आरोप—समानांतर वितरण लाइसेंस से निजी कंपनी चुनेगी लाभ वाले उपभोक्ता, किसानों और ग्रामीणों की बिजली सब्सिडी पर पड़ेगा असर
चंडीगढ़, 14 सितंबर। संयुक्त किसान मोर्चा हरियाणा ने हरियाणा विद्युत नियामक आयोग (एचईआरसी) द्वारा गठित विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट को किसान और उपभोक्ता विरोधी बताते हुए इसे तत्काल रद्द करने की मांग की है। मोर्चा ने चेतावनी दी कि निजी कंपनी को बिजली वितरण का समानांतर लाइसेंस दिए जाने पर किसान, ग्रामीण उपभोक्ता और बिजली कर्मचारी संयुक्त रूप से अनिश्चितकालीन आंदोलन शुरू करेंगे।
मोर्चा ने आरोप लगाया कि विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट ऐसे सेवानिवृत्त अधिकारियों एवं विशेषज्ञों ने तैयार की है, जिनका खेती करने वाले किसानों और सामान्य उपभोक्ताओं की वास्तविक समस्याओं से सीधा संबंध नहीं है। बंद कमरों में तैयार यह रिपोर्ट सरकारी बिजली वितरण व्यवस्था को कमजोर करके चुनिंदा निजी घरानों को लाभ पहुंचाने का रास्ता खोल सकती है।
‘लाभ वाले क्षेत्रों पर निजी कंपनी की नजर’
संयुक्त किसान मोर्चा ने दावा किया कि पूरे देश में बिजली वितरण के लिए इस प्रकार समानांतर लाइसेंस दिए जाने का कोई दूसरा उदाहरण नहीं है। मोर्चा के अनुसार, गुरुग्राम और नूंह में वितरण लाइसेंस की आवेदक ‘इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड’ बड़े औद्योगिक उपभोक्ताओं, शॉपिंग मॉल, व्यावसायिक परिसरों और बड़ी आवासीय सोसाइटियों जैसे अधिक राजस्व वाले क्षेत्रों को अपने अधीन लेना चाहती है।
मोर्चा ने इसे उपभोक्ताओं की ‘चेरी पिकिंग’ करार देते हुए कहा कि किसानों के नलकूपों, गांवों के घरेलू उपभोक्ताओं और कम आय वाले क्षेत्रों को पुरानी बिजली लाइनों के साथ दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम के भरोसे छोड़ दिया जाएगा। इससे सरकारी वितरण कंपनी की आर्थिक स्थिति और कमजोर होने की आशंका है।
कृषि सब्सिडी खत्म होने की आशंका जताई
मोर्चा ने आशंका व्यक्त की कि बिजली वितरण व्यवस्था के विभाजन से किसानों को मिलने वाली कृषि सब्सिडी तथा ग्रामीण उपभोक्ताओं की रियायती बिजली पर सीधा असर पड़ेगा। निजी कंपनियां शुरुआत में कम दरों का प्रस्ताव देकर उपभोक्ताओं को आकर्षित कर सकती हैं, लेकिन बाद में बिजली की दरें मनमाने ढंग से बढ़ाई जा सकती हैं।
खापों और पंचायतों से समर्थन की अपील
संयुक्त किसान मोर्चा ने प्रदेश की खाप पंचायतों, किसान यूनियनों, सरपंचों, ग्रामीणों और आम नागरिकों से इस प्रस्ताव के विरोध में एकजुट होने का आह्वान किया है। मोर्चा ने कहा कि यह केवल बिजली कर्मचारियों की लड़ाई नहीं, बल्कि किसानों के खेतों, नलकूपों की बिजली आपूर्ति, घरेलू उपभोक्ताओं की सब्सिडी और सार्वजनिक बिजली व्यवस्था को बचाने की लड़ाई है।
“निजी कंपनी को समानांतर वितरण लाइसेंस मिला तो किसान, ग्रामीण उपभोक्ता और बिजली कर्मचारी मिलकर अनिश्चितकालीन आंदोलन करेंगे।”
— संयुक्त किसान मोर्चा हरियाणा








