हाफ मैराथन से नहीं, ठोस कार्रवाई से खत्म होगा नशा : विद्रोही

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आयोजन के आय-व्यय का पारदर्शी ऑडिट कर चंदा देने वालों की सूची सार्वजनिक करने की मांग

रेवाड़ी, 6 सितंबर। स्वयंसेवी संस्था ग्रामीण भारत के अध्यक्ष वेद प्रकाश विद्रोही ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में रेवाड़ी में ‘नशे से जंग’ के नाम पर आयोजित हाफ मैराथन को जनसमस्याओं से ध्यान भटकाने वाला आयोजन बताया है। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे आयोजनों पर करोड़ों रुपये खर्च करके प्रचार तो किया जा सकता है, लेकिन नशे की समस्या समाप्त नहीं की जा सकती।

विद्रोही ने सवाल किया कि हाफ मैराथन पर खर्च हुई राशि कहां से आई और उसके आय-व्यय का हिसाब कौन रख रहा है? उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासनिक अधिकारियों ने आयोजन के नाम पर उद्योगों, व्यापारियों और दुकानदारों से चंदा जुटाया। सरकार को बताना चाहिए कि किस उद्योग, व्यापारी अथवा दुकानदार ने कितनी राशि दी और वह धन कहां खर्च हुआ।

उन्होंने मांग की कि हाफ मैराथन के लिए जुटाई गई राशि, प्रायोजकों की सूची और खर्च का पूरा विवरण सार्वजनिक किया जाए। साथ ही आयोजन के वित्तीय लेन-देन का स्वतंत्र एवं पारदर्शी ऑडिट कराया जाए। उन्होंने पूछा कि रेवाड़ी में हर वर्ष होने वाली ऐसी हाफ मैराथन के पिछले आयोजनों का आय-व्यय अब तक जनता के सामने क्यों नहीं रखा गया।

पानी के लिए धन नहीं, आयोजन पर करोड़ों क्यों?

विद्रोही ने कहा कि रेवाड़ी शहर के नागरिक पिछले करीब दस वर्षों से पेयजल संकट और पानी की राशनिंग का सामना कर रहे हैं। नहरी पानी के भंडारण के लिए अतिरिक्त जलाशय बनाने हेतु भूमि उपलब्ध नहीं होने और धन की कमी का तर्क दिया जाता रहा है।

उन्होंने सवाल उठाया कि जब सरकार के पास पेयजल भंडारण टैंक बनाने के लिए भूमि अधिग्रहण और निर्माण हेतु पर्याप्त धन नहीं है तो हाफ मैराथन जैसे आयोजनों पर करोड़ों रुपये खर्च करने के लिए धन कहां से आ जाता है? रेवाड़ी के नागरिकों की प्राथमिक आवश्यकता पर्याप्त पेयजल है अथवा प्रचारात्मक आयोजन?

नशा घटने के बजाय दस गुना बढ़ा : विद्रोही

विद्रोही ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार ने नशा रोकने के नाम पर ऐसा अभियान चलाया कि आज हरियाणा के 20 से अधिक जिले नशे की गिरफ्त में आ चुके हैं। भाजपा के सत्ता में आने के बाद प्रदेश में नशे की समस्या कम होने के बजाय कई गुना बढ़ गई है।

उन्होंने कहा कि सरकार और प्रशासन नशे के विरुद्ध ईमानदारी एवं गंभीरता से लड़ने के स्थान पर हाफ मैराथन जैसे आयोजन करके करोड़ों रुपये बर्बाद कर रहे हैं। इन प्रचारात्मक आयोजनों से मीडिया में चेहरा तो चमकाया जा सकता है, लेकिन नशे की समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सकता।

विद्रोही ने मांग की कि सरकार दिखावटी आयोजनों के बजाय नशा तस्करों के नेटवर्क को तोड़ने, नशामुक्ति एवं पुनर्वास केंद्रों की व्यवस्था सुधारने और युवाओं को खेल एवं रोजगार से जोड़ने के लिए ठोस कदम उठाए।

नशे के विरुद्ध परिणाम बताने की चुनौती

ग्रामीण भारत के अध्यक्ष ने दावा किया कि प्रदेश में नशे की समस्या घटने के बजाय लगातार बढ़ी है। उन्होंने सरकार से पूछा कि ‘नशे से जंग’ के नाम पर कराई गई हाफ मैराथन से नशे की रोकथाम में क्या ठोस परिणाम हासिल होंगे।

विद्रोही ने कहा कि नशे के खिलाफ लड़ाई के लिए तस्करों पर कठोर कार्रवाई, नशामुक्ति एवं पुनर्वास केंद्रों का विस्तार, युवाओं के लिए रोजगार और खेल सुविधाएं तथा व्यापक जनजागरूकता अभियान आवश्यक हैं। उन्होंने आयोजन में कथित चंदा वसूली के आरोपों की निष्पक्ष जांच कराने और पूरी वित्तीय जानकारी जनता के सामने रखने की मांग की।

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Author: Bharat Sarathi

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