प्रदूषण नियंत्रण, कचरा प्रबंधन व पर्यावरणीय नियमों के क्रियान्वयन पर सख्त निर्देश
डस्ट पोर्टल पर अपंजीकृत साइट्स पर प्राथमिकता से चालान, पंजीकृत साइट्स पर नियमों की सख्त निगरानी के निर्देश
राव नरबीर सिंह ने यमुना एक्शन प्लान के तहत अनट्रीटेड पानी के स्रोतों की पहचान कर जिम्मेदारों पर सख्त कार्रवाई के दिए निर्देश
प्रदेश में 133 एमएलडी क्षमता के 6 एसटीपी निर्माणाधीन, 2027 तक होंगे पूर्ण, यमुना कैचमेंट में 288.5 एमएलडी क्षमता के 7 एसटीपी का अपग्रेडेशन, प्रदूषण नियंत्रण को मिलेगी मजबूती
राव ने कहा, 2027 तक नालों के बीओडी स्तर घटाने का लक्ष्य, उद्योगों पर सख्त रखे निगरानी
सिंगल यूज प्लास्टिक पर कार्रवाई में बड़े स्टॉकिस्टों को करें टारगेट, छोटे दुकानदारों पर न हो फोकस : राव नरबीर सिंह

गुरुग्राम, 1 मई। हरियाणा के पर्यावरण मंत्री राव नरबीर सिंह ने गुरुग्राम स्थित पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस में आयोजित समीक्षा बैठक में प्रदेश में वायु व जल प्रदूषण नियंत्रण, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, सीएंडडी वेस्ट मैनेजमेंट, सिंगल यूज प्लास्टिक पर प्रतिबंध, सीईटीपी/ईटीपी की स्थिति, हरित क्षेत्र विकास तथा विभिन्न पर्यावरणीय नियमों के प्रभावी क्रियान्वयन से जुड़े एजेंडा बिंदुओं की विस्तृत समीक्षा की।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रदूषण नियंत्रण से संबंधित योजनाओं को समयबद्ध तरीके से लागू करते हुए आमजन को स्वच्छ वातावरण उपलब्ध कराना सुनिश्चित किया जाए। बैठक में पर्यावरण विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव (एसीएस) सुधीर राजपाल, हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड(पीसीबी) के चेयरमैन जे.गणेशन, सदस्य सचिव योगेश कुमार सहित विभाग के अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
पर्यावरण मंत्री राव नरबीर सिंह ने एजेंडा बिंदुओं की समीक्षा करते हुए कहा कि 500 वर्ग गज से अधिक क्षेत्रफल वाली जिन साइट्स पर निर्माण कार्य चल रहा है और जिन्होंने डस्ट पोर्टल पर पंजीकरण नहीं कराया है, उनके खिलाफ प्राथमिकता के आधार पर चालान किया जाए। इसके साथ ही उन्होंने निर्देश दिए कि जो साइट्स पंजीकृत हैं लेकिन निर्धारित नियमों का पालन नहीं कर रहीं, उनके विरुद्ध भी सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
बैठक में एसीएस सुधीर राजपाल ने कहा कि गुरुग्राम में संचालित करीब 400 निर्माण साइट्स पर अगले 15 दिनों के भीतर अनिवार्य रूप से कवरिंग सुनिश्चित की जाए, अन्यथा संबंधित के खिलाफ चालान की प्रक्रिया अपनाई जाएगी। उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि प्रत्येक साइट पर प्रभावी बैरिकेडिंग हो, ताकि शहर में धूल प्रदूषण पर नियंत्रण के साथ गुरुग्राम एक मॉडल शहर के रूप में नजर आए।
वायु गुणवत्ता सुधार को लेकर हरियाणा में व्यापक कदम, मॉनिटरिंग सिस्टम हुआ मजबूत
पीसीबी के सदस्य सचिव योगेश कुमार ने बताया कि हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा वायु गुणवत्ता प्रबंधन को सुदृढ़ करने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में 29 कंटीन्यूअस एम्बिएंट एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग स्टेशन स्थापित किए जा चुके हैं, जबकि एनसीआर क्षेत्र में 23 नए स्टेशन स्थापित किए जा रहे हैं। इसके अलावा 46 मैनुअल मॉनिटरिंग स्टेशन भी संचालित हैं और 4 अत्याधुनिक सैंपल टेस्टिंग लैब कार्यरत हैं।
