· नन्हीं जान जिनकी आंखे खुलने से पहले बंद कर दी जाती है, उनकी आँखें सरकार आंकड़ों में नहीं खुलने दे रही – दीपेन्द्र हुड्डा
· सरकार पहले समस्या को समझे और इसका संतुष्टिपूर्ण समाधान निकाले– दीपेन्द्र हुड्डा
· अबॉर्शन किट्स व ड्रग्स की खुली बिक्री पर कोई नियंत्रण क्यों नहीं – दीपेन्द्र हुड्डा
· IVF सेंटर्स के माध्यम से मेल चाइल्ड बर्थ की बढ़ती संख्या पर अंकुश क्यों नहीं – दीपेन्द्र हुड्डा
· एक महीने में 1500 में से 300 अबॉर्शन सेंटर्स रातों–रात कैसे बंद हुए? ये भी तब हुआ, जब Sex Ratio कम होने का हल्ला मचा – दीपेन्द्र हुड्डा
चंडीगढ़, 5 दिसंबर। सांसद दीपेन्द्र हुड्डा ने आज लोकसभा में हरियाणा के घटते लिंगानुपात और कन्या भ्रूण हत्या पर सरकार को आईना दिखाया। उन्होंने पूछा कि हरियाणा में कन्या भ्रूण हत्या और घटते लिंगानुपात पर केंद्र सरकार झूठ बोल रही है कि हरियाणा सरकार? दीपेन्द्र हुड्डा ने कहा कि कन्या भ्रूण हत्या के विषय पर BJP सरकार गंभीर नहीं है। केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने संसद में कहा कि पिछले 4-5 साल में लिंग अनुपात कम नहीं हुआ, लेकिन ये सच नहीं है। हरियाणा की बात करें तो 2011 से 2019 तक लिंग अनुपात में सुधार देखने को मिला था, लेकिन पिछले 4-5 साल में फिर से गिरावट आ गई है। दीपेंद्र हुड्डा के तारांकित प्रश्न पर सरकार की तरफ से पहले स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने जवाब दिया। जब स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री के जवाब से सांसद दीपेन्द्र हुड्डा संतुष्ट नहीं हुए तो केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा को खुद खड़ा होना पड़ा और कहा कि पिछले 4-5 वर्षों में लिंगानुपात में गिरावट नहीं आई है। दीपेन्द्र हुड्डा ने सरकार के जवाब को सच्चाई से कोसों दूर बताते हुए तंज किया कि तुम्हारी फ़ाइलों में गाँव का मौसम गुलाबी है, मगर ये आँकड़ें झूठे हैं ये दावा किताबी है! सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने कहा कि सरकार पहले समस्या को समझे और फिर इसका संतुष्टिपूर्ण समाधान निकाले।
उन्होंने कहा कि नन्हीं जान जिनकी आंखे खुलने से पहले बंद कर दी जाती है, उनकी आँखें सरकार आंकड़ों में भी नहीं खुलने दे रही है। हरियाणा सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के हवाले से उन्होंने बताया कि 2019 में प्रति हजार बेटों पर 922 बेटियों का जन्म हुआ, वहीं 2023-24 में यह संख्या घटकर 906 रह गयी। रोहतक में दिशा मीटिंग के आंकड़ों के अनुसार 2025 में यह आंकड़ा 814 पर रह गया। इससे पहले हरियाणा में वर्ष 2011 से 2019 तक लिंगानुपात में काफी संतुष्टिपूर्ण सुधार हुआ था। लेकिन हरियाणा स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार इसमें फिर से गिरावट आ गयी। उन्होंने सवाल किया कि अबॉर्शन किट्स व ड्रग्स की खुली बिक्री पर कोई नियंत्रण क्यों नहीं है? IVF सेंटर्स के माध्यम से मेल चाइल्ड बर्थ की बढ़ती संख्या पर अंकुश क्यों नहीं है? एक महीने 1500 में से 300 अबॉर्शन सेंटर्स रातों-रात क्यों बंद हुए? ये भी तब हुआ, जब Sex Ratio कम होने का हल्ला मचा। उन्होंने कहा कि हरियाणा सरकार तो अब लिंगानुपात में गिरावट का सच स्वीकार कर रही है, केंद्र सरकार को भी गुमराह करने की बजाय सच स्वीकार करना चाहिए।
लिंगानुपात में गिरावट के प्रमुख कारणों को बताते हुए सांसद ने कहा कि अबार्शन दवाईयां व किट दुकानों पर आसानी से उपलब्ध हैं। आईवीएफ सेंटर के माध्यम से ज्यादातर मेल चाइल्ड का जन्म हो रहा है। जब मीडिया में ये पूरा मामला उजागर हुआ तो एक महीने हरियाणा में 1500 में से 300 अबार्शन सेंटर बंद करने पड़े कई सेंटर तो रातों-रात स्वतः ताला बंद कर गायब हो गये। इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि स्वास्थ्य विभाग और डॉक्टर्स की मिलीभगत से बड़ा खेल चल रहा है।









