“वानप्रस्थ में सुरों की अमर गूंज — स्वर कोकिला आशा भोसले जी को भावभीनी श्रद्धांजलि

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संगीतमयी प्रस्तुतियों के बीच यादों और भावनाओं का भावपूर्ण संगम

हिसार – वानप्रस्थ सीनियर सिटीजन क्लब में आज भारतीय सिनेमा जगत की महान, अनुपम और बहुमुखी प्रतिभा की धनी गायिका आशा भोसले जी को अत्यंत भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। उनके गीतों ने न केवल समय को पार किया है, बल्कि अनगिनत दिलों की धड़कनों में अपनी जगह बनाई है।

मंच संचालन करते हुए श्रीमती सुनीता महतानी ने भावपूर्ण शब्दों में आशा जी के जीवन और साधना का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि 20 से अधिक भाषाओं में 12,000 से भी अधिक गीत गाकर आशा जी ने संगीत को नई ऊँचाइयाँ दीं। उनके सुरों में जो जादू था, वह हर पीढ़ी को जोड़ता रहा है। 7 बार फिल्मफेयर पुरस्कार से सम्मानित इस महान कलाकार की साधना, समर्पण और सादगी हम सभी के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

कार्यक्रम के दौरान डॉ. सुनीता श्योकंद एवं डॉ. सुनीता जैन ने रोचक और भावनात्मक पहेलियों के माध्यम से आशा जी के जीवन से जुड़े प्रश्न पूछे, जिससे वातावरण में आत्मीयता और सहभागिता का सुंदर संगम देखने को मिला।

कार्यक्रम का आरंभ भक्ति-रस से ओतप्रोत सुरों के साथ हुआ और फिर एक के बाद एक प्रस्तुतियों ने मानो यादों की पोटली खोल दी। सुनीता सुनेजा ने अपनी कोमल और मधुर आवाज़ में “मेरे रोम-रोम में बसने वाले राम” प्रस्तुत कर ऐसा भाव जगाया कि पूरा वातावरण भक्ति में डूब गया। पुष्पा खरब ने अपनी आत्मीय, सहज और सुरमयी प्रस्तुति “तोरा मन दर्पण कहलाए” से सभी के मन को छू लिया।

क्लब के महान गायक एस. एस. धवन ने अपनी गंभीर, स्थिर और प्रभावशाली आवाज़ में “आगे भी जाने न तू” गाकर समय को जैसे थाम लिया । सबने खड़े हो कर तालियों से उनका अभिवादन किया । वहीं कमलेश कुकड़ेजा ने अपनी भावनाओं से भरी, गहराई लिए प्रस्तुति “कभी किसी को मुकम्मल जहाँ नहीं मिलता” से जीवन की सच्चाइयों को स्वर दे दिया। डॉ. सुदेश गांधी एवं एम. एम. गांधी की सुमधुर, सुसंगत और दिल को छू लेने वाली युगल प्रस्तुति “ये रातें ये मौसम…” ने सभी को पुरानी मधुर यादों में खो जाने पर मजबूर कर दिया। अजीत एवं कमलेश कुकड़ेजा ने “ढल गया दिन हो गई शाम” को अपनी सहज और भावपूर्ण शैली में प्रस्तुत कर संध्या की कोमलता को जीवंत कर दिया।

अजीत सिंह ने अपनी दर्दभरी, गूंजती और दिल की गहराइयों से निकली आवाज़ में “चैन से हमको कभी” गाकर हर श्रोता के मन को स्पर्श किया। योगेश सुनेजा एवं सुनीता सुनेजा की सजीव, प्रेमपूर्ण और तालमेल से भरी युगल प्रस्तुति “अभी ना जाओ छोड़कर” ने प्रेम की मधुरता को फिर से जीवित कर दिया।

वीना अग्रवाल ने अपनी चंचल, मधुर और दिलकश अदाओं से भरपूर प्रस्तुति में ‘ओ मेरे सोना रे सोना रे सोना…’ गाकर वातावरण में मिठास और उमंग घोल दी।

एम. एस. राणा और डा सत्य सावंत ने अपनी उत्साही, जीवंत और मस्तीभरी शैली में “ दीवाना, मस्ताना हुआ दिल…” गाकर माहौल में नई ऊर्जा भर दी, जबकि राज रानी मल्हान ने अपनी गहन, संवेदनशील और आत्मा को छू लेने वाली प्रस्तुति “ये क्या जगह है दोस्तों…” से सभी को भावविभोर कर दिया।

अंत में, डॉ. धवन एवं उनकी टीम ने अपनी सामूहिक, जोशीली और मनमोहक मेडले प्रस्तुति के माध्यम से अनेक गीतों की झलकियाँ प्रस्तुत कर ऐसा समां बाँधा कि हर व्यक्ति अनायास ही सुरों में डूब गया और साथ गुनगुनाने लगा। कार्यक्रम को समापन की ओर ले जाते हुए मेडले की टीम ने “ अच्छा तोह हम चलते हैं “ गीत प्रस्तुत कर दर्शकों को रोमांचित कर दिया ।

भीषण गर्मी के बावजूद लगभग 70 सदस्यों की उपस्थिति इस बात का प्रमाण थी कि सच्चा संगीत हर परिस्थिति से ऊपर होता है।

सदस्यों ने अपने भावपूर्ण उद्गारों में कहा कि आशा जी केवल एक गायिका नहीं, बल्कि भावनाओं की अमर धरोहर हैं। उनके सुर सदियों तक गूंजते रहेंगे और वे सदा हमारे दिलों में जीवित रहेंगी। कार्यक्रम के अंत में सभी ने स्नेहपूर्ण वातावरण में जलपान का आनंद लिया और एक-दूसरे के साथ इन अनमोल पलों को साझा किया।
यह श्रद्धांजलि केवल एक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि उन अमर सुरों के प्रति कृतज्ञता का एक सजीव और अविस्मरणीय अभिव्यक्ति था, जिसने हर हृदय को छू लिया।

Bharat Sarathi
Author: Bharat Sarathi

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