उन्होंने जानकारी दी कि राज्य में 4 सोर्स अपॉर्शनमेंट स्टडी भी जारी हैं, जबकि धूल प्रदूषण नियंत्रण के लिए 22 डस्ट कंट्रोल एंड मैनेजमेंट सेल गठित किए गए हैं। औद्योगिक क्षेत्रों में प्रदूषण की निगरानी के लिए 521 उद्योगों में कंटीन्यूअस एमिशन मॉनिटरिंग सिस्टम (एसईएमएस) स्थापित किए जा चुके हैं तथा 3 सेक्टरों में 875 अतिरिक्त उद्योगों को भी इसे लगाने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं, कंस्ट्रक्शन साइट्स की निगरानी के लिए 3866 साइट्स को डस्ट पोर्टल पर पंजीकृत किया गया है, जिससे रियल-टाइम मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जा रही है।
सड़क धूल प्रदूषण नियंत्रण को लेकर सख्त कदम, मैकेनाइज्ड सफाई और स्प्रिंकलिंग पर जोर
बैठक में पीसीबी के अधिकारियों ने बताया सड़क धूल प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए राज्य सरकार द्वारा व्यापक स्तर पर कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि एनसीआर के नगर निगमों में मैकेनाइज्ड रोड स्वीपिंग को बढ़ावा दिया जा रहा है, जहां वर्तमान में 56 मशीनें कार्यरत हैं और इस वर्ष 91 नई मशीनें खरीदने की योजना है। इसके अलावा 60 एंटी-स्मॉग गन तथा 160 वाटर स्प्रिंकलर का उपयोग नियमित रूप से किया जा रहा है, जिससे धूल को नियंत्रित किया जा सके। उन्होंने बताया कि राज्य ने सीआरआरआई के साथ रैम्स स्थापित करने के लिए समझौता भी किया है। साथ ही सिटी एक्शन प्लान के तहत डस्ट-फ्री सड़कों का विकास किया जा रहा है, जिसके अंतर्गत एनसीआर क्षेत्र में 1203 किलोमीटर सड़कों की पहचान की गई है, जिनमें से 119 किलोमीटर सड़कों का पुनर्विकास वर्ष 2026 की पहली तिमाही में किया जा चुका है।
यमुना एक्शन प्लान के तहत जल प्रदूषण नियंत्रण व बीओडी सुधार के लिए प्रभावी कदम
पीसीबी अधिकारियों ने बताया कि हरियाणा से यमुना में जाने वाले नालों के माध्यम से लगभग 682 एमएलडी अपशिष्ट जल छोड़ा जाता है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि इसमें से 128.6 एमएलडी अपशिष्ट जल दिल्ली क्षेत्र से हरियाणा में प्रवेश करता है और उसके बाद यमुना में जाता है। इस प्रकार हरियाणा का कुल डिस्चार्ज लगभग 553.4 एमएलडी रहता है। इसके अतिरिक्त, दिल्ली के अलीपुर ड्रेन के माध्यम से फरीदाबाद क्षेत्र में सीधे यमुना नदी में करीब 83 एमएलडी अपशिष्ट जल भी छोड़ा जाता है, जो प्रदूषण का एक महत्वपूर्ण कारण है। कैबिनेट मंत्री ने निर्देश दिए कि पीसीबी अधिकारी ऐसे सभी बिंदुओं की पहचान करें, जहां से बिना उपचारित (अनट्रीटेड) पानी नालों या यमुना में गिर रहा है, ताकि जिम्मेदार व्यक्तियों/संस्थाओं के खिलाफ नियमों के अनुसार सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।
प्रदेश में 133 एमएलडी क्षमता के 6 एसटीपी निर्माणाधीन, 2027 तक होंगे पूर्ण
योगेश कुमार ने बैठक में बताया कि प्रदेश में सीवरेज प्रबंधन को सुदृढ़ करने के लिए कुल 133 एमएलडी क्षमता के 6 एसटीपी स्थापित किए जा रहे हैं, जिन्हें मार्च 2027 तक पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने जानकारी दी कि बजघेड़ा में 2 एमएलडी क्षमता का एसटीपी 85 प्रतिशत तक पूरा हो चुका है और इसे जून 2026 तक पूरा किया जाएगा। इसी प्रकार सोनीपत के खेवड़ा में 3 एमएलडी क्षमता का कार्य 45 प्रतिशत प्रगति पर है, जबकि यमुनानगर के रादौर रोड पर 77 एमएलडी का प्रमुख प्रोजेक्ट 30 प्रतिशत प्रगति के साथ मार्च 2027 तक पूर्ण होगा। पानीपत के मतलौदा में 3 एमएलडी का कार्य 95 प्रतिशत पूरा हो चुका है, वहीं डडलाना में 3 एमएलडी का प्रोजेक्ट 55 प्रतिशत प्रगति पर है। इसके अलावा फरीदाबाद के बादशाहपुर में 45 एमएलडी क्षमता का एसटीपी निर्माणाधीन है, जिसकी वर्तमान प्रगति 15 प्रतिशत है। उन्होंने कहा कि इन परियोजनाओं के पूर्ण होने से प्रदेश में सीवरेज शोधन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
