन देते रहे कि हर किसान को पूरा मुआवजा मिलेगा। लेकिन जब घोषणा हुई, तो सरकार की कथनी–करनी का अंतर खुलकर सामने आ गया।

विद्रोही ने आरोप लगाया कि—

  • 5.29 लाख किसानों ने 31 लाख एकड़ फसल खराबा पोर्टल पर दर्ज करवाया था।
  • सरकार ने मात्र 53 हजार किसानों को 1.20 लाख एकड़ के नुकसान पर 116 करोड़ रुपये का मुआवजा घोषित किया।

इस तरह भाजपा सरकार ने 4.75 लाख किसानों और करीब 30 लाख एकड़ फसल के मुआवजे को नजरअंदाज कर दिया।
विद्रोही के अनुसार, “सरकार ने पहले गिरदावरी में देरी की, फिर गलत गिरदावरी करवाई और अब अंतिम मुआवजा घोषित करके हमारे संदेह को सच साबित कर दिया है।”

मुआवजा सिर्फ 4% रकबे और 9% किसानों तक सीमित

उन्होंने कहा कि फसल खराबे के वास्तविक आंकड़ों के मुकाबले मुआवजा बेहद कम किसानों को दिया गया।

  • घोषित मुआवजा केवल 4% रकबे के लिए
  • और केवल 9% किसानों के लिए है

बाकी 91% किसान, जिनकी 96% फसलें नष्ट हुईं, उन्हें पूरी तरह नज़रअंदाज़ कर दिया गया है।

“महाठग सरकार”—विद्रोही

वेदप्रकाश विद्रोही ने कहा, “यह सरकार घोर किसान–विरोधी है। कथनी और करणी में इतना बड़ा अंतर पहले कभी नहीं देखा गया। भाजपा सरकार किसानों के साथ संगठित धोखाधड़ी कर रही है।”

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Author: Bharat Sarathi

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