पंचकूला, 21 मार्च 2025: हरियाणा के शिक्षा विभाग ने राज्यभर में बिना मान्यता और अनुमति के संचालित हो रहे 282 विद्यालयों पर कड़ा रुख अपनाया है। निदेशक माध्यमिक शिक्षा हरियाणा, पंचकूला द्वारा जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि इन स्कूलों को आगामी शैक्षणिक सत्र 2024-25 से बंद किया जाएगा और विद्यार्थियों को इन संस्थानों में प्रवेश नहीं देने के निर्देश जारी किए गए हैं।

गंभीर स्थिति और न्यायालय का हस्तक्षेप

हरियाणा स्कूल शिक्षा नियम, 2003 के उल्लंघन के मामलों को लेकर हाईकोर्ट में दायर जनहित याचिका (PIL) में इन अनधिकृत स्कूलों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की गई थी। उच्च न्यायालय ने सरकार को निर्देश दिया कि वह ऐसे अवैध स्कूलों पर सख्त कदम उठाए और यह सुनिश्चित करे कि कोई भी गैर-मान्यता प्राप्त स्कूल शिक्षा प्रदान न करे।

सरकार और शिक्षा विभाग की भूमिका

शिक्षा विभाग ने पहले भी सभी जिला शिक्षा अधिकारियों से इन स्कूलों की सूची मांगी थी और यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे कि अभिभावकों को इनके बारे में जागरूक किया जाए। स्थानीय समाचार पत्रों में इन विद्यालयों की सूची प्रकाशित करने की बात भी कही गई थी ताकि अभिभावक अपने बच्चों का नामांकन ऐसी संस्थाओं में न कराएं। लेकिन अभी तक कई जिलों से इस संबंध में अनुपालन रिपोर्ट प्राप्त नहीं हुई है, जिससे सरकार की निष्क्रियता और लचर प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।

शिक्षा माफिया और छात्रों का भविष्य

हरियाणा में निजी शिक्षा क्षेत्र में अनधिकृत स्कूलों की भरमार से शिक्षा माफिया के बढ़ते प्रभाव का संकेत मिलता है। ऐसे स्कूल बिना आवश्यक बुनियादी सुविधाओं, योग्य शिक्षकों और सरकारी मान्यता के ही चल रहे हैं, जिससे विद्यार्थियों की शिक्षा का स्तर प्रभावित होता है। इन स्कूलों से निकले बच्चों को भविष्य में उच्च शिक्षा और नौकरी के अवसरों में कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है, क्योंकि बिना मान्यता प्राप्त स्कूलों की डिग्री कई संस्थानों द्वारा अमान्य कर दी जाती है।

प्रशासनिक लापरवाही या मिलीभगत?

यह सवाल भी उठता है कि जब ये 282 स्कूल बिना अनुमति के चल रहे थे, तो शिक्षा विभाग अब तक क्या कर रहा था? क्या यह प्रशासनिक लापरवाही का मामला है, या फिर शिक्षा माफिया और कुछ अधिकारियों के बीच मिलीभगत का नतीजा? सरकार के सख्त आदेशों के बावजूद कई जिलों से अनुपालन रिपोर्ट न आना बताता है कि इस मुद्दे को गंभीरता से नहीं लिया गया है।

समाधान और आगे की राह

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस समस्या का समाधान केवल स्कूल बंद करने से नहीं होगा, बल्कि सरकार को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि सभी बच्चों को मान्यता प्राप्त और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले।

  1. स्कूलों का पुनर्निर्माण: जरूरतमंद क्षेत्रों में नए सरकारी विद्यालय खोले जाएं।
  2. सख्त कार्रवाई: ऐसे स्कूलों के संचालकों पर कानूनी कार्रवाई हो और भारी जुर्माना लगाया जाए।
  3. अभिभावकों में जागरूकता: सरकारी स्तर पर अभियान चलाकर अभिभावकों को इस विषय में जानकारी दी जाए।

निष्कर्ष

हरियाणा में अनधिकृत स्कूलों के खिलाफ उठाए गए कदम सही दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास हैं, लेकिन यह सुनिश्चित करना होगा कि यह सिर्फ एक कागजी कार्रवाई न बनकर रह जाए। सरकारी आदेशों के बावजूद अगर अधिकारी उचित कार्रवाई नहीं कर रहे हैं, तो जवाबदेही तय की जानी चाहिए। शिक्षा बच्चों का मौलिक अधिकार है, और इसकी गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं होना चाहिए।

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