जिलाध्यक्षों की निष्क्रियता से जमीनी संगठन रसातल में
गुरुग्राम। हरियाणा की राजनीति में गुरुग्राम कांग्रेस संगठन इन दिनों गहरे असंतोष से जूझ रहा है। वजह—संगठनात्मक सुस्ती, निष्क्रिय नेतृत्व और कार्यकर्ताओं से कट चुकी जिला इकाइयाँ। कार्यकर्ताओं और पुराने पदाधिकारियों का आरोप है कि नवनियुक्त जिला अध्यक्षों के आने के बाद भी कांग्रेस न तो ज़मीन पर दिख रही है और न ही संगठनात्मक ऊर्जा लौट पा रही है।
जिलाध्यक्षों की नियुक्ति… लेकिन संगठन अभी भी लापता!
गौरतलब है कि 11 वर्षों की लंबी खींचतान के बाद हरियाणा में कांग्रेस जिलाध्यक्षों की नियुक्तियाँ तो कर दी गईं, लेकिन
- तीन महीने बाद भी जिला कार्यकारिणी का गठन तक नहीं हुआ
- जिला बैठकों में उपस्थिति 50 से भी कम रहना अब आम
- जमीनी कार्यक्रम, आंदोलन, संवाद—सभी ठप
कार्यकर्ताओं का रोष है कि शहरी व ग्रामीण—दोनों जिलाध्यक्ष जमीन पर राजनीतिक रूप से दिखाई ही नहीं दे रहे। संपर्क के नाम पर मोबाइल फोन तक बंद मिलते हैं और कार्यकर्ताओं से संवाद लगभग शून्य।
दावेदार बढ़े… समर्पित कार्यकर्ता गायब
गुरुग्राम की चारों विधानसभा सीटों—गुरुग्राम, बादशाहपुर, पटौदी, सोहना—में 2024 चुनावों के दौरान कुल 145 टिकटार्थी सामने आए।
कार्यकर्ताओं का आरोप है कि इनमें से सक्रिय, निष्ठावान और वर्षों से संघर्षरत लोगों की अनदेखी की गई।
बाहरी और अवसरवादी नेताओं को तरजीह मिलने से पुराना कार्यकर्ता खुद को अपमानित महसूस कर रहा है।
“समर्पण की कोई कीमत नहीं, सिर्फ राजनीतिक अवसर देखते हैं नेता!” — एक वरिष्ठ कांग्रेसी कार्यकर्ता
दिल्ली रैली पर संशय—लक्ष्य 5000, पहुंचेंगे 500 भी शक!
14 दिसंबर को दिल्ली में प्रस्तावित “वोट चोर गद्दी छोड़” महारैली को लेकर भी गुरुग्राम कांग्रेस में उत्साह गायब है।
जहां जिला संगठन को 5000 कार्यकर्ताओं की जुटान का लक्ष्य दिया गया है, वहीं आंतरिक आकलन के मुताबिक 500 लोगों का आना भी मुश्किल।
यह स्थिति स्पष्ट संकेत है कि जिलाध्यक्षों का नेतृत्व कार्यकर्ताओं का भरोसा तो नहीं जगा पा रहा, बल्कि संगठन को और बिखेर रहा है।
“कागज़ों पर सक्रिय, ज़मीन पर गायब”
आरोपों की सूची लंबी है—
- पदाधिकारियों की मौजूदगी केवल कागज़ी रिकॉर्ड तक
- विधानसभा क्षेत्रों में पूर्व प्रत्याशियों की सक्रियताएँ नगण्य
- कार्यकर्ताओं से संवाद टूट चुका
- कार्यक्रमों में नेतृत्व ढूंढना मुश्किल
कार्यकर्ताओं का कहना है कि गुरुग्राम जैसा राजनीतिक और आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण जिला यदि इस तरह निष्क्रिय रहेगा, तो भविष्य में कांग्रेस की जमीन और सिकुड़ जाएगी।
कार्यकर्ताओं की मांग—जवाबदेही तय हो!
नाराज़ कार्यकर्ता जिला अध्यक्षों से स्पष्ट जवाबदेही की मांग कर रहे हैं—
- पदाधिकारियों का नियमित जमीनी रिपोर्ट कार्ड
- पारदर्शी निर्णय प्रक्रिया
- समर्पित कार्यकर्ताओं को प्राथमिकता
- संगठनात्मक बैठकों में अनिवार्य उपस्थिति
- नेतृत्व और कार्यकर्ताओं के बीच निरंतर संवाद
निष्कर्ष
गुरुग्राम कांग्रेस आज जिस स्थिति में खड़ी है, उसकी सबसे बड़ी जिम्मेदारी जिला नेतृत्व की निष्क्रियता पर सीधे तय होती है।
संगठन का ढुलमुल रवैया न बदला तो आने वाले चुनावों में गुरुग्राम कांग्रेस को राजनीतिक जमीन तलाशना भी मुश्किल हो जाएगा।
नेताओं के दावों और बड़े भाषणों से नहीं, जमीनी सक्रियता और समय पर निर्णयों से संगठन मजबूत होता है — और गुरुग्राम कांग्रेस को अब यही समझना होगा।









