गुरुग्राम में ठेकेदार, लागत और समयसीमा की जानकारी सार्वजनिक नहीं होने पर सवाल; सड़कों की गुणवत्ता की जाँच की मांग
विधायक से पक्ष जानने के लिए कई बार किया संपर्क, फोन पर नहीं मिला जवाब
गुरुग्राम। शहर में विकास कार्यों की पारदर्शिता और निर्माण की गुणवत्ता को लेकर जनप्रतिनिधियों तथा नगर निगम अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। निर्माण स्थलों पर कार्य की लागत, ठेकेदार का नाम, जिम्मेदार अधिकारी और पूरा होने की समयसीमा बताने वाले सूचना पट्ट नहीं दिखाई देने की शिकायत है। सवाल यह है कि जनता के पैसे से होने वाले कार्यों की बुनियादी जानकारी आखिर जनता को उपलब्ध क्यों नहीं कराई जा रही है?
करीब पंद्रह दिन पहले मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में विकास कार्यों के संबंध में ऐसी जानकारी प्रदर्शित करने का निर्णय लिए जाने की बात सामने आई थी। इसके तहत निर्माण स्थल पर यह स्पष्ट होना चाहिए कि काम कौन कर रहा है, निगरानी की जिम्मेदारी किस अधिकारी की है, कार्य कब तक पूरा होगा और गुणवत्ता के निर्धारित मानक क्या हैं। शिकायत है कि इसके बाद भी गुरुग्राम में इन निर्देशों का पालन जमीन पर नजर नहीं आ रहा है।
पुराने आश्वासनों के बाद भी इंतजार
यह मुद्दा पहली बार नहीं उठा है। संवाददाता ने पिछले वर्ष दीपावली के अगले दिन तत्कालीन नगर निगम आयुक्त की पत्रकार वार्ता में भी निर्माण स्थलों पर सूचना पट्ट लगाने का सवाल उठाया था। उस समय आयुक्त ने सूचना पट्ट लगवाने का आश्वासन दिया था। इसके बाद निकाय मंत्री विपुल गोयल के समक्ष भी मामला रखा गया। उन्होंने भी जल्द कार्रवाई का भरोसा दिया था।
इसके बावजूद निर्माण कार्यों से संबंधित जानकारी सार्वजनिक नहीं होने की शिकायत बनी हुई है। अब मुख्यमंत्री के स्तर से निर्देश दिए जाने के बाद भी स्थिति नहीं बदलने पर सवाल और गंभीर हो गए हैं। यदि निर्देश जारी हैं तो उनका पालन सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी किसकी है और लापरवाही बरतने वालों पर क्या कार्रवाई हुई है?
उद्घाटन हुए, लेकिन जानकारी के बोर्ड नहीं लगे
संवाददाता के अनुसार, पिछले पंद्रह दिनों में विधायक ने जिन विकास कार्यों का उद्घाटन किया, उनमें भी संबंधित कार्य का पूरा विवरण देने वाले सूचना पट्ट नहीं दिखाई दिए। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या जनप्रतिनिधि और संबंधित अधिकारी इन निर्देशों से अवगत नहीं हैं, अथवा इनके अनुपालन की निगरानी नहीं की जा रही है?
विकास कार्यों का उद्घाटन जनता को सुविधाएँ उपलब्ध कराने की दिशा में एक कदम है, लेकिन उसके साथ लागत, गुणवत्ता और जवाबदेही की जानकारी देना भी आवश्यक है। केवल उद्घाटन से किसी कार्य की गुणवत्ता सुनिश्चित नहीं होती। इसके लिए नियमित निरीक्षण और कमियाँ मिलने पर जिम्मेदारी तय करना जरूरी है।
जानकारी मिलेगी तो जनता भी कर सकेगी निगरानी
इस संबंध में बातचीत के दौरान स्थानीय लोगों ने सूचना पट्ट नहीं लगाए जाने पर नाराजगी जताई। लोगों का कहना है कि ठेकेदार का नाम, स्वीकृत लागत, कार्य का विवरण और जिम्मेदार अधिकारी की जानकारी मिलने पर वे निर्माण की निगरानी कर सकेंगे तथा गड़बड़ी की शिकायत सही अधिकारी तक पहुँचा सकेंगे।
कुछ लोगों ने आशंका जताई कि निर्माण कार्यों की जानकारी सार्वजनिक होने से अनियमितताएँ उजागर हो सकती हैं, इसलिए विवरण उपलब्ध कराने में टालमटोल की जा रही है। हालांकि, इस आशंका और भ्रष्टाचार संबंधी आरोपों की पुष्टि संबंधित अभिलेखों तथा निष्पक्ष जाँच से ही हो सकती है।
समय से पहले टूटती सड़कों की जिम्मेदारी कौन लेगा?
शहर में सड़कों की गुणवत्ता भी चिंता का विषय है। शिकायत है कि कुछ सड़कें निर्माण के दो वर्ष के भीतर ही टूटने लगती हैं। विधायक द्वारा उद्घाटन की गई एक सड़क के भी क्षतिग्रस्त होने का मामला उठाया गया है। ऐसे मामलों में यह जाँचना जरूरी है कि निर्माण निर्धारित मानकों के अनुरूप हुआ था या नहीं और संबंधित विभाग ने गुणवत्ता की जाँच किस आधार पर की थी।
स्थानीय स्तर पर यह भी दावा किया जा रहा है कि सड़क बनाने वाले ठेकेदार की तीन वर्ष तक रखरखाव की जिम्मेदारी होती है। हालांकि, किसी विशेष सड़क के लिए यह अवधि और ठेकेदार का दायित्व संबंधित निविदा तथा अनुबंध की शर्तों से ही स्पष्ट होगा। नगर निगम को यह जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए कि कौन-सी सड़क किस रखरखाव अथवा दोष-सुधार अवधि के अंतर्गत है और उसके क्षतिग्रस्त होने पर मरम्मत का खर्च किसे उठाना है।
यदि कोई सड़क अनुबंध में निर्धारित अवधि के भीतर खराब होती है, तो संबंधित शर्तों के अनुसार ठेकेदार की जवाबदेही तय होनी चाहिए। साथ ही, निर्माण की निगरानी और भुगतान की स्वीकृति देने वाले अधिकारियों की भूमिका की भी जाँच होनी चाहिए।
विधायक से संपर्क का प्रयास, जवाब नहीं मिला
इस मामले में विधायक का पक्ष जानने के लिए संवाददाता ने कई बार फोन किया, लेकिन कॉल का जवाब नहीं मिला। विधायक के सहयोगियों से भी फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, परंतु उनकी ओर से भी कोई उत्तर प्राप्त नहीं हुआ। प्रतिक्रिया मिलने पर उसे प्रकाशित किया जाएगा।
अब सवाल है कि क्या मुख्यमंत्री गुरुग्राम में विकास कार्यों पर सूचना पट्ट लगाने के निर्देशों के अनुपालन की समीक्षा कराएंगे? क्या समय से पहले क्षतिग्रस्त हुई सड़कों की विशेष जाँच होगी और खामियाँ मिलने पर संबंधित ठेकेदारों व अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाएगी? जनता को विकास कार्यों के उद्घाटन के साथ उनकी लागत, गुणवत्ता और टिकाऊपन का हिसाब भी चाहिए।







