गुरुग्राम के निर्माण कार्यों में पारदर्शिता और गुणवत्ता की मांग तेज

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“हर साइट पर प्राक्कलन बोर्ड और सख्त क्वालिटी कंट्रोल सेल लागू हों” — इंजीनियर गुरिंदरजीत सिंह

“गुणवत्ता जांच के बिना विकास नहीं: गुरिंदरजीत सिंह ने उठाई क्वालिटी कंट्रोल सेल की मांग”

“टेंडर प्रक्रिया में भारी भ्रष्टाचार, कम रेट में गुणवत्तापूर्ण काम असंभव — गुरिंदरजीत सिंह”

“जनता का अधिकार छीनना बंद करें, विकास कार्यों में पारदर्शिता लाए प्रशासन — गुरिंदरजीत सिंह”

गुरुग्राम : गुरुग्राम के समाजसेवी इंजीनियर गुरिंदरजीत सिंह (अर्जुन नगर) ने शहर में चल रहे विकास एवं निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर गंभीर चिंताएं व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी जी से हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री जी की हालिया बैठक में कई सराहनीय निर्णय लिए गए हैं, पर वे तभी सफल होंगे जब उन्हें जमीनी स्तर पर सही तरीके से लागू किया जाए।

प्राक्कलन बोर्ड अनिवार्य — जनता का अधिकार

इंजीनियर गुरिंदरजीत सिंह ने कहा कि गुरुग्राम में अधिकांश निर्माण स्थलों पर प्राक्कलन बोर्ड (Project Display Board) तक नहीं लगाए जा रहे हैं, जबकि यह जनता का बुनियादी अधिकार है कि वह जाने:

काम कौन कर रहा है, किस विभाग के अंतर्गत हो रहा है, कितनी लागत में हो रहा है, और कब तक पूरा होना है

उन्होंने कहा कि जानकारी छिपाने की प्रवृत्ति से ही भ्रष्टाचार और निम्न गुणवत्ता वाले कार्य पनपते हैं।

“हर निर्माण स्थल पर प्राक्कलन बोर्ड लगना अनिवार्य किया जाए, अन्यथा पारदर्शिता संभव नहीं।”

गुणवत्ता की कमी से बार-बार टूटती सड़कें और मेनहोल

गुरिंदरजीत सिंह ने कहा कि गुरुग्राम में पिछले वर्षों में बनी कई सड़के कुछ ही महीनों में टूट गईं—चाहे सेक्टर-9 की सड़कें हों या न्यू कॉलोनी में मेयर ऑफिस के सामने की सड़क, SPR रोड का धसना, बसई रोड (जो पिछले साल कई बार धसी), मेनहोल के ढक्कन बार-बार टूट रहे हैं, जिससे दुर्घटनाएं बढ़ रही हैं।

उन्होंने कहा कि गुरुग्राम में कई कार्य चल रहे है, ऐसे में अगर वे सिर्फ उन्ही कार्यो की जाँच करवा ले जिनका शुभारम्भ गुरुग्राम के विधायक मुकेश शर्मा ने किया हो।

उन्होंने कहा: “कमज़ोर मटेरियल और बिना मॉनिटरिंग के काम करना ही भ्रष्टाचार है। जनता की जान जोखिम में डालकर किया गया ‘सस्ता काम’ विकास नहीं, विनाश है।”

क्वालिटी कंट्रोल सेल हो स्वतंत्र, सक्रिय और सख्त

उन्होंने मुख्यमंत्री जी से मांग की कि हर निर्माण परियोजना के लिए स्वतंत्र क्वालिटी कंट्रोल सेल बनाया जाए, जिसमें:

साइट पर लेबोरेटरी स्थापित हो, हर रोज़ आने वाली सामग्री का तुरंत परीक्षण हो, खराब गुणवत्ता की सामग्री वापस भेजी जाए, फिनिश्ड वर्क का साइट पर ही टेस्ट हो, जो काम मानकों पर खरा न उतरे, उसे तुरंत तुड़वाया जाए, कोई भी पेमेंट तभी हो, जब क्वालिटी कंट्रोल सेल उसे अप्रूव करे.

उन्होंने कहा कि “रैंडम सैंपलिंग” भ्रष्टाचार को बढ़ाती है। बिना मजबूत निगरानी के गुणवत्तापूर्ण विकास असंभव है।

टेंडर प्रक्रिया में भारी हेराफेरी — समस्या की जड़

गुरिंदरजीत सिंह ने कहा कि कई विभागों में टेंडर प्रक्रिया में ही भारी गड़बड़ियां होती हैं।
जहां विभाग का अनुमानित रेट 100 रुपये है, वहीं ठेकेदार 40–50% कम रेट पर टेंडर भर देते हैं। उन्होंने कहा: “इतने कम रेट में गुणवत्तापूर्ण काम संभव ही नहीं। यह या तो घटिया मटेरियल का संकेत है या फिर भ्रष्टाचार का।”

उन्होंने मांग की: जस्टिफाइड रेट से नीचे आने वाले टेंडर तुरंत कैंसल किए जाएं, ऐसे टेंडर वालों की अर्नेस्ट मनी जब्त की जाए,जनता का अधिकार और प्रशासन की जिम्मेदारी

उन्होंने कहा कि गुरुग्राम विशाल शहर है, विकास कार्य बड़े पैमाने पर चल रहे हैं, इसलिए अत्यधिक आवश्यक है कि:

हर निर्माण स्थल पर प्राक्कलन बोर्ड लगाए जाएं

क्वालिटी कंट्रोल को कड़ाई से लागू किया जाए

जनता को निगरानी का अधिकार दिया जाए

भ्रष्टाचार रोकने के लिए टेंडर प्रक्रिया पारदर्शी बनाई जाए

मुख्यमंत्री से सीधी अपील

इंजीनियर गुरिंदरजीत सिंह ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी जी से विनम्र आग्रह किया:

“आप स्वयं गुरुग्राम कष्ट निवारण समिति के अध्यक्ष हैं। यदि कार्यों की गुणवत्ता खराब होगी तो सीधी चोट आपकी साख पर लगेगी। इसलिए गुरुग्राम में शुरू हुए हर विकास कार्य की निगरानी, परीक्षण और पारदर्शिता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।”

उन्होंने कहा: “जनता को जानकारी देना, गुणवत्ता सुनिश्चित करना और भ्रष्टाचार रोकना प्रशासन की जिम्मेदारी है। गुरुग्राम के विकास को पारदर्शी और मजबूत बनाना समय की मांग है।”

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Author: Bharat Sarathi

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