रेवाड़ी में मजदूरों की बदहाल जिंदगी: मई दिवस पर जमीनी हकीकत उजागर

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वेदप्रकाश विद्रोही बोले—अधिकार कागज़ों में, झुग्गियों में रहने वाले मजदूर आज भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित

रेवाड़ी, 1 मई 2026। अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस के अवसर पर जहां श्रमिकों के अधिकारों और कल्याण की बात की जाती है, वहीं रेवाड़ी में जमीनी हकीकत बेहद चिंताजनक है। स्वयंसेवी संस्था ‘ग्रामीण भारत’ के अध्यक्ष वेदप्रकाश विद्रोही ने रेवाड़ी के सेक्टर-4 और आसपास की झुग्गी-झोपड़ियों में रह रहे अप्रवासी मजदूरों की स्थिति का निरीक्षण किया, जिसमें उनकी दयनीय हालत सामने आई।

विद्रोही ने कहा कि इन मजदूरों के लिए मई दिवस, श्रम कानून और अधिकार महज औपचारिक शब्द बनकर रह गए हैं। उनका जीवन आज भी “रोज कुआं खोदो, रोज पानी पीओ” की स्थिति में फंसा हुआ है। सुबह के समय जब आम लोग सैर करते हैं, तब मजदूर महिलाएं लकड़ी के चूल्हों पर रोटियां बनाकर दिनभर के संघर्ष की तैयारी करती नजर आती हैं।

उन्होंने बताया कि झुग्गियों में रहने वाले इन मजदूरों के पास बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव है। न तो शौचालय उपलब्ध हैं, न गैस चूल्हा, और न ही पीने के लिए साफ पानी की व्यवस्था है। “खुले में शौच से मुक्ति” और “कैरोसीन मुक्त हरियाणा” जैसे दावे इनके लिए केवल जुमले साबित हो रहे हैं। लाखों अप्रवासी मजदूर बदतर हालात में भगवान भरोसे जीवन यापन कर रहे हैं।

मई दिवस के अवसर पर विद्रोही ने अपने कार्यालय में मजदूर आंदोलनों में शहीद हुए ज्ञात-अज्ञात श्रमिकों को श्रद्धांजलि अर्पित की। इस मौके पर कपिल यादव, अमन यादव (एडवोकेट), यश यादव और अजय कुमार ने भी श्रद्धासुमन अर्पित किए।

सरकार की नीतियों पर निशाना साधते हुए विद्रोही ने कहा कि श्रम कानूनों को लगातार कमजोर किया जा रहा है और “हायर-फायर” की नीति के चलते औद्योगिक मजदूरों का शोषण बढ़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि नए चार लेबर कोड लागू कर मजदूरों के अधिकारों को सीमित किया जा रहा है, जिससे उद्योगपतियों को मनमानी की छूट मिल जाएगी और मजदूरों की नौकरी की सुरक्षा खत्म हो जाएगी।

हरियाणा सरकार पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि प्रदेश में मजदूरों के हितों की अनदेखी हो रही है। उन्होंने कहा कि जब सरकार मजदूरों के कल्याण के बजाय अन्य मुद्दों में उलझी हो, तो मजदूरों और किसानों के हितों की उम्मीद करना मुश्किल हो जाता है।

अंत में विद्रोही ने मजदूर दिवस के मौके पर किसान, मजदूर और मेहनतकश वर्ग से संगठित होकर अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करने का आह्वान किया।

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Author: Bharat Sarathi

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