जीएमडीए की लगातार निगरानी का असर; कई सोसाइटियों में नए आरडब्ल्यूएच पिट बने, कमियां मिलने पर 20 दिन बाद फिर होगी जांच

गुरुग्राम, 10 सितंबर। रेन वाटर हार्वेस्टिंग (आरडब्ल्यूएच ) सिस्टम को लेकर जीएमडीए की मॉक ड्रिल और लगातार समीक्षा अब असर दिखा रही है। हाल की बारिश में कई बड़ी ग्रुप हाउसिंग सोसाइटियों में पहले के मुकाबले स्थिति बेहतर रही। सोसाइटी प्रतिनिधियों ने बताया कि बारिश का पानी परिसर में जमा नहीं हुआ। कई जगह पुराने आरडब्ल्यूएच पिट की सफाई के साथ नए पिट भी बनाए गए हैं।
जीएमडीए कार्यालय में वीरवार को शहरी विकास विभाग, हरियाणा के प्रधान सलाहकार श्री डी.एस. ढेसी की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक में आरडब्ल्यूएच सिस्टम की वास्तविक कार्यक्षमता और रखरखाव की स्थिति की समीक्षा की गई। उन्होंने डेवलपर्स और आरडब्ल्यूए से पूछा कि मॉक ड्रिल के बाद बारिश में सिस्टम ने कैसा काम किया और पिट की सफाई का कितना फायदा हुआ।
बैठक में सामने आया कि कुछ नई आरडब्ल्यूएच संरचनाएं बारिश के दूसरे-तीसरे दौर के बाद अपेक्षित तरीके से काम नहीं कर पाईं। संबंधित सोसाइटियों को कारण पता कर कमियां दूर करने के निर्देश दिए गए।
टाटा हाउसिंग ठीक, ट्यूलिप में सुधार जरूरी
जीएमडीए इंजीनियरिंग विंग की जांच में सेक्टर-72 स्थित टाटा हाउसिंग का आरडब्ल्यूएच सिस्टम अच्छी स्थिति में मिला। वहीं सेक्टर-69 और 70 की ट्यूलिप सोसाइटी की व्यवस्था अपेक्षाकृत कमजोर मिली। सोसाइटी प्रबंधन को सिस्टम की मरम्मत, सफाई और प्रभावी संचालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
एमजी रोड स्थित एस्सेल हाउसिंग सोसाइटी की आरडब्ल्यूएच व्यवस्था की जांच एमसीएम कमिश्नर की अध्यक्षता वाली कमेटी करेगी। विपुल ग्रीन्स में हाइड्रोलॉजिस्ट और संबंधित अधिकारी सिस्टम की जांच कर सुधार के सुझाव देंगे।
20 दिन बाद फिर होगी जांच
जीएमडीए के डीटीपी इंफोर्समेंट आर.एस. बाठ को संबंधित सोसाइटियों के आरडब्ल्यूएच सिस्टम की 20 दिन बाद दोबारा जांच करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही अन्य सोसाइटियों में भी मॉक ड्रिल कराने को कहा गया है।
श्री ढेसी ने कहा कि केवल आरडब्ल्यूएच पिट बना देना पर्याप्त नहीं है। उसकी नियमित सफाई और रखरखाव जरूरी है। पिट सिल्ट और कचरे से मुक्त रहेंगे तभी बारिश का पानी जमीन में जाकर भूजल रिचार्ज कर पाएगा। अधिकारियों को कमियां मिलने पर समयबद्ध सुधार सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।









