होर्मुज पर संकट, 102 डॉलर पार तेल; क्या 120 डॉलर तक पहुंचेगा भाव?

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ईरान-अमेरिका तनाव से ऊर्जा आपूर्ति, महंगाई और अमेरिकी मध्यावधि चुनावों पर बढ़ा दबाव

क्या तेल फिर बना भू-राजनीति का सबसे बड़ा हथियार?

एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता सैन्य तनाव अब मध्य-पूर्व तक सीमित नहीं है। इसके प्रभाव से वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा, समुद्री व्यापार, महंगाई, शेयर बाजार और अमेरिकी राजनीति तक प्रभावित होने लगी है। 10 सितंबर 2026 को अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट कच्चा तेल करीब 102.59 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। आशंका जताई जा रही है कि संघर्ष लंबा खिंचने पर इसका भाव 120 डॉलर या उससे ऊपर जा सकता है।

होर्मुज बना संकट का केंद्र

इस तनाव का सबसे संवेदनशील केंद्र होर्मुज जलडमरूमध्य है, जिससे विश्व के तेल और गैस व्यापार का बड़ा हिस्सा गुजरता है। यहां जहाजों की आवाजाही बाधित होने, टैंकरों पर हमले बढ़ने अथवा समुद्री बीमा कंपनियों द्वारा युद्ध-जोखिम प्रीमियम बढ़ाने का असर पूरी दुनिया पर पड़ेगा।

अमेरिका और ईरान दोनों ओर से जहाजों तथा तेल टैंकरों को निशाना बनाने के दावे किए गए हैं। हालांकि इनमें से कुछ दावों का दूसरे पक्ष ने खंडन भी किया है, इसलिए उन्हें स्वतंत्र पुष्टि के बिना अंतिम सत्य नहीं माना जा सकता। ईरान द्वारा ओमान की खाड़ी और अरब सागर के कुछ क्षेत्रों में जहाजों की आवाजाही नियंत्रित करने की चेतावनी ने चिंता और बढ़ा दी है।

120 डॉलर तक पहुंच सकता है तेल?

केवल युद्ध की आशंका ही नहीं, वास्तविक आपूर्ति बाधित होना सबसे बड़ा खतरा है। यदि होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों की संख्या घटती है और टैंकरों को लंबे वैकल्पिक मार्ग अपनाने पड़ते हैं तो परिवहन, बीमा और माल ढुलाई की लागत बढ़ेगी। इससे कच्चे तेल का भाव 120 डॉलर तक पहुंचने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

हालांकि युद्धविराम होने और होर्मुज में सामान्य जहाजरानी बहाल होने पर तेल में जुड़ा जोखिम प्रीमियम तेजी से घट सकता है। इसलिए 120 डॉलर का स्तर फिलहाल संभावना है, निश्चित भविष्यवाणी नहीं।

अमेरिकी चुनावों से जुड़ी तेल की राजनीति

नवंबर 2026 के अमेरिकी मध्यावधि चुनावों में महंगाई और ईंधन की कीमतें प्रमुख मुद्दे बन सकती हैं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का आरोप है कि ईरान संघर्ष को चुनाव तक खींचना चाहता है, ताकि अमेरिका में पेट्रोल महंगा रहे और रिपब्लिकन पार्टी को राजनीतिक नुकसान हो।

ट्रंप ने चुनाव के बाद युद्ध समाप्त होने तथा तेल और गैसोलीन की कीमतों में तेज गिरावट का दावा किया है। लेकिन यह एक राजनीतिक दावा है; बाजार की दिशा युद्ध, आपूर्ति और होर्मुज की स्थिति से तय होगी। संघर्ष लंबा चला तो महंगे पेट्रोल, परिवहन और खाद्य वस्तुओं का असर रिपब्लिकन पार्टी की चुनावी संभावनाओं पर पड़ सकता है।

5,000 डॉलर के ‘ट्रंप डिविडेंड’ पर सवाल

इसी चुनावी वातावरण में ट्रंप ने प्रस्ताव रखा है कि प्रतिनिधि सभा और सीनेट पर रिपब्लिकन नियंत्रण बने रहने पर प्रत्येक अमेरिकी वयस्क नागरिक को 5,000 डॉलर का ‘ट्रंप डिविडेंड’ दिया जाएगा। इसकी अनुमानित लागत एक ट्रिलियन डॉलर से अधिक हो सकती है और इसे लागू करने के लिए कांग्रेस की मंजूरी जरूरी होगी।

यह प्रस्ताव बच्चों के लिए बनाए गए कर-लाभ वाले ‘ट्रंप अकाउंट्स’ से अलग है। आलोचकों का कहना है कि इतनी बड़ी राशि बांटने से अमेरिकी बजट घाटा, राष्ट्रीय ऋण और महंगाई बढ़ सकती है।

भारत सहित पूरी दुनिया पर असर

तेल के 100 डॉलर पार जाने का अर्थ केवल पेट्रोल-डीजल महंगा होना नहीं है। इससे विमान ईंधन, समुद्री परिवहन, उर्वरक, प्लास्टिक, औद्योगिक उत्पादन और रोजमर्रा की वस्तुओं की लागत बढ़ सकती है। भारत जैसे आयात-निर्भर देशों पर व्यापार घाटे, रुपये और महंगाई का अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। केंद्रीय बैंकों के लिए ब्याज दरों में कटौती करना भी कठिन हो सकता है।

1970 के दशक जैसा संकट अभी नहीं, लेकिन चेतावनी गंभीर

फिलहाल इसे 1970 के दशक जैसा पूर्ण वैश्विक तेल संकट कहना जल्दबाजी होगी, लेकिन खतरे के संकेत स्पष्ट हैं—102 डॉलर से ऊपर ब्रेंट तेल, होर्मुज में सैन्य तनाव, टैंकरों पर हमलों के दावे, बढ़ता समुद्री बीमा और आपूर्ति बाधित होने की आशंका।

अब असली सवाल यह नहीं है कि तेल 100 डॉलर पार करेगा या नहीं, बल्कि यह है कि वर्तमान तेजी अस्थायी युद्ध-जोखिम है अथवा लंबे ऊर्जा संकट की शुरुआत। युद्धविराम हुआ तो कीमतें तेजी से नीचे आ सकती हैं; संघर्ष जारी रहा तो 120 डॉलर या उससे ऊपर जाने का जोखिम बना रहेगा।

होर्मुज में किसी एक जहाज पर हमला अब केवल समुद्री घटना नहीं है; वह दुनिया भर में पेट्रोल, डीजल, महंगाई और आर्थिक विकास की कीमत तय करने वाला घटनाक्रम बन सकता है।

क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यमा सीए (एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र 

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Author: Bharat Sarathi

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