दलित श्रमिक गुलजार सिंह की मौत और कथित जबरन अंतिम संस्कार की समयबद्ध न्यायिक जांच कराए पंजाब सरकार
चंडीगढ़, 11 सितंबर। सिरसा की सांसद, पूर्व केंद्रीय मंत्री, अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की महासचिव एवं सीडब्ल्यूसी सदस्य कुमारी सैलजा ने पंजाब के संगरूर जिले के दलित श्रमिक गुलजार सिंह की मृत्यु और परिजनों की सहमति के बिना कथित रूप से अंतिम संस्कार कराए जाने के मामले को अत्यंत गंभीर एवं संवेदनशील बताया है। उन्होंने सवाल किया कि क्या पंजाब में अब एक दलित परिवार को अपने सदस्य का अपनी धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं के अनुसार अंतिम संस्कार करने का भी अधिकार नहीं है? क्या आम आदमी पार्टी सरकार की नजर में दलितों की भावनाओं, सहमति और सम्मान का कोई मूल्य नहीं रह गया है?
कुमारी सैलजा ने कहा कि परिवार का आरोप है कि उसे अंतिम संस्कार से पहले गुलजार सिंह का चेहरा तक नहीं देखने दिया गया और न ही उनका सामान सौंपा गया। यदि ये आरोप सही हैं तो यह मानवीय संवेदनाओं, सामाजिक न्याय और एक शोकाकुल परिवार के मौलिक सम्मान का गंभीर उल्लंघन है। किसी भी परिस्थिति में प्रशासन को कानून और निर्धारित प्रक्रिया का पालन करते हुए परिवार को विश्वास में लेना चाहिए था। सरकार को इस पूरे घटनाक्रम पर स्पष्ट जवाब देना चाहिए।
सांसद ने मांग की कि गुलजार सिंह की मृत्यु से जुड़ी परिस्थितियों, परिवार द्वारा लगाए गए उत्पीड़न के आरोपों तथा कथित जबरन अंतिम संस्कार की निष्पक्ष और समयबद्ध न्यायिक जांच कराई जाए। जांच के दौरान सभी डिजिटल एवं दस्तावेजी साक्ष्य सुरक्षित रखे जाएं और दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों अथवा अन्य व्यक्तियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई हो। उन्होंने कहा कि इस मामले को राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित रखने के बजाय पीड़ित परिवार को न्याय, सुरक्षा और सम्मान दिलाना पंजाब सरकार की पहली जिम्मेदारी है।
शोक मनाने और परंपरा के अनुसार विदाई देने का अधिकार भी छीना
कुमारी सैलजा ने कहा कि किसी प्रियजन को अंतिम विदाई देना हर परिवार के लिए अत्यंत भावनात्मक क्षण होता है। परिवार की सहमति के बिना जल्दबाजी में अंतिम संस्कार कराना, यदि जांच में प्रमाणित होता है, तो यह केवल प्रशासनिक असंवेदनशीलता नहीं बल्कि मृतक और उसके परिवार की गरिमा पर सीधा आघात है।
सांसद ने कहा कि पंजाब सरकार पीड़ित परिवार के सभी आरोपों का बिंदुवार जवाब दे तथा जांच पूरी होने तक मामले से जुड़े जिम्मेदार अधिकारियों को संवेदनशील पदों से हटाए। दलित परिवार को दबाने या उसकी आवाज अनसुनी करने का कोई भी प्रयास स्वीकार नहीं किया जाएगा।








