वानप्रस्थ में अंतरराष्ट्रीय महिला एवं बालिका विज्ञान दिवस मनाया गया

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें

“विज्ञान में महिलाओं को मिले समान अवसर” — डॉ. सुनीता श्योकंद

हिसार। वानप्रस्थ सीनियर सिटीजन क्लब हिसार में अंतरराष्ट्रीय महिला एवं बालिका विज्ञान दिवस उत्साहपूर्वक मनाया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विज्ञान, तकनीक, इंजीनियरिंग और गणित (STEM) के क्षेत्र में महिलाओं और बालिकाओं की भूमिका, चुनौतियों तथा संभावनाओं पर सार्थक चर्चा करना था।

मुख्य वक्ता डॉ. सुनीता श्योकंद ने बताया कि संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित यह दिवस हर वर्ष 11 फरवरी को मनाया जाता है, ताकि विज्ञान के क्षेत्र में महिलाओं और बालिकाओं की समान भागीदारी सुनिश्चित की जा सके। उन्होंने कहा कि विज्ञान और नवाचार के विकास में महिलाओं का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि विविध सोच और अनुभव नए समाधान और बेहतर परिणाम लेकर आते हैं।

डॉ. श्योकंद के अनुसार विश्व स्तर पर लगभग 33 प्रतिशत शोधकर्ता महिलाएँ हैं, जबकि भारत में STEM शिक्षा में लड़कियों की भागीदारी करीब 40 प्रतिशत तक पहुँच चुकी है, जो उत्साहजनक संकेत है। हालांकि कार्यस्थल पर टिके रहना और उच्च पदों तक पहुँचना अभी भी चुनौती बना हुआ है। भारत में STEM कार्यबल में महिलाओं की भागीदारी लगभग 14–30 प्रतिशत के बीच है, जबकि वैज्ञानिक पदों पर यह संख्या करीब 15 प्रतिशत है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे उभरते क्षेत्रों में महिलाओं की हिस्सेदारी लगभग 22–26 प्रतिशत बताई जाती है।

उन्होंने कहा कि महिलाओं की कम भागीदारी के पीछे सामाजिक बाधाएँ, लिंग आधारित रूढ़ियाँ, रोल मॉडल और मेंटर की कमी, परिवार और करियर के बीच संतुलन की चुनौती, कार्यस्थल पर भेदभाव तथा ग्रामीण क्षेत्रों में संसाधनों और डिजिटल सुविधाओं का अभाव जैसे कारण प्रमुख हैं।

डॉ. श्योकंद ने सरल शब्दों में समझाया कि भविष्य की अधिकांश नई नौकरियाँ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा साइंस, साइबर सुरक्षा, बायोटेक्नोलॉजी, अंतरिक्ष विज्ञान और हरित प्रौद्योगिकी जैसे STEM क्षेत्रों से जुड़ी होंगी। यदि महिलाएँ और लड़कियाँ इन क्षेत्रों में बराबरी से आगे बढ़ेंगी, तो न केवल उनका सशक्तिकरण होगा बल्कि देश की अर्थव्यवस्था और समाज भी मजबूत होंगे।

उन्होंने यह भी कहा कि महिलाएँ संवेदनशील, धैर्यवान और सूक्ष्म अवलोकन करने वाली होती हैं, जिससे अनुसंधान अधिक समावेशी और समाजोपयोगी बनता है। बालिकाओं को बचपन से ही विज्ञान शिक्षा के लिए प्रोत्साहित करना, सकारात्मक वातावरण उपलब्ध कराना और सफल महिला वैज्ञानिकों के उदाहरण प्रस्तुत करना बेहद आवश्यक है।

हिसार मंडल के पूर्व आयुक्त डॉ. युधवीर ख्यालिया ने कहा कि अवसर मिलने पर महिलाएँ उच्च पदों पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करती हैं। भौतिकी विभाग की एमेरिटस प्रोफेसर प्रो. स्नेह गोयल ने बताया कि फिजिक्स विभाग में छात्राओं की संख्या निरंतर बढ़ रही है, जबकि प्रो. डुडेजा ने माइक्रोबायोलॉजी में बढ़ती छात्राओं की भागीदारी पर प्रकाश डाला। डॉ. राज गर्ग ने एक प्रेरक कविता प्रस्तुत की, जिसमें एक बालिका के सपनों और ऊँची उड़ान की आकांक्षा को व्यक्त किया गया।

मंच संचालन करते हुए डॉ. संतोष ढिल्लों ने कहा कि अवसर मिलने पर महिलाएँ विज्ञान के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य कर रही हैं।

इस अवसर पर इंडियन सोसाइटी ऑफ ब्लड ट्रांसफ्यूजन एंड इम्यूनोहेमेटोलॉजी (ISBTI) के प्रधान डॉ. युद्धवीर ख्यालिया ने विज्ञान में महिलाओं की उल्लेखनीय भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि महिलाएँ केवल कार्यकर्ता ही नहीं, बल्कि नेतृत्वकर्ता, शोधकर्ता और मार्गदर्शक भी हैं। वे गवर्निंग बॉडी, राज्य शाखाओं और प्रयोगशालाओं में सक्रिय भूमिका निभाते हुए सुरक्षित रक्त सेवाओं, उन्नत शोध और शिक्षा में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं।

उन्होंने कहा, “जब महिलाएँ विज्ञान में आगे बढ़ती हैं, तो स्वास्थ्य सेवाएँ अधिक सुरक्षित, मजबूत और संवेदनशील बनती हैं।” कार्यक्रम के दौरान डॉ. ख्यालिया ने डॉ. सुनीता श्योकंद को शॉल भेंट कर सम्मानित किया।

चर्चा में भाग लेते हुए सदस्यों ने कहा कि भविष्य की समृद्धि के लिए महिलाओं और बालिकाओं को विज्ञान में समान भागीदारी प्रदान करना समय की आवश्यकता है।

Bharat Sarathi
Author: Bharat Sarathi

Leave a Comment

और पढ़ें