“जनसंख्या संतुलन के आधार पर मिले विशेष दर्जा; केवल 2–3% आबादी वाले समुदायों को प्राथमिकता आवश्यक”
गुरुग्राम। देश में अल्पसंख्यक समुदायों की परिभाषा और उन्हें मिलने वाले विशेष संरक्षण को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर पुनर्विचार की आवश्यकता महसूस की जाने लगी है। इसी विषय पर गुरुग्राम के समाजसेवी इंजीनियर गुरिंदरजीत सिंह (अर्जुन नगर) ने कहा कि अल्पसंख्यक दर्जा ऐसे समुदायों को मिलना चाहिए जिनकी आबादी वास्तव में बहुत कम हो तथा जिन्हें सामाजिक-शैक्षणिक सहयोग की अधिक आवश्यकता हो।
उन्होंने कहा कि समय के साथ भारत की जनसंख्या संरचना में उल्लेखनीय परिवर्तन हुए हैं और कुछ समुदाय अब कई राज्यों में संख्या के आधार पर अल्पसंख्यक नहीं रह गए हैं। ऐसे में यह सवाल उठता है कि क्या मौजूदा व्यवस्था उन छोटे समुदायों तक वास्तविक लाभ पहुँचा पा रही है जिनकी आबादी 2–3% के दायरे में भी नहीं पहुँच पाती।
इंजीनियर सिंह ने स्पष्ट किया कि उनकी यह मांग किसी भी समुदाय के अधिकारों में कटौती करने के लिए नहीं है, बल्कि वास्तविक छोटे समुदायों को वास्तविक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए है।
📊 1951 → 2011: भारत में धर्म-आधारित जनसंख्या संरचना का परिवर्तन
सेंसस डेटा के अनुसार — किस धर्म की कितनी बढ़ी / घटी हिस्सेदारी
| धर्म | 1951 में आबादी (%) | 2011 में आबादी (%) | कुल हिस्सेदारी में बदलाव |
|---|---|---|---|
| हिंदू | 84.1 | 78.35 | लगभग 5.75% कमी |
| मुस्लिम | 9.80 | 14.20 | लगभग 4.40% वृद्धि |
| ईसाई | 2.00 | 2.34 | 0.34% वृद्धि |
| सिख | 1.89 | 1.87 | 0.02% कमी |
| बौद्ध | 0.74 | 0.77 | 0.03% वृद्धि |
| जैन | 0.46 | 0.41 | 0.05% कमी |
| पारसी | 0.13 | 0.06 | 0.07% कमी |
| अन्य | 0.43 | 0.72 | 0.29% वृद्धि |
Source: Census Data
“बदलते आँकड़े बताते हैं — अब नीति भी बदले” : सिंह
इंजीनियर गुरिंदरजीत सिंह ने कहा — “नीतियाँ समय-समय पर अपडेट होनी चाहिए। यदि अल्पसंख्यक निर्धारण जनसंख्या के आधार पर होता है, तो उसके लिए एक समान, पारदर्शी राष्ट्रीय मानक तय होना ही चाहिए — ताकि 2–3% वास्तविक छोटे समुदायों को संरक्षण मिल सके।”
उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि देश में अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग परिभाषाएँ होने से भ्रम पैदा होता है।
एक समान राष्ट्रीय नीति बनेगी तो न सिर्फ स्पष्टता आएगी, बल्कि सामाजिक सद्भाव भी मजबूत होगा और नीति का लाभ सही वर्ग तक पहुँचेगा।
कानूनी, सामाजिक और संवैधानिक ढांचे में शांतिपूर्ण विमर्श की जरूरत
इंजीनियर सिंह ने कहा — “इस मुद्दे को तथ्यात्मक बहस के साथ शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाया जाना चाहिए, ताकि देश की एकता और विकास दोनों मजबूत आधार पर आगे बढ़ सकें।” उन्होंने आग्रह किया कि सरकार, संसद और नीति-निर्माता बदलते जनसांख्यिकीय अध्ययन के आधार पर मिनोरिटी एक्ट और उससे जुड़े मानकों की राष्ट्रीय समीक्षा शुरू करें।
प्रमुख संदेश
- वास्तविक अल्पसंख्यकों को प्राथमिकता
- जनसंख्या-आधारित स्पष्ट मानक लागू हों
- समान राष्ट्रीय नीति से भ्रम और असंतोष खत्म होगा
- सामाजिक सद्भाव और राष्ट्रीय एकता और मजबूत होगी









