डोनाल्ड ट्रंप ने रूस-यूक्रेन युद्ध का ठीकरा यूक्रेन पर फोड़कर अपनी बदली रणनीति का संकेत दिया?

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यूक्रेन युद्ध पर यूरोपीय संघ के आपातकालीन शिखर सम्मेलन में ट्रंप की अनदेखी – ट्रंप के शांति प्रयास से यूरोपीय संघ अलग-थलग पड़ा?

रूस-यूक्रेन पीस टॉक-अपने ही देश में जंग पर चर्चा से बाहर है यूक्रेन!-पूरे विश्व की निगाहें ट्रंप- पुतिन की संभावित बैठक पर लगी हुई हैँ

-एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र

रूस-यूक्रेन पीस टॉक – अपने ही देश में जंग पर चर्चा से बाहर है यूक्रेन! पूरे विश्व की निगाहें ट्रंप-पुतिन की संभावित बैठक पर लगी हुई हैं।

अमेरिका की बदली रणनीति और ट्रंप का नया रुख

वैश्विक राजनीति में अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के दौरान उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रंप ने अपने चुनावी अभियानों में कई वादे किए थे, जिन्हें वे क्रमवार पूरा कर रहे हैं। इनमें व्यापार शुल्क बढ़ाना, अवैध अप्रवासियों को निष्कासित करना और “अमेरिका फर्स्ट” नीति को प्राथमिकता देना शामिल था। अब उनका ध्यान रूस-यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने पर केंद्रित हो गया है। हालांकि, यह अप्रत्याशित था कि इस शांति प्रक्रिया में यूक्रेन को ही बाहर कर दिया जाएगा।

हाल ही में सऊदी अरब के रियाद में हुई बैठक में तीन प्रमुख मुद्दों पर सहमति बनी:

  1. रूस और यूक्रेन के बीच शांति वार्ता के लिए दोनों देश टीम बनाएंगे।
  2. अमेरिका ने युद्ध को स्थायी रूप से समाप्त करने का लक्ष्य रखा।
  3. अमेरिका ने कहा कि शांति बहाली में यूक्रेन और यूरोप को भी किसी न किसी रूप में शामिल किया जाएगा।
    हालांकि, इन बैठकों में यूक्रेन और यूरोप की भागीदारी नहीं दिखी, जिससे संकेत मिलता है कि ट्रंप यूरोपीय संघ और यूक्रेन को नजरअंदाज कर अपने अलग रणनीतिक मार्ग पर चल रहे हैं। इस बीच, सभी की नजरें ट्रंप-पुतिन की संभावित बैठक पर टिकी हुई हैं।
    ट्रंप की रणनीति में बदलाव

ट्रंप के सत्ता में आने के बाद अमेरिका की नीति रूस-यूक्रेन युद्ध के प्रति बदलती नजर आ रही है। हाल ही में उन्होंने यह कहकर चौंका दिया कि इस युद्ध के लिए कीव जिम्मेदार है। अब तक जो बाइडेन प्रशासन रूस को इस युद्ध का दोषी मानता आया था और यूक्रेन का समर्थन करता था। लेकिन ट्रंप का यह बयान यूक्रेन की स्थिति को कमजोर कर सकता है।

रूस-यूक्रेन युद्ध फरवरी 2022 से जारी है और अब यह अपने चौथे वर्ष में प्रवेश करने वाला है। इस बीच, अमेरिका के विशेष दूत ने कीव जाकर राष्ट्रपति जेलेंस्की और सैन्य कमांडरों से चर्चा की। हालांकि, रूस को अलग-थलग करने की अमेरिकी नीति में बदलाव दिखने लगा है। सऊदी अरब में अमेरिका और रूस के शीर्ष राजनयिकों के बीच हुई वार्ता में यूक्रेन और यूरोपीय देशों को दरकिनार कर दिया गया था।

पुतिन-ट्रंप की संभावित बैठक पर दुनिया की नजरें
रूस और अमेरिका के बीच हुई वार्ता को लेकर पुतिन ने कहा कि रूस कभी भी यूरोप या यूक्रेन से बात करने से नहीं कतराया, बल्कि यूक्रेन ही अब तक रूस से बात करने से इनकार करता रहा है।ट्रंप ने भी इस मुद्दे पर जेलेंस्की की आलोचना की और कहा कि यूक्रेन को कभी युद्ध शुरू करना ही नहीं चाहिए था। उनके अनुसार, जेलेंस्की के पास युद्ध रोकने के लिए पर्याप्त समय था, लेकिन उन्होंने इसे व्यर्थ जाने दिया। ट्रंप ने जेलेंस्की की अप्रूवल रेटिंग पर भी सवाल उठाए, जबकि जेलेंस्की ने इस दावे को खारिज कर दिया।

यूरोपीय संघ की प्रतिक्रिया
ट्रंप की बदली रणनीति ने यूरोपीय नेताओं को चिंतित कर दिया है। फ्रांस के राष्ट्रपति ने यूक्रेन युद्ध को लेकर यूरोपीय नेताओं के साथ आपात बैठक की, जिसमें 15 से अधिक देश शामिल हुए। हालांकि, यूरोप के बड़े देशों में इस मुद्दे पर एकमत नहीं बन पाया। ब्रिटेन और फ्रांस ने सुरक्षा गारंटी पर जोर दिया, जबकि जर्मनी ने शांति सैनिक भेजने के सुझाव को खारिज कर दिया।

निष्कर्ष
डोनाल्ड ट्रंप की बदली रणनीति रूस-यूक्रेन युद्ध के भविष्य को प्रभावित कर सकती है। उन्होंने युद्ध का दोष यूक्रेन पर डालकर अपनी प्राथमिकताओं को स्पष्ट कर दिया है। यूरोपीय संघ इस घटनाक्रम से खुद को अलग-थलग महसूस कर रहा है, जबकि दुनिया की निगाहें अब ट्रंप और पुतिन की संभावित बैठक पर टिकी हैं।

-संकलनकर्ता लेखक – क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यमा सीए(एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र

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Author: Bharat Sarathi

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