अहीरवाल में बाजरे के उत्पादन में भारी गिरावट का दावा, विशेष गिरदावरी में देरी पर उठाए सवाल
रेवाड़ी, 3 नवंबर। स्वयंसेवी संस्था ग्रामीण भारत के अध्यक्ष वेदप्रकाश विद्रोही ने हरियाणा सरकार से अहीरवाल क्षेत्र में बेमौसम वर्षा और ओलावृष्टि से प्रभावित किसानों को खराब फसलों का समुचित मुआवजा देने की मांग की है। उन्होंने कहा कि सरकार प्रति एकड़ 50 हजार रुपये मुआवजे की व्यवस्था करे, ताकि फसल नुकसान झेल रहे किसानों को आर्थिक राहत मिल सके।
विद्रोही ने कहा कि खरीफ के दौरान असमय वर्षा से प्रदेश के विभिन्न हिस्सों के साथ अहीरवाल में भी फसलों को नुकसान हुआ है। क्षेत्र के किसान भौगोलिक परिस्थितियों के कारण पहले से ही पानी की कमी और आर्थिक संकट से जूझते हैं। ऐसे में बेमौसम वर्षा ने उनकी परेशानी और बढ़ा दी है।
उन्होंने दावा किया कि वर्षा और ओलावृष्टि के कारण क्षेत्र में बाजरे का उत्पादन व्यापक रूप से प्रभावित हुआ है। कई किसानों के उत्पादन में लगभग एक तिहाई की कमी आई है, जबकि कुछ किसानों को 75 से 80 प्रतिशत तक उत्पादन घटने का नुकसान उठाना पड़ा है। उन्होंने आरोप लगाया कि किसानों की बार-बार मांग के बावजूद सरकार ने समय पर विशेष गिरदावरी नहीं करवाई।
विद्रोही ने सरकार पर फसल बीमा कंपनियों से सांठगांठ का आरोप लगाते हुए कहा कि खराब फसलों का सही आकलन नहीं होने से किसान उचित मुआवजे से वंचित रह जाते हैं। उनके अनुसार, नुकसान के आकलन में ऐसी प्रक्रियाएं अपनाई जाती हैं, जिनसे मुआवजा या तो नहीं मिलता अथवा नाममात्र का मिलता है।
उन्होंने कहा कि मंडियों में बिक्री के लिए रखे बाजरे के वर्षा में भीगने से भी किसानों को अतिरिक्त नुकसान हुआ है। असमय वर्षा से रबी फसलों की बुवाई प्रभावित होने पर गेहूं और सरसों के आगामी उत्पादन पर भी असर पड़ने की आशंका है।
विद्रोही ने मांग की कि सरकार फसल नुकसान का सही आकलन करवाकर प्रभावित किसानों को प्रति एकड़ 50 हजार रुपये मुआवजा दे। उन्होंने कहा कि समय पर राहत मिलना जरूरी है, ताकि घाटे की खेती से जूझ रहे किसान कर्ज के बढ़ते बोझ से बच सकें।









