–अभय चौटाला ने जो जुबान दी उसे किया पूरा, बाकी सब अखबारों तक है सीमित
—किसानों के लिए इस्तीफा दिया, बॉर्डर पर हॉस्पिटल बनवाया, गर्मी से बचने के लिए वाटर कूलर, पंखे दीये

बाढड़ा जयवीर फोगाट 

प्रदेश के सभी नेता राजनेता किसानों के हितैषी होने का दम भर रहे हैं लेकिन सच्चा किसान नेता आज के दिन अभय सिंह चौटाला है। जिन्होंने किसानों के लिए ना सिर्फ अपनी कुर्सी का त्याग किया है बल्कि जो भी जुबान दी उसे बखूबी निभाया है। यह बात इनेलो के वरिष्ठ नेता व बाढड़ा हलकाध्यक्ष सत्यवान शास्त्री ने किसानों से बातचीत करते हुए कही है।        

सत्यवान शास्त्री ने दुष्यन्त चौटाला के किसान हितैषी होने का दावा करने वाले बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जो किसानों की बात करके और बीजेपी के खिलाफ वोट मांगकर जीत हासिल कर सत्ता सुख भोगने मात्र के लिए बीजेपी की गोदी में बैठने वाला किसानों का हितैषी नहीं हो सकता। दुष्यन्त चौटाला ने चौटाला घराने की जनता की भलाई के लिए कुर्सी का त्याग करने की परंपरा को कंलकित किया है। जनता और किसानों की भलाई के लिए अभय सिंह ने अपने दादा ताऊ देवीलाल के पदचिन्हों पर चलते हुए कुर्सी को छोड़कर उनकी पगड़ी का मान बढ़ाया है।सत्यवान शास्त्री ने कहा कि अभय सिंह चौटाला ने अपने वायदे अनुसार बॉर्डर पर किसानों के लिए फ्री में अस्पताल बनाया, उनके लिए वाटर कूलर और पंखे भिजवाये। जिस तरह से प्रदेश के राजनेता ताऊ देवीलाल से प्रेरणा लेते थे आज नेताओं को अभय सिंह चौटाला से प्रेरणा लेनी चाहिए कि राजनीति अपने फायदे के लिए नहीं बल्कि जनता की सेवा करने के लिए होती है।        

 उन्होंने कहा कि किसानों की सेवा बलराज कुंडू और सोमबीर सांगवान भी कर रहे हैं, उन्हें जनता और किसान आशिर्वाद दे रहे है। किसानों का भला अखबारों में न्यूज देकर या न्यूज चैनल पर बड़े बड़े भाषण देने से नहीं होता। उसके लिए उनके बीच में जाकर उन्हें अपना बनाकर उनका होना पड़ता है। किसानों को आज साढ़े चार महीने हो बॉर्डर पर बैठे हुए और 300 से ज्यादा किसानों ने अपनी शहादत दे दी लेकिन सरकार कुंभकरणी नींद में सोई हुई है। अब आने वाले समय में किसान उनकी नींद हराम कर उन्हें मखमली गद्दों पर सोने का मौका कभी नहीं देंगे। एक तरफ पूरे देश में कोरोना महामारी बढ़ रही है वही देश के प्रधानमंत्री रैली पर रैलियां करके अपनी राजनितिक रोटियां सेक रहे है।

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