बिना घर-घर सर्वे ग्राम सभा में आय पूछना महज खानापूर्ति : राव नरेंद्र
कहा—गलत सत्यापन से गरीब परिवारों की योजनाएं और सामाजिक सुरक्षा छिनने का खतरा
चंडीगढ़, 11 सितंबर। हरियाणा में 39.89 लाख बीपीएल परिवारों की आय का ग्राम सभाओं के माध्यम से सत्यापन कराने की सरकारी प्रक्रिया पर सवाल उठने लगे हैं। ग्राम सचिवों की आपत्तियों का हवाला देते हुए हरियाणा प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह ने कहा कि बिना जमीनी सर्वे के ग्राम सभा में केवल परिवारों के नाम और आय पढ़कर सत्यापन कराना गरीबों के साथ मजाक और महज खानापूर्ति है।
राव नरेंद्र सिंह ने कहा कि सरकार ने बीपीएल परिवारों की सूची तो तैयार कर दी, लेकिन वास्तविक आर्थिक स्थिति जांचने की जिम्मेदारी ग्राम सभाओं पर डाल दी। ग्राम सचिवों के पास केवल नाम और परिवार पहचान पत्र की जानकारी है। परिवार की वास्तविक आय, मकान, जमीन और दूसरे संसाधनों का विवरण उपलब्ध नहीं होने के कारण निष्पक्ष सत्यापन संभव नहीं है।
उन्होंने सवाल किया कि जिस परिवार की आर्थिक स्थिति का मौके पर सर्वे ही नहीं हुआ, उसकी आय का निर्णय ग्राम सभा में बैठे लोग किस आधार पर करेंगे? गांवों में एक नाम के कई व्यक्ति हो सकते हैं और सभी ग्रामीण प्रत्येक परिवार की आर्थिक स्थिति से परिचित भी नहीं होते। इससे गलत सत्यापन और पात्र परिवारों के नाम कटने की आशंका बढ़ जाती है।
पहले घर-घर सर्वे, फिर ग्राम सभा से सत्यापन
राव नरेंद्र सिंह ने मांग की कि प्रत्येक गांव में पांच सदस्यीय समिति गठित कर घर-घर सर्वे कराया जाए। परिवारों की आय, जमीन, मकान, रोजगार और उपलब्ध संसाधनों से संबंधित दस्तावेजों की जांच के बाद रिपोर्ट ग्राम सभा में रखी जाए।
उन्होंने कहा कि तभी प्रक्रिया को वास्तविक सत्यापन माना जा सकता है। केवल कागजों में औपचारिकता पूरी करने का खामियाजा गरीब परिवारों को भुगतना पड़ सकता है।
छह महीने में 13.50 लाख परिवार सूची से बाहर
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने बीपीएल परिवारों की संख्या में आए बड़े बदलाव पर भी सरकार से जवाब मांगा। उन्होंने कहा कि अक्टूबर 2024 में विधानसभा चुनाव से पहले प्रदेश में करीब 52.50 लाख बीपीएल परिवार थे, जबकि छह महीने के भीतर लगभग 13.50 लाख परिवार सूची से बाहर हो गए।
सरकार का तर्क था कि परिवारों ने स्वयं अपनी आय घोषित की थी। राव नरेंद्र सिंह ने कहा कि सरकार को सार्वजनिक करना चाहिए कि कितने परिवारों की आय में बदलाव किया गया और किन आधारों पर उन्हें बीपीएल सूची से बाहर किया गया।
1.60 लाख शिकायतों के निपटारे पर भी संशय
सरकार के अनुसार कम आय से संबंधित लगभग 1.60 लाख परिवारों की शिकायतों का निपटारा ग्राम सभाओं में किया जाना है। पहले चरण की ग्राम सभाएं अक्टूबर तक पूरी करने के लिए प्रदेश की 6,258 पंचायतों में 4,299 फील्ड अधिकारियों की तैनाती की गई है।
राव नरेंद्र सिंह ने कहा कि इतने बड़े स्तर पर होने वाले सत्यापन में जल्दबाजी के बजाय पारदर्शिता और सटीकता जरूरी है। किसी परिवार की वार्षिक आय 1.80 लाख रुपये से अधिक पाए जाने पर उसका बीपीएल कार्ड और अन्य सरकारी सुविधाएं समाप्त हो सकती हैं। गलत सत्यापन के कारण किसी पात्र गरीब परिवार का नाम कटना उसे अनेक कल्याणकारी योजनाओं और सामाजिक सुरक्षा से वंचित कर सकता है।
“सिर्फ नाम पढ़कर किसी गरीब परिवार की आर्थिक स्थिति तय करना न वैज्ञानिक है और न न्यायसंगत।”
उन्होंने कहा कि सरकार यह सुनिश्चित करे कि तकनीकी गलती या गलत सत्यापन के कारण किसी पात्र गरीब का नाम न कटे और कोई अपात्र व्यक्ति सरकारी लाभ न ले सके। कांग्रेस इस पूरी प्रक्रिया पर नजर रखेगी और गरीब परिवारों के साथ अन्याय होने पर उनकी आवाज उठाएगी।
हिसार में सर्वाधिक 2.88 लाख बीपीएल परिवार
प्रदेश में सर्वाधिक 2.88 लाख बीपीएल परिवार हिसार में बताए गए हैं। करनाल में 2.54 लाख, फरीदाबाद में 2.53 लाख, नूंह में 2.25 लाख और जींद में 2.23 लाख बीपीएल परिवार हैं। इसी प्रकार सिरसा में 2.22 लाख, यमुनानगर में 2.20 लाख, सोनीपत में 2.08 लाख तथा पानीपत में 2.06 लाख परिवार बीपीएल सूची में शामिल हैं।
राव नरेंद्र सिंह ने कहा कि ग्राम सचिवों की आपत्तियों ने पूरी सरकारी व्यवस्था की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि जब जमीनी सर्वे नहीं हुआ तो लाखों परिवारों की आर्थिक पात्रता का सत्यापन आखिर किस आधार पर किया जाएगा।








