सिर्फ दिवस मनाने से नहीं मिटेगा भ्रष्टाचार, कड़े कदम जरूरी: गुरिंदरजीत सिंह

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें

निर्माण, शिक्षा और स्वास्थ्य—हर क्षेत्र में बढ़ रहा भ्रष्टाचार, सरकार दे जवाब

सरकारी निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर उठे सवाल

शिक्षा में भारी अनियमितताएँ, सुरक्षा तक खतरे में

स्वास्थ्य ढांचा कमजोर, निजी अस्पतालों की मनमानी

RTI और लोकपाल में लगातार कटौती, जवाबदेही कम

गुरुग्राम, 09 दिसंबर 2025। समाजसेवी इंजीनियर गुरिंदरजीत सिंह ने देश और हरियाणा में बढ़ते भ्रष्टाचार पर गंभीर चिंता जाहिर करते हुए कहा कि “सिर्फ भ्रष्टाचार दिवस मनाने से कुछ नहीं बदलेगा। भ्रष्टाचार जैसी बीमारी को खत्म करने के लिए कठोर और ईमानदार कदम जरूरी हैं।”

उन्होंने कहा कि सड़क, पुल, सरकारी भवन जैसे निर्माण कार्यों के टूटने की घटनाएँ जनता की मेहनत की कमाई की खुली लूट और भ्रष्टाचार की परिणति हैं।

प्रशासनिक अधिकारियों पर गंभीर भ्रष्टाचार के आरोप

गुरिंदरजीत सिंह ने कहा कि हरियाणा सहित कई राज्यों में उच्च अधिकारियों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगातार सामने आ रहे हैं।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा—

  • पंजाब में DIG रैंक के अधिकारी को आय से अधिक संपत्ति के मामले में गिरफ्तार किया गया
  • IPS वाई. कुमार केस में भ्रष्टाचार से जुड़े संबंध उजागर हुए
  • दिल्ली में जज के घर करोड़ों रुपये नगद मिलने की घटना ने सभी को चौंका दिया

उन्होंने कहा, “देश में सभी बड़े अधिकारियों की चल-अचल संपत्ति की पारदर्शी जाँच होनी चाहिए। तभी पता चलेगा कि कौन वास्तव में ईमानदार है और किसके पास अकूत काली कमाई छुपी है।”

निर्माण कार्यों में पारदर्शिता का अभाव

गुरुग्राम में अनेक स्थलों पर बिना प्राक्कलन बोर्ड लगाए निर्माण कार्य किए जा रहे हैं।
सिंह ने सवाल किया— “जब काम ही छुपाकर किए जाएँ, तो भ्रष्टाचार पर लगाम कैसे लगेगी?”

शिक्षा क्षेत्र में बढ़ती अनियमितताएँ

उन्होंने कहा कि शिक्षा विभाग में भी भ्रष्टाचार ने पैर पसार लिए हैं।

  • कई निजी स्कूल बिना मान्यता के चल रहे हैं
  • फायर NOC के बिना बच्चों की सुरक्षा जोखिम में
  • सरकार की चुप्पी पर सवाल

उन्होंने कहा— “यह बच्चों के भविष्य और जीवन से खिलवाड़ है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।”

सरकारी अस्पताल कम—निजी अस्पतालों की मनमानी

गुरुग्राम में सरकारी स्वास्थ्य ढाँचा मजबूत न करने पर उन्होंने गंभीर आपत्ति जताई। सिंह ने कहा— “सरकारी अस्पतालों की कमी से निजी अस्पताल मनमाना शोषण कर रहे हैं। यह कहीं न कहीं मिलीभगत और भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है।”

राजनीतिक टिकटों की कथित खरीद-फरोख्त की जाँच जरूरी

सिंह ने विभिन्न राजनीतिक दलों पर लगे टिकट बेचने के आरोपों पर भी सवाल उठाए।
सामने आए दावों के अनुसार—

  • पार्षद टिकट: 25 लाख – 2 करोड़ रुपये
  • विधायक टिकट: 40 करोड़ रुपये
  • सांसद टिकट: 100 करोड़ रुपये
  • मुख्यमंत्री पद: 500 करोड़ रुपये तक

उन्होंने कहा—“जब टिकट खरीदकर नेता सत्ता में आएगा, तो वह जनता की सेवा नहीं—पहले अपनी लागत निकालने में जुट जाएगा। यह सीधे-सीधे भ्रष्टाचार को जन्म देता है। इन शिकायतों की निष्पक्ष जाँच होनी चाहिए।”

RTI और लोकपाल को कमजोर करने से जवाबदेही घटी

सिंह ने कहा कि देश में भ्रष्टाचार रोकने के लिए बनाए गए RTI और लोकपाल जैसे सशक्त कानूनी तंत्र को जानबूझकर कमजोर किया गया।
उन्होंने इसे जनता के विश्वास पर सीधी चोट बताया। “वोट चोरी जैसे गंभीर आरोप सामने आ रहे हैं। वोट चोरी भी भ्रष्टाचार का ही एक रूप है।”

“जनता के विश्वास की रक्षा के लिए कार्रवाई अनिवार्य”

अंत में उन्होंने मांग की कि—

  • सरकार और प्रशासन भ्रष्टाचार से जुड़े सभी मामलों पर स्पष्ट जवाब दें
  • कठोर व निष्पक्ष जाँच सुनिश्चित की जाए
  • पारदर्शिता और जवाबदेही के उपाय तत्काल लागू हों

सिंह ने कहा—“जब तक भ्रष्टाचार करने वालों पर सख्त कार्रवाई नहीं होगी, लोकतंत्र पर विश्वास डगमगाता रहेगा।”

Bharat Sarathi
Author: Bharat Sarathi

Leave a Comment

और पढ़ें