यमुना कैचमेंट में 288.5 एमएलडी क्षमता के 7 एसटीपी का अपग्रेडेशन, प्रदूषण नियंत्रण को मिलेगी मजबूती
वहीं यमुना कैचमेंट क्षेत्र में मौजूदा सीवरेज ढांचे को और सुदृढ़ करने के लिए 288.5 एमएलडी क्षमता के 7 एसटीपी का अपग्रेडेशन किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि गोहाना में 3 एमएलडी, सोनीपत के सोनारिया में 40 एमएलडी, बहादुरगढ़ के लाइन पार क्षेत्र में 18 एमएलडी तथा हथीन में 4.5 एमएलडी क्षमता के एसटीपी को निर्धारित समयसीमा के अनुसार वर्ष 2026-27 तक अपग्रेड किया जाएगा। इसके अलावा हसनपुर में 3 एमएलडी क्षमता का एसटीपी दिसंबर 2026 तक, जबकि गुरुग्राम के धनवापुर में 100 एमएलडी और बेहरामपुर में 120 एमएलडी क्षमता के एसटीपी अगस्त 2027 तक अपग्रेड किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि इन अपग्रेडेशन कार्यों से सीवरेज ट्रीटमेंट की क्षमता और गुणवत्ता दोनों में सुधार होगा, जिससे यमुना में गिरने वाले प्रदूषण को प्रभावी रूप से कम किया जा सकेगा। इसके अतिरिक्त प्रदेश के विभिन्न स्थानों पर एक हजार करोड़ की लागत से 11 स्थानों पर 425 एमएलडी क्षमता एसटीपी भी प्रस्तावित है।
2027 तक नालों के बीओडी स्तर घटाने का लक्ष्य, उद्योगों पर सख्त निगरानी के निर्देश
कैबिनेट मंत्री राव नरबीर सिंह ने कहा कि हरियाणा सरकार ने 31 दिसंबर 2027 तक नालों के बीओडी स्तर को 10 एमजी/से कम करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि उद्योगों द्वारा बाईपास या टैंकरों के माध्यम से अपशिष्ट निस्तारण पर रोक लगाने के लिए सरप्राइज निरीक्षण टीमें गठित कर सख्त निगरानी रखी जाए। इसके साथ ही उन्होंने ईटीपी, सीईटीपी और एसटीपी पर रियल टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम (ओएमडी) को और मजबूत करने के निर्देश दिए, ताकि प्रदूषण नियंत्रण के प्रयासों को प्रभावी ढंग से लागू किया जा सके।
सिंगल यूज प्लास्टिक पर कार्रवाई में बड़े स्टॉकिस्टों को करें टारगेट, छोटे दुकानदारों पर न हो फोकस : राव नरबीर सिंह
कैबिनेट मंत्री राव नरबीर सिंह ने सिंगल यूज प्लास्टिक पर प्रतिबंध को लेकर राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा की जा रही कार्रवाई पर नाराजगी जताते हुए कहा कि छोटे रिटेल दुकानदारों पर फोकस करने की बजाय मुख्य स्टॉकिस्टों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि बाजार में इसकी उपलब्धता पर प्रभावी रोक लगाई जा सके। बैठक में पीसीबी अधिकारियों ने 15 दिसंबर 2025 से 15 अप्रैल 2026 के बीच चलाए गए विशेष चालान अभियान की जानकारी देते हुए बताया कि इस अवधि में लगभग 6863 चालान किए गए, जिनमें 60,86,750 रुपये का जुर्माना लगाया गया तथा करीब 5800 किलोग्राम प्लास्टिक जब्त कर नष्ट कराया गया।
बंधवाड़ी लैंडफिल, आरएमसी प्लांट्स व बूचड़खानों पर सख्ती के निर्देश, सिटी एक्शन प्लान की भी समीक्षा
कैबिनेट मंत्री राव नरबीर सिंह ने बैठक में बंधवाड़ी लैंडफिल साइट पर लिगेसी वेस्ट के निस्तारण, आरएमसी प्लांट्स के विरुद्ध आवश्यक कार्रवाई तथा बूचड़खानों में पर्यावरण मानकों की पालना को लेकर विस्तृत समीक्षा की और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। इसके साथ ही गुरुग्राम के एनुअल सिटी लेवल एक्शन प्लान की भी समीक्षा की गई। उन्होंने कहा कि लिगेसी वेस्ट के वैज्ञानिक निपटान में तेजी लाई जाए, नियमों का उल्लंघन करने वाले आरएमसी प्लांट्स के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए तथा बूचड़खानों में पर्यावरणीय मानकों का कड़ाई से पालन कराया जाए, ताकि प्रदूषण पर प्रभावी नियंत्रण किया जा सके।








