बरसात से पहले पूरा होगा काम या झेलनी पड़ेगी खुदी सड़कों की मार, सूचना बोर्ड न लगने पर भी उठे पारदर्शिता के प्रश्न

गुरुग्राम, 30 अप्रैल। गुरुग्राम में कैबिनेट मंत्री राव नरबीर सिंह द्वारा स्टॉर्म वाटर ड्रेन और जलापूर्ति परियोजनाओं के शिलान्यास के साथ जहां विकास कार्यों को गति देने का दावा किया गया है, वहीं इन परियोजनाओं के समय और कार्यप्रणाली को लेकर कई महत्वपूर्ण सवाल भी खड़े होने लगे हैं।
सेक्टर-9 और 9ए में करीब 19.35 करोड़ रुपये की लागत से ड्रेनेज प्रोजेक्ट और धनकोट में 4.53 करोड़ रुपये की पाइपलाइन परियोजना का शुभारंभ किया गया है, लेकिन स्थानीय निवासियों और जागरूक नागरिकों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि क्या ये कार्य बरसात से पहले पूरे हो पाएंगे?
बरसात से पहले काम पूरा होना मुश्किल, बढ़ सकती हैं समस्याएं
विशेषज्ञों और स्थानीय लोगों का मानना है कि इतनी बड़ी परियोजनाओं को सीमित समय में पूरा कर पाना आसान नहीं है। ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि बरसात के दौरान सड़कों के खुदे रहने से जलभराव की समस्या कम होने के बजाय और विकराल रूप ले सकती है।
यदि निर्माण कार्य अधूरे रहते हैं, तो सेक्टर-9 और 9ए के निवासियों को कीचड़, ट्रैफिक जाम और दैनिक जीवन में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
सूचना बोर्ड न लगना, पारदर्शिता पर सवाल
एक और गंभीर मुद्दा इन परियोजनाओं के स्थलों पर “प्राक्कलन बोर्ड” (इन्फॉर्मेशन बोर्ड) का न लगाया जाना है। नियमानुसार ऐसे बोर्ड पर परियोजना की लागत, समय-सीमा, कार्य का विवरण, संबंधित ठेकेदार और अधिकारियों की जानकारी स्पष्ट रूप से प्रदर्शित की जानी चाहिए।
बताया जाता है कि इस विषय को पहले भी नगर निगम आयुक्त और निकाय मंत्री विपुल गोयल के समक्ष उठाया गया था, और उन्होंने ऐसे बोर्ड लगाने का आश्वासन भी दिया था। इसके बावजूद मौके पर केवल उद्घाटन करने वाले जनप्रतिनिधियों के नाम के बोर्ड दिखाई देना कई सवाल खड़े करता है।
क्या प्रचार ज्यादा, सुविधा कम?
स्थानीय स्तर पर यह चर्चा भी है कि क्या इन परियोजनाओं का उद्देश्य वास्तव में जनता को राहत देना है या फिर केवल उद्घाटन और प्रचार तक सीमित रहना?
यदि कार्यों की समय-सीमा और गुणवत्ता को लेकर स्पष्ट जानकारी ही उपलब्ध नहीं है, तो यह पारदर्शिता की कमी को दर्शाता है, जिसे कुछ लोग संभावित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने वाला भी मान रहे हैं।
जनता को जवाब चाहिए
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इन परियोजनाओं को समय पर पूरा कर वास्तव में लोगों को राहत दी जाएगी, या फिर यह कार्य अधूरे रहकर नई समस्याओं को जन्म देंगे?
स्थानीय नागरिकों की मांग है कि प्रशासन और संबंधित विभाग इन परियोजनाओं की समय-सीमा स्पष्ट करें, सूचना बोर्ड तत्काल लगाए जाएं और कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जाए, ताकि विकास के दावे धरातल पर भी नजर आएं।








