विश्व मजदूर दिवस पर मोदी सरकार ने मजदूर, विद्यार्थी, गृहिणी और स्वरोजगार कर रहे युवाओं की रसोई पर चलाया महंगाई का चाबुक
₹993 महंगा हुआ कमर्शियल गैस सिलेंडर, छोटू सिलेंडर भी पहुंचा आम आदमी की पहुंच से बाहर
चंडीगढ़, 1 मई। हरियाणा प्रदेश महिला कांग्रेस अध्यक्ष पर्ल चौधरी ने विश्व मजदूर दिवस पर केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार को घेरते हुए कहा कि भाजपा सरकार संसद में महिला सशक्तिकरण, युवा सशक्तिकरण और गरीब कल्याण की लंबी-लंबी बातें करती है, लेकिन सड़कों पर उसी जनता जनार्दन के खिलाफ महंगाई सशक्तिकरण का अभियान चला रही है। चुनावी मंचों से राहत के वादे करने वाली मोदी सरकार ने चुनावी शोर थमते ही देश की जनता की जेब पर सीधा हमला बोल दिया है।
उन्होंने कहा कि 29 अप्रैल को पांच राज्यों के चुनाव प्रचार खत्म होते ही भाजपा सरकार ने 1 मई, विश्व मजदूर दिवस के दिन देश को महंगाई का तोहफा दिया। 19 किलो के कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमत में ₹993 की अप्रत्याशित बढ़ोतरी कर दी गई, जो लगभग 47 प्रतिशत की सीधी मार है।
“यह गैस नहीं, गरीब की रसोई पर हमला है”
पर्ल चौधरी ने कहा कि कमर्शियल गैस सिलेंडर की यह बेतहाशा बढ़ोतरी केवल एक मूल्य संशोधन नहीं, बल्कि मजदूर की रोटी, रेहड़ी वाले की आजीविका, छोटे दुकानदार के धंधे और स्वरोजगार कर रहे युवाओं की उम्मीदों पर सीधा हमला है। चाय स्टॉल, ढाबे, कैंटीन, टिफिन सेंटर, बेकरी, फास्ट फूड, मिठाई की दुकानें और छोटे खानपान व्यवसाय अब भारी लागत के बोझ तले दब जाएंगे।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने कभी बेरोजगार युवाओं को पकौड़े बेचने का रास्ता दिखाया था, लेकिन आज वही पकौड़े तलने वाले युवा पर भाजपा सरकार ने ₹993 का आर्थिक ताला जड़ दिया है।
“छोटू सिलेंडर के नाम पर गरीब से छल”
पर्ल चौधरी ने कहा कि पिछले महीने गैस संकट के समय केंद्र सरकार ने बड़े प्रचार के साथ 5 किलो का तथाकथित “छोटू सिलेंडर” बाजार में उतारा था। इसे मजदूर वर्ग और हॉस्टल में रहने वाले विद्यार्थियों के लिए राहत पैकेज बताया गया था। लेकिन कुछ ही दिनों में उसी सिलेंडर की रिफिल की कीमत लगभग ₹850 तक पहुंचा देना साबित करता है कि भाजपा सरकार विद्यार्थियों को, गरीब को राहत नहीं, सिर्फ विज्ञापन देती है।
उन्होंने कहा कि आज 14 किलो घरेलू सिलेंडर ₹913 के आसपास और 5 किलो छोटू सिलेंडर ₹850 के करीब, यह अंतर बताता है कि सरकार सुविधा नहीं बेच रही, मजदूर को मजबूरी बेच रही है।
“विद्यार्थियों के सपनों पर भी महंगाई का बोझ”
उन्होंने कहा कि लाखों छात्र-छात्राएं गांवों से शहरों में पढ़ने आते हैं, किराए के कमरों और हॉस्टलों में रहकर सीमित पैसों में अपना भविष्य बनाना चाहते हैं। फीस, किताब, किराया, इंटरनेट, परिवहन और भोजन के बीच किसी तरह बजट संभालने वाले इन विद्यार्थियों के लिए ‘छोटू सिलेंडर” राहत का माध्यम होना चाहिए था, लेकिन भाजपा सरकार ने उसे भी महंगाई की भट्ठी में झोंक दिया।
पर्ल चौधरी ने सवाल किया कि क्या मोदी सरकार चाहती है कि देश का युवा पढ़ाई करे या सिर्फ महंगाई का हिसाब लगाता रहे?
“महिलाओं की रसोई को बनाया महंगाई का रणक्षेत्र”
पर्ल चौधरी ने कहा कि संसद में महिला सम्मान, नारी शक्ति वंदन और महिला आरक्षण के भाषण देने वाली भाजपा सरकार को यह समझना चाहिए कि महंगाई की सबसे पहली और सबसे गहरी चोट महिलाओं की रसोई पर पड़ती है। घर चलाने वाली महिला को हर महीने गैस, राशन, सब्जी, दूध, बच्चों की पढ़ाई और दवाइयों के बीच संतुलन बनाना पड़ता है। ऐसे में गैस की यह आग सीधे घर की थाली में लगाई गई आग है।
उन्होंने कहा कि भाजपा संसद में महिला सशक्तिकरण का बिल दिखाती है और सड़कों पर महिलाओं को महंगाई के बिल थमाती है।
“चुनाव तक मछली और मिठास, चुनाव बाद महंगाई का ज़हर”
पर्ल चौधरी ने आरोप लगाया कि भाजपा की राजनीति अब एक तय पैटर्न पर चलती है, चुनाव तक वादों का शहद, चुनाव खत्म होते ही महंगाई का जहर। विश्व मजदूर दिवस पर मजदूरों को सम्मान, बोनस या राहत देने के बजाय भाजपा सरकार ने महंगाई का दंड देकर साबित कर दिया कि उसे गरीब के श्रम का नहीं, सिर्फ वोट का मूल्य पता है।
पर्ल चौधरी ने कहा है कि “मोदी सरकार संसद में महिला सशक्तिकरण का नारा देती है, सड़कों पर महंगाई सशक्तिकरण लागू करती है, और जनता की जेब पर हर दिन नया आर्थिक प्रहार करती है।”
“देश अब समझ चुका है मोदी है तो महंगाई मुमकिन है।”








