जीएमडीए कार्यालय में उच्चस्तरीय बैठक आयोजित
जीएमडीए सीईओ पी.सी. मीणा की अध्यक्षता में एचएसवीपी, एचएसआईआईडीसी और एमसीजी क्षेत्र में पर ढांचे की कमी दूर करने तथा सेक्टर 1 से 57 तक बढ़ती मांग पर चर्चा

गुरुग्राम, 12 फरवरी- गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण (जीएमडीए) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी पी.सी. मीणा की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में गुरुग्राम में तेजी से विकसित हो रही नई ग्रुप हाउसिंग सोसायटियों, बड़े अस्पतालों, व्यावसायिक स्थलों और सीएलयू साइटों को पानी, सीवरेज और स्टॉर्म वॉटर ड्रेनेज कनेक्शन उपलब्ध कराने से जुड़ी चुनौतियों पर विस्तृत चर्चा हुई। सेक्टर-44 स्थित जीएमडीए कार्यालय में आयोजित इस बैठक में विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने भाग लिया।
नई ग्रुप हाउसिंग और कमर्शियल प्रोजेक्ट्स से इंफ्रास्ट्रक्चर पर बढ़ा दबाव
बैठक में बताया गया कि हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी) द्वारा गुरुग्राम के विभिन्न क्षेत्रों में ग्रुप हाउसिंग परियोजनाओं के लिए भूमि आवंटित की गई। इनमें से कई साइटें मूल सेक्टर प्लान का हिस्सा नहीं थीं। एचएसवीपी द्वारा विकसित और बाद में नगर निगम गुरुग्राम को हस्तांतरित किया गया मौजूदा बुनियादी ढांचा इन नई परियोजनाओं की अतिरिक्त जल एवं सीवर मांग को पूरा करने में सक्षम नहीं है। इससे सेक्टर 1 से 57 तक जल आपूर्ति और सीवरेज नेटवर्क पर अतिरिक्त दबाव बढ़ रहा है। इसके अलावा, कई छोटे प्लॉटेड पॉकेट्स भी एचएसवीपी द्वारा विकसित किए जा रहे हैं, लेकिन वहां जल आपूर्ति के लिए बूस्टिंग स्टेशन प्रस्तावित नहीं किए गए। कुछ स्थानों पर मास्टर लाइन से सीधे अनधिकृत कनेक्शन लिए जाने के मामले भी सामने आए हैं, जो भविष्य में तकनीकी और कानूनी समस्याएं उत्पन्न कर सकते हैं।
एचएसवीपी द्वारा बड़े अस्पतालों और व्यावसायिक भूखंडों का आवंटन किया गया, परंतु इन परियोजनाओं के लिए आवश्यक जल, सीवर और ड्रेनेज इंफ्रास्ट्रक्चर की पूर्व योजना नहीं बनाई गई। ऐसे में नए विकसित क्षेत्रों में मूलभूत सेवाएं उपलब्ध कराना चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है। इसके अतिरिक्त, कई स्थानों पर कमर्शियल एससीओ साइटें आवंटित हैं, पर उन क्षेत्रों के लिए अग्रिम जल आपूर्ति योजना नहीं बनाई गई। उदाहरणस्वरूप, सेक्टर-65 जैसे क्षेत्रों में भविष्य में गंभीर जल दबाव की स्थिति बन सकती है।
एचएसआईआईडीसी की साइटों पर भी बुनियादी सुविधाओं की कमी
बैठक में यह भी चर्चा हुई कि हरियाणा राज्य औद्योगिक एवं अवसंरचना विकास निगम (एचएसआईआईडीसी) द्वारा आवंटित व्यावसायिक साइटों पर भी पानी, सीवरेज और स्टॉर्म वॉटर ड्रेनेज का पर्याप्त इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित नहीं किया गया है। परिणामस्वरूप बाद में सेवाएं उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी जीएमडीए और नगर निगम पर आ जाती हैं, जबकि मूल ढांचा पहले से तैयार नहीं होता।
जीएमडीए अधिकारियों ने कहा कि यदि नई परियोजनाओं को बिना समुचित बुनियादी ढांचा योजना के स्वीकृति मिलती रही, तो भविष्य में जल संकट, सीवर ओवरफ्लो और जलभराव जैसी समस्याएं गंभीर रूप ले सकती हैं। बैठक में विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने, पूर्व स्वीकृति प्रणाली को मजबूत करने तथा इंफ्रास्ट्रक्चर प्लानिंग को परियोजना स्वीकृति से अनिवार्य रूप से जोड़ने पर भी विचार किया गया।
गुरुग्राम के तेजी से बढ़ते शहरी विस्तार को देखते हुए आधारभूत सेवाओं की दीर्घकालिक और समेकित योजना तैयार करने की आवश्यकता पर बल दिया गया।
बैठक में बल्क कनेक्शन की गाइडलाइंस तैयार करने के लिए एक कमेटी का गठन किया गया, जिसमें जीएमडीए, एचएसआईआईडीसी, एचएसवीपी और एमसीजी के अधिकारी होंगे। यह कमेटी एक सप्ताह में ड्राफ्ट तैयार करेगी। ड्राफ्ट में मास्टर लाइन से दूरी, कनेक्शन का साइज और मात्रा को शामिल किया जाएगा।
जीएमडीए सीईओ पी.सी. मीणा ने कहा कि नई विकास परियोजनाओं को बुनियादी सेवाओं से जोड़ने से पहले इंफ्रास्ट्रक्चर क्षमता का वैज्ञानिक आकलन अनिवार्य किया जाएगा। सभी संबंधित एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित कर चरणबद्ध योजना तैयार की जाएगी, ताकि भविष्य में नागरिकों को जल और सीवरेज जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए परेशानी न झेलनी पड़े।
बैठक में निगमायुक्त प्रदीप दहिया, एचएसवीपी प्रशासक वैशाली सिंह, एडिशनल सीईओ विश्वजीत, जीएमडीए चीफ इंजीनियर आर एस जांगडा, एमसीजी चीफ इंजीनियर विजय ढाका सहित अन्य अधिकारीगण उपस्थित थे।








