अवैध फैक्ट्रियों पर सख़्त कार्रवाई व बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण की ठोस कार्ययोजना बने: गुरिंदरजीत
विश्व मृदा दिवस पर दिया संदेश—“पॉलीथिन का बहिष्कार करो, मिट्टी बचाओ, पेड़ बढ़ाओ”
गुरुग्राम : शहर में बढ़ते प्रदूषण और बिगड़ती पर्यावरणीय स्थिति को लेकर हरियाणा सरकार के कैबिनेट मंत्री नरबीर सिंह द्वारा हाल ही में दिए गए बयान ने शहरवासियों में नई बहस छेड़ दी है। मंत्री नरबीर सिंह ने स्वयं स्वीकार किया कि गुरुग्राम जैसे प्रदूषित वातावरण में रहने से उनकी उम्र लगभग 10 वर्ष कम हुई है और वे गुरुग्राम को प्रदूषण एवं पॉलीथिन मुक्त बनाने में वह काम नहीं कर पाए, जिसकी उनसे उम्मीद थी।
“कमी मानना साहस है, पर अब ज़िम्मेदारी निभानी होगी”
अर्जुन नगर के समाजसेवी एवं इंजीनियर गुरिंदरजीत सिंह ने मंत्री के इस बयान का स्वागत करते हुए कहा कि आज की राजनीति में यह दुर्लभ है कि कोई नेता अपनी कमी को सार्वजनिक तौर पर स्वीकार करे। उन्होंने इसे सकारात्मक शुरुआत बताया, किंतु साथ ही कहा कि—
“सिर्फ कमी मान लेने से काम पूरा नहीं हो जाता। पर्यावरण, वन एवं वन्यजीव और उद्योग एवं वाणिज्य विभाग दोनों की ज़िम्मेदारी मंत्री जी के पास है, इसलिए प्रदूषण कम करने की जवाबदेही भी उन्हीं की बनती है। उन्हें हिम्मत नहीं हारकर ठोस कदम उठाने होंगे ताकि आने वाली पीढ़ियों को साफ हवा मिल सके।”
पेड़ कटाई से बिगड़ा संतुलन
गुरिंदरजीत सिंह ने आरोप लगाया कि विकास परियोजनाओं के नाम पर गुरुग्राम में हजारों छायादार पेड़ काट दिए गए। मेट्रो विस्तार के दौरान बड़े पेड़ों को जड़ सहित दूसरी जगह स्थानांतरित किया जा सकता था, परंतु ऐसा नहीं हुआ।
“हरियाली खत्म होने से पर्यावरण पर भारी चोट पहुंची है।”
अवैध फैक्ट्रियां प्रदूषण की सबसे बड़ी जड़
उन्होंने सवाल उठाया कि गुरुग्राम जैसे आधुनिक शहर में अवैध फैक्ट्रियों की संख्या लगातार क्यों बढ़ रही है।
“अधिकतर अवैध फैक्ट्रियां पर्यावरण मानकों की धज्जियां उड़ाती हैं और हवा, पानी तथा मिट्टी—तीनों को प्रदूषित करती हैं। कुछ समय पहले बसाई तालाब में दूषित पानी से सैकड़ों मछलियों की मौत इसका जीवंत उदाहरण है।”
उनके अनुसार, प्रदूषण नियंत्रित करने के लिए सबसे पहले रिहायशी इलाकों में चल रही अवैध फैक्ट्रियों पर कठोर कार्रवाई करनी होगी, साथ ही उद्योगों को पर्यावरणीय मानकों के पालन के लिए बाध्य करना होगा।
“मंत्री जी आगे आएं, हम सब साथ हैं”
गुरिंदरजीत सिंह ने कहा कि यदि मंत्री नरबीर सिंह अब सख़्ती और इच्छाशक्ति दिखाएं, तो गुरुग्राम को फिर से स्वस्थ और स्वच्छ बनाया जा सकता है।
“जनभागीदारी से ही गुरुग्राम की हवा, पानी और पर्यावरण का संरक्षण संभव है।”
विश्व मृदा दिवस पर संदेश
इंजीनियर गुरिंदरजीत सिंह ने कहा— “मृदा हमारी धरती की असली धरोहर है। यदि इसे बचाने में विफल रहे, तो आने वाली पीढ़ियों को भारी कठिनाई झेलनी पड़ेगी।”
उन्होंने लोगों से अधिक से अधिक पौधे लगाने, पॉलीथिन का बहिष्कार करने और जैविक खेती को बढ़ावा देने की अपील की।
“आइए, हम सब मिलकर मिट्टी को संजीवनी देने का काम करें और धरती को हरा-भरा बनाएं।